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कम्पीटीशन रिव्यू


हैल्‍थकेयर करें करियर ‌की केयर

पिछले कुछ वर्षो में हैल्थकेयर सेक्टर में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। अस्पताल भी अपना पारंपरिक आवरण उतार कर जहां मल्टी स्पेशियेलिटी रूप अख्तियार कर रहे हैं, तो वहीं यहां मिलने वाली सुविधाओं में भी इजाफा हो रहा है। इस क्षेत्र में करियर अब सिर्फ  डाक्टर या नर्स तक ही सीमित नहीं रहा….

cereerअब हैल्थकेयर सेक्टर एक पॉपुलर करियर ऑप्शन बन गया है। यही कारण है कि आज के युवा डाक्टर बनने के अलावा इसके अन्य क्षेत्रों में भी करियर बना रहे हैं। यदि आप भी हैल्थ सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं, तो इससे संबंधित किसी भी क्षेत्रों में अपनी रुचि के अनुरूप करियर बना सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हैल्थकेयर सेक्टर में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। अस्पताल भी अपना पारंपरिक आवरण उतार कर जहां मल्टी स्पेशियेलिटी रूप अख्तियार कर रहे हैं, तो वहीं यहां मिलने वाली सुविधाओं में भी इजाफा हो रहा है। इस क्षेत्र में करियर अब सिर्फ डाक्टर या नर्स तक ही सीमित नहीं रहा। मौजूदा समय में हैल्थकेयर आईटी, हैल्थ इंश्योरेंस, हास्पिटल मैनेजमेंट, फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइसेज, मेडिकल टूरिज्म से लेकर लैबोरेटरी सपोर्ट के अलावा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर इस क्षेत्र में करियर की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि शहरी इलाकों के साथ रूरल हैेल्थकेयर मिशन की वजह से यह सेक्टर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहद तेजी से बढ़ रहा है। वैसे भी जानकारों की नजर में डाक्टर्स और नर्सों के साथ इस क्षेत्र में ट्रेंड प्रोफेशनल्स का अब भी भारी अभाव है। अगर आप भी इस क्षेत्र में एंट्री लेना चाहते हैं, तो यह याद रखें कि इस क्षेत्र में एंट्री के लिए विज्ञान विषयों से पढ़ाई करना आवश्यक होगा।

बढ़ता दायरा

इस क्षेत्र में प्राइवेट हैल्थकेयर प्रोवाइडर काफी आ गए हैं और इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी इंप्रूव हो रही है, जनसंख्या बढ़ रही है और जलवायु परिवर्तन के कारण बीमारियों की शक्ल भी बदल रही है। एक अन्य कारण जागरूकता भी है। लोग इन्फेक्शन कंट्रोल के प्रति जागरूक हैं। वे मेडिकल केयर और कम्फर्ट के लिए अच्छा पैसा खर्च करने को तैयार हैं। इस कारण उच्च तकनीक और अच्छा एन्वायरनमेंट प्रदान करने वाले तमाम हास्पिटल्स खुल रहे हैं। लोगों की खर्च करने की क्षमता के साथ-साथ कॉस्मेटिक और ऐस्थेटिक केयर की मांग भी लोगों में बढ़ रही है। प्लास्टिक सर्जन और डर्मेटोलॉजिस्ट की आज काफी मांग है। अब जनरल प्रैक्टिशनर्स से ज्यादा स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टरों की ज्यादा डिमांड की जा रही है। इस इंडस्ट्री में बड़े बदलाव की वजह तकनीक का एडवांसमेंट और चिकित्सा के क्षेत्र में नई-नई खोज से इस क्षेत्र का दायरा बढ़ा है।

संभावनाएं

हमारे देश में हैल्थकेयर सर्विसेज का बड़ा नेटवर्क है, लेकिन इनमें पर्याप्त स्टाफ  की काफी कमी है। एक आंकडे़ के मुताबिक सर्जंस,ऑब्सट्रीशियन और गाइनोकोलॉजिस्ट, फिजीशियंस, पीडियाट्रीशियंस व अन्य हैल्थ प्रोफेशनल्स की कमी है। संभावनाओं को देखते हुए देश के सभी बडे़ ग्रुप हास्पिटल्स की चेन खोलने के उद्देश्य से प्रवेश कर रहे हैं। इन्हें संभालने के लिए बड़ी संख्या में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की जरूरत है। डाक्टरों के लिए प्राइवेट नर्र्सिंग होम और पोलीक्लीनिक्स में भी बहुत संभावनाएं हैं, वहीं जनरल प्रैक्टिशनर,स्पेशलिस्ट, फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल के विशेषज्ञ और डेंटिस्ट अकेले या पार्टनरशिप में प्राइवेट क्लीनिक भी खोल सकते हैं। रिसर्च के अलावा एकेडमिक क्षेत्र में संबंधिक कालेजों या संस्थानों में आप टीचिंग प्रोफेशन भी अपना सकते हैं।

ब्रेन ड्रेन में कमी

अब मेडिकल क्षेत्र में काफी बदलाव आ चुका है। पहले इस पर सरकारी क्षेत्र का ही नियंत्रण था। इसलिए मांग के अनुरूप ट्रेंड प्रोफेशनल नहीं मिल पाते थे। स्पेशलाइजेशन व बेहतर ट्रेनिंग के लिए उन्हें विदेश जाना पडता था, लेकिन अब प्राइवेट हास्पिटल चेन्स को मेडिकल कालेजेस खोलने की अनुमति प्रदान करने के बाद सारी सुविधाएं यहीं उपलब्ध हो रही हैं। जिससे ब्रेन ड्रेन में कमी आई है और यहां के स्टूडेंट्स कम खर्च में स्टैंडर्ड शिक्षा हासिल कर रहे हैं और बेहतर जॉब पा रहे हैं।

मुख्य क्षेत्र

मेडिकल प्रैक्टिशनर

जनसंख्या बढ़ रही है और बीमारियां भी। ऐसे में डाक्टरों की कमी है। मेडिकल कालेज में प्रवेश के लिए प्री- मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) आयोजित किया जाता है। इस परीक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी के साथ 12वीं पास स्टूडेंट बैठ सकता है। एमबीबीएस (बैचलर डिग्री) की पढ़ाई करके कोई भी व्यक्ति प्रैक्टिस कर सकता है। एमबीबीएस के बाद मास्टर डिग्री (एमडी या एमएस) या स्पेशलाइजेशन किया जा सकता है।

फार्मेसी 

पीसीबी स्टूडेंट्स के लिए इसमें भी बेहतर करियर है, क्योंकि इन दिनों फार्मा से संबंधित प्रोफेशनल्स की डिमांड खूब है। यही कारण है कि देश के प्रमुख संस्थानों में इससे संबंधित कोर्स हैं। इसके लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं है। इसमें एंट्री के लिए कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षाएं, तो कुछ मैरिट पर लेते हैं। 12वीं के बाद फार्मेसी का कोर्स करके फार्मा कंपनियों में अच्छे पैकेज पर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव  भी बन सकते हैं। इसमें आप बीएससी(बायो) करके भी एंट्री कर सकते हैं। कुछ वर्ष के अनुभव के बाद आप फील्ड मैनेजर, एरिया मैनेजर, जोनल मैनेजर वगैरह बन सकते हैं।

नर्र्सिंग

नर्र्सिंग में भी काफी संभावनाएं हैं। यह महिलाओं के लिए सबसे उपयुक्त करियर माना जाता है। देश में तेजी से फैलते अस्पतालों में नर्स बनने के लिए नर्र्सिंग में डिप्लोमा या पाठ्यक्रम किया जा सकता है। कई इंस्टीच्यूट्स में इससे संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं।

हास्पिटल मैनेजमेंट 

यदि आपके पास मैनेजमेंट स्किल है और आप हैल्थ सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं, तो हास्पिटल मैनेजमेंट का कोर्स करके इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।

मेडिकल टूरिज्म 

ग्लोबलाइजेशन के बाद से दूरियां घटती जा रही हैं और भारत के पुराज्ञान का महत्त्व दुनिया  को पता चला है। विदेशों से लोग योग, आयुर्वेद द्वारा स्वास्थ्य लाभ के लिए भारत आ रहे हैं। इसके अलावा चिकित्सा के क्षेत्र में एशिया में भारत प्रमुख स्थान रखता है। यही कारण है कि कम खर्च में ही बेहतर प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ उठाने के लिए देश-विदेश से लोग भारत आते हैं। ऐसे लोगों को बेहतर सुविधा तभी मिल सकती है, जब संबंधित ट्रेंड प्रोफेशनल्स हों। इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए भारत में कई संस्थान इससे संबंधित कोर्स भी करा रहे हैं। इसमें नौकरी के बाद बेहतर सैलरी के साथ ही अलग-अलग संस्कृति के लोगों से मिलने-जुलने का मौका भी मिलता है। अनुभव होने पर आप विदेश भी जा सकते हैं।

फिजियोथैरेपी 

आज के युग में लोग बीमारी का इलाज करने के लिए दवाइयों का प्रयोग कम से कम करना चाहते हैं, जिसके चलते फिजियोथैरेपिस्ट की मांग में इजाफा हुआ है। फिजियोथैरेपी फिजिकल थैरेपी का दूसरा नाम है। यह एक तेजी से उभरता क्षेत्र है, जिसमें बीमारियों का उपचार दवाइयों को छोड़ व्यायाम करके किया जाता है।

प्रमुख संस्थान

* आईजीएमसी, शिमला (हिप्र)

* टांडा मेडिकल कालेज, कांगड़ा(हिप्र)

* आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कालेज, पुणे

* भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, पुणे

* महात्मा गांधी इंस्टीच्यूट ऑफ  मेडिकल साइंसेज, वर्धा

* ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ  मेडिकल साइंस,नई दिल्ली

* पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीच्यूट ऑफ  मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़

* गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली

वेतनमान

हैल्थकेयर सेक्टर में वेतनमान आपके कार्यक्षेत्र के अनुसार ही निर्धारित होता है। वेतनमान इस बात पर भी निर्धारित होता है कि आपने सरकारी क्षेत्र ज्वाइन किया है या निजी क्षेत्र।

रिक्रूटमेंट

इन सभी क्षेत्रों में जॉब्स के लिए केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर अपनी आवश्यकता के अनुरूप रिक्तियां निकालती रहती हैं। यदि आप सरकारी नौकरी के इच्छुक हैं, तो इन परीक्षाओं के माध्यम से गवर्नमेंट सेक्टर में जा सकते हैं। यदि आपके पास बेहतर स्किल और योग्यता है, तो प्राइवेट सेक्टर में बेहतर सैलरी के साथ सुनहरा भविष्य बना सकते हैं।

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