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कम्पीटीशन रिव्यू


सोना निकालने के लिए प्रसिद्ध थी सुन्न खड्ड

पूर्वकाल में सुन्न खड्ड सोना निकालने के लिए ख्यात रही, इसलिए इसे सुन्न खड्ड कहते हैं। हारसीपत्तन से बढ़ती ब्यास की सजल धारा जयसिंहपुर के समीप कुंजद्वार तीर्थ, ‘मुंडियां दा ट्याला’ और ‘बुहारे द बाग’ जो सुप्रसिद्ध स्थल हैं, के साथ बहती है…

हिमाचल की नदियां

ब्यास नदी – मंडी से निकली ‘सुन्न खड्ड’ बिनवा नदी में मिलती है। पूर्वकाल में सुन्न खड्ड सोना निकालने के लिए ख्यात रही, इसलिए इसे सुन्न खड्ड कहते हैं। हारसीपत्तन से बढ़ती ब्यास की सजल धारा जयसिंहपुर के समीप कुंजद्वार तीर्थ, ‘मुंडियां दा ट्याला’ और ‘बुहारे द बाग’ जो सुप्रसिद्ध स्थल हैं, के साथ बहती है। जैसे ही ब्यास नदी सुजानपुर से बढ़ती भलेठ के दरवाजे के समानांतर गुजरती है, तो इसका बहाव तंग और गहरा होता जाता है। नादौन से पहले स्थानीय ‘खड्ड कुणाह’ भी ब्यास नदी में मिलती है। जहां बड़ा गांव के निकट तट पर बिलिकेशर महादेव का एक प्राचीन मंदिर है। कुणाह खड्ड हमीरपुर जनपद की बारह मासी खड्ड है। कुणाह खड्ड लोकेशन मैप-स्टडी एरिया के अनुसार इसकी लंबाई चौंसठ किलोमीटर तथा जलग्रहण क्षेत्र 345 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस खड्ड का उद्गम स्थल टौणी देवी है। यहां से अपनी यात्रा प्रारंभ कर यह कंजियाणा, डेरा परोल, महल, टिक्कर, नालटी, बगारली, बलेटा, रंगस, रैल, फतेहपुर, कुठेड़ा तथा जंगलू गांवों  का स्पर्श करती हुई तथा कहीं-कहीं इनके भू-भागों का वक्षस्थल चीरती हुई विल्वकालेश्वर नामक पवित्र तीर्थ स्थान पर ब्यास नदी की पावन धारा में विलीन हो जाती है।

कुणाह खड्ड का नाम संभवतया, इसके साहसिक गुणों के कारण ही पड़ा है। (कुण-कौन, हा-है) अर्थात कौन है, जो मेरे सामने खड़ा रहने का साहस जुटा सके? कुणाह खड्ड का जलग्रहण क्षेत्र समुद्रतल से 480 मीटर से 1132 मीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। यह सारा ही क्षेत्र लगभग पहाड़ी है। इस क्षेत्र से दो राष्ट्रीय उच्च मार्ग गुजरते हैं। जालंधर-हमीरपुर तथा शिमला- धर्मशाला राष्ट्रीय उच्च मार्गों के अतिरिक्त टौणी देवी, कांगू, गलोड़ और नादौन से रंगस होकर वाया रैल, हमीरपुर से धनेड़ वाया मसयाणा आदि लगभग 400 किलोमीटर सड़कें बनी हैं। कुणाह खड्ड की अनेक सहायक खड्डेें  हैं-गसोती, हथली, शुक्र, सुकराला तथा अनेक अन्य छोटी-बड़ी खड्डें। कुणाह खड्ड के किनारे स्थित मार्कंडेय ऋषि के नाम से प्रसिद्ध ‘मार्कंडेय’ नामक पवित्र स्थान माना जाता है। नादौन में ब्यास का पत्तन भी बड़ा मनोहारी है।

ब्यास नदी की एक अन्य सहायक, मान खड्ड  हमीरपुर जिला की बिझड़ी तथा नादौन दो तहसीलों में ही सीमित है।  मान खड्ड का उद्गम बड़सर तथा विलय नादौन के समीप ब्यास नदी में हुआ है।

April 26th, 2017

 
 

हिमाचल की आदिम जाति माने जाते हैं कुलिंद

कुनिंदों के साहित्यिक और पुरातात्विक संदर्भों में स्पष्ट हो जाता है कि हिमाचल क्षेत्र की आदिम जाति रही है। महाभारत काल से लेकर तो इनका लगातार नाम और संदर्भ आता है, वैदिक युग में भी उन्होंने दस्यु के नाम से आर्यों के साथ संघर्ष किया […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

नामकरण के दिन की जाती है षष्टी देवी की पूजा

पहले यहां पुत्रियों के जन्मोत्सव करने की प्रथा नहीं थी, परंतु आजकल पढ़े-लिखे परिवारों से पुत्र-पुत्री में भेद न होने के कारण कन्याओं के जन्मदिन के पूजन की भी स्वस्थ परंपरा चल पड़ी है। नामकरण के दिन गोबर की बनाई षष्टी देवी को इस अवसर […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

कैरियर रिसोर्स

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा निम्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। पद – वैज्ञानिक। शैक्षणिक योग्यता – विज्ञापित पदों के अनुसार अलग-अलग निर्धारित। आयु सीमा – अधिकतम आयु 52 वर्ष। आवेदन की अंतिम की तिथि – 25 […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

क्‍या आप जानते हैं

‘ कोल बांध जल विद्युत संयंत्र ’ किस नदी पर निर्मित है? (क) चिनाब                  (ख) रावी (ग) ब्यास                    (घ) सतलुज 2.‘ गुम्मा एवं द्रंग ’ नामक स्थल किस लिए प्रसिद्ध हैं? (क) पहाड़ी नमक          (ख) चूना पत्थर (ग) अखरोट               (घ) अभ्रक ‘ कुफरी चंद्रमुखी ’ […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

भारत का इतिहास

भारत ने अस्वीकार किया 1935 का अधिनियम भारत की ओर से संविधान सभा की मांग निश्चित रूप से प्रस्तुत करने का यह पहला अवसर था। इसके बाद यह मांग बार-बार और अधिकाधिक आग्रहपूर्वक प्रस्तुत की जाती रही। अप्रैल, 1936 के लखनऊ अधिवेशन तथा दिसंबर 1936 […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

दूसरों को जानने-समझने में खुद को न भूलें

मनुष्य जीवनभर यही सीखने की कोशिश करता रहता है कि दूसरों के साथ कैसे रहे, दूसरों से कैसा व्यवहार हो, दूसरों को कैसे प्रभावित किया जाए, लेकिन वह यह नहीं सीख पाता कि अपने साथ कैसे रहे, स्वयं से स्वयं का व्यवहार कैसा हो, स्वयं […] विस्तृत....

April 26th, 2017

 

अभिनय रूपहले पर्दे का करियर

अभिनय रूपहले पर्दे का करियरआज के जमाने में टीवी इंडस्ट्री, फिल्म इंडस्ट्री भारत की सबसे तेज ग्रोथ वाली इंडस्ट्री है। इसमें करियर बनाने के लिए कई ऑप्शंज होते हैं, जिनमें आगे बढ़ा जा सकता है। एक्टिंग में करियर बनाने वालों के लिए ढेरों अवसर हैं जैसे फिल्म, टेलीविजन, विज्ञापन […] विस्तृत....

April 19th, 2017

 

हताशा में आशा का दीप संदीप

हताशा में आशा का दीप संदीपसंदीप माहेश्वरी उन करोड़ो लोगों में से एक हैं, जिन्होंने संघर्ष किया, असफल हुए और तेजी से सफलता, खुशी और संतोष पाने के लिए आगे बढ़ते गए। एक सफल उद्यमी के साथ-साथ, दुनियाभर के लाखों-करोडों़ लोगों के सलाहकार, आदर्श और यूथ आइकॉन भी हैं। वह […] विस्तृत....

April 19th, 2017

 

समसामयिकी

समसामयिकीसिंगापुर ओपन सुपर सीरीज उदीयमान भारतीय शटलर बी साई प्रणीत ने हमवतन खिलाड़ी के श्रीकांत को सिंगापुर ओपन फाइनल में पराजित कर अपना पहला सुपर सीरीज खिताब जीता। दुनिया के 30वें नंबर के प्रणीत ने श्रीकांत को 350,000 डालर इनामी राशि के टूर्नामेंट के फाइनल […] विस्तृत....

April 19th, 2017

 
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