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कम्पीटीशन रिव्यू


बनेर और मांझी खड्डों के संगम पर बसा है कांगड़ा

चार ताबो का बौद्ध मठ मसरूर के चट्टान के कटे मंदिर, कांगड़ा किला और मनाली में हिडिंबा देवी के मंदिर को 2012 ई. में विश्व धरोहर में शामिल किया गया है। यह बात प्रदेश को विश्व धरोहर के पर्यटन के बड़े पर्दे पर लाने में सहायता करेगी। कांगड़ा का नगर बनेर और मांझी खड्डों के संगम पर स्थित है…

कांगड़ा किला

कांगड़ा का किला कटोच वंश के संस्थापक भूमा चंद द्वारा बनाया गया था। लंबे समय तक यह उत्तरी भारत के शासकों के आकर्षण का केंद्र रहा। इस किले पर पहला आक्रमण कश्मीर के राजा श्रेष्ठ द्वारा 470 ई में किया गया। 1009 ई. में मोहम्मद गजनी ने कांगड़ा के किला को लूटा। वह अपने साथ 7 लाख सोने के सिक्के, 700 मन (28 टन) सोने चांदी के बने बरतन 20 मन (8 टन) हीरे और मोती ले गया। 1337 ई. मोहम्मद तुगलक और 1357 ई. में फिरोज शाह ने कांगड़ा किले को अपने कब्जे में लिया 1540 ई. में में शेरशाह सूरी के एक कमांडर ने इसे कब्जे में लिया। 1620 ई. में जहांगीर ने कांगड़ा के किले पर अधिकार किया। 1622 ई. में वह  इसे देखने आया था। 1780-81 ई. में यह जस्सा सिंह कन्हैया  के नियंत्रण मं आया और 1786 ई. में महाराजा संसार चंद द्वितीय के नियंत्रण में। 1846 ई. में कांगड़ा किला ब्रिटिश के हाथों में चला गया। कांगड़ा का किला बाण गंगा नदी के किनारे 350 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। कांगड़ा किला में किले के अगले आंगन में लक्ष्मी नारायण और आदीनाथ के मंदिर जैन धर्म को समर्पित हैं। किले के भीतर दो तालाब हैं, जिनमें से एक को कपूर सागर कहा जाता है। इस समय किला भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अधीन से संबद्ध है यह 1905 ई के भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इस पहाड़ी में 40 स्थान पुरातत्त्व से संबद्ध हैं, जिन में से चार ताबो का बौद्ध मठ मसरूर के चट्टान के कटे मंदिर, कांगड़ा किला और मनाली में हिडिंबा देवी के मंदिर को 2012 ई. में विश्व धरोहर में शामिल किया गया है। यह बात प्रदेश को विश्व धरोहर के पर्यटन के बड़े पर्दे पर लाने में सहायता करेगी। कांगड़ा का नगर बनेर और मांझी खड्डों के संगम पर स्थित है और इससे धारा प्रवाह बाण गंगा नजदीक ही बहती है। यह शहर मंदिरों, किलों और अब तीव्रता से व्यापारिक केंद्र के रूप में भी उभरा है।

कसौली

यह एक मनोहर पहाड़ी स्थान है तथा पक्षियों का निरीक्षण करने वालों के लिए अति लोलुप स्थान है। गड़खल में सत्य साई बाबा के आश्रम के समीप मंकी प्वाइंट है। कसौली में पास्चर संस्थान भी है, जो कुत्ते के काटे का वैक्सीन भी तैयार करता है।

कटराईं

यह कुल्लू जिला में 1463 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। घाटी का केंद्रीय और सबसे चौड़ा मार्ग कटराईं कुल्लू नगर से मनाली के मार्ग पर  20 किलोमीटर की दूरी पर है। सेब के बागीचे और ट्राउट मछली के अंडे सेने के कार्य ने इस स्थान को प्रसिद्धि दी है। यह शहद की मक्खियों के लिए भी प्रसिद्ध है।

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