Divya Himachal Logo Aug 20th, 2017

कम्पीटीशन रिव्यू


भारत का इतिहास

1947 में तैयार हुआ संविधान का प्रारूप

गतांक से आगे-

ये सिंध-संविधान और प्रांतीय  संविधान समितियों के सदस्यों को 2 जून, 1947 को भेजे गए। इसके अगले ही दिन ब्रिटिश सरकार की 3 जून, की योजना आ गई, जिससे सारा नक्शा ही बदल गया। देश का विभाजन होना था दो डोमिनियन बननी थी, दोनों की अलग-अलग संविधान सभाएं होनी थीं। मंत्रि-मिशन योजना के अंतर्गत होने वाले वर्गीकरण और समूहों के संविधान निर्माण के लिए अलग-अलग बैठने आदि का अब कोई प्रश्न नहीं रहा। विभाजन योजना की संविधान निर्माण के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण प्रतिक्रिया यह हुई कि तुरंत ही संघ संविधान और प्रांतीय संविधान-समितियों ने निर्णय किया कि भारत एक शक्तिशाली केंद्र वाला संघ होगा। सन् 1935 के भारत शासन अधिनियम की तरह तीन विधायी सूचियां होंगी किंतु अवशिष्ट शक्तियों का वास केंद्र में होगा।

संविधान का प्रथम प्रारूप

संविधान का पहला प्रारूप सांविधानिक परामर्शदाता बेनेगल नरसिंह राज की देखरेख में संविधान सभा के सचिवालय की परामर्श शाखा ने अक्तूबर, 1947 में तैयार किया। इस प्रारूप के तैयार होने के पूर्व दृष्टांत एकत्र कर उन्हें संविधान सभा के सदस्यों में वितरित कर दिया। इन पूर्व दृष्टांतों मे संसार के प्रायः 60 देशों के संविधानों के कार्यकारी, विधायी, प्रक्रिया संबंधी और प्राशासनिक तथा कुछ अन्य उपबंधों को तुलनात्मक रूप में संकलित किया गया था। पूर्व दृष्टांतों का  यह संकलन मुख्य रूप से दो समूहों में बंटा हुआ था। एक समूह में आस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड जैसे ब्रिटिश राष्ट्रमंडलीय देशों की  सांविधानिक रूपरेखा दी गई थी तथा दूसरे समूह में कुछ अन्य देशों जैसे डेंजिक, जर्मनी स्विट्जरलैंड, संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत समाजवादी गए।  राज्य संघ के सांविधानिक उपबंध दिए गए थे। इस सामग्री के साथ ही विभिन्न देशों में राज्य के प्रधान, मूल अधिकारों अल्पसंख्यकों को दिए जाने वाले परित्राणोें प्रतिनिधित्व पद्धतियों और द्वितीय सदनों के बारे में सहायक सामग्री भी दी गई थी। जब भारत के संविधान का पहला प्रारूप तैयार हो गया, तब संविधान सभा के अध्यक्ष ने सांविधानिक परामर्शदाता बेनेगल राव को संसार के प्रमुख संविधान- शास्त्रियों से भारत के भावी संविधान की प्रमुख विश्ेषताओं के संबंध में विचार-विनिमय करने के लिए अमरीका, आयरलैंड कनाडा और ब्रिटेन भेजा।

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August 9th, 2017

 
 

कैरियर रिसोर्स

हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन द्वारा निम्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पद – जूनियर क्लर्क। शैक्षणिक योग्यता – 12वीं पास। स्नातक/परास्नातक उम्मीदवार जिनके पास कम्प्यूटर की जानकारी है, वे भी इन पदों के लिए […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

हिमाचल की विभूतियां

नौकरी छोड़ क्रांतिकारी बने लाल चंद प्रार्थी नौकरी से त्यागपत्र देकर लाल चंद प्रार्थी ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और देश की स्वतंत्रता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 1952 ई. से 1962, 1967 ई. में  वह विधानसभा के सदस्य बने। 1964 ई. में […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

हैंग ग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध है बीड़ बिलिंग

सरकार ने कांगड़ा जिला में इंद्रूनाग को पैरा ग्लाइडिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की आज्ञा दी। दूसरा स्थान बीड़ बिलिंग है, जो अंतरराष्ट्रीय हैंग ग्लाइडिंग सेंटर के रूप में प्रसिद्ध है और विश्व भर से हैंग ग्लाइडिंग करने वालों को आकर्षित करता है… […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

करियर रिसोर्स

मैं इंडियन कोस्ट गार्ड से जुड़ कर करियर बनाना चाहती हूं। महिलाओं के लिए इसमें नौकरी की क्या-क्या संभावनाएं हैं? — रोहिणी शर्मा, नाहन इंडियन आर्म्ड फोर्सेज की सबसे युवा ब्रांच इंडियन कोस्ट गार्ड है। ये हमारी 7615 किमी लंबी कोस्टलाइन की रक्षा करते हैं। […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

सेप्टिक टैंकों से भूमि के भीतर फैलता प्रदूषण

खेतों में डाली जाने वाली रासायनिक खादें, कीटनाशक दवाइयां, खनिज पदार्थों का दोहन, कारखानों से निकली घातक रासायनिक तरल गंदगी, गांवों और शहरों का कचरा आदि जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। भूमिगत सेप्टिक टैंकों तथा रासायनिक पदार्थों से भूमि के भीतर प्रदूषण फैल […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

क्षत्रियों के हाथ में होती थी जनपदों की सत्ता

एक राज जनपद में क्षत्रिय का नाम तथा निवासियों का नाम भी जनपद के ही नाम पर होता था। जनपदों में और जातियों तथा वर्णों के लोग भी रहते थे, परंतु राजसत्ता तो क्षत्रियों के हाथ में रहती थी। इन राज जनपदों में कम्बोज, गांधार, […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

नई परंपराओं को जगह दे रहे प्रचलित प्राचीन संस्कार

पिछले दशकों में संचार साधनों के विकास, शिक्षा के प्रसार एवं परस्पर संपर्क के कारण विभिन्न इलाकों में प्रचलित संस्कारों का प्रभाव एक-दूसरे क्षेत्रों में देखा जा सकता है। धीरे-धीरे दीर्घ समय से प्रचलित संस्कार अब नई परंपराओं को जगह दे रहे हैं… लोक संस्कृति […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

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मनुष्य द्वारा सर्वप्रथम किस अनाज का प्रयोग किया गया? (क) बाजरा           (ख) जौ (ग) धान  (घ) गेहूं सिंधु घाटी के लोग किस की पूजा करते थे? (क) ब्रह्मा की        (ख) विष्णु की (ग) पशुपति की      (घ) इंद्र देव की गुप्तकालीन बौद्ध शिक्षा का महान […] विस्तृत....

August 9th, 2017

 

गणित में गुणात्मक करियर

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August 2nd, 2017

 
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