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कम्पीटीशन रिव्यू


सबसे पहले स्वप्न गढ़ें

फ्लाइंग लेफ्टिनेंट दिग्विजय  सिंह रोहड़ू, जिला शिमला

cereerवायुसेना में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने दिग्विजय सिंह  से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…

वायुसेना में जाने की प्रेरणा किस से मिली?

मैं शुरू से ही पायलट बनना चाहता था और इस देश में वायु सेना ही श्रेष्ठतम पायलट बनाती है। इसलिए वायु सेना ही मेरी पहली पसंद  और प्रेरणा रही है।

वर्दी पहनने के बाद आप बाकी युवाओं से खुद का मूल्यांकन कैसे करते हैं?

मै जानता हूं कि इच्छाशक्ति जिम्मेदारियों से ही पैदा होती है। वर्दी पहनने के बाद से ही मैने अपने आप पर जिम्मेदारी अनुभव की है।

पहली बार कब एहसास हुआ कि आपकी मंजिल यही है?

मै आठवीं कक्षा में था, जब मैं पायलट बनने की सोचा करता था। चंडीगढ़ में कालेज के दौरान वायु एनसीसी में भी था और मेरी पटियाला शिविर के दौरान पहली उड़ान भी रही और इस पहली उड़ान में ही मैने सुनिश्चित कर लिया था कि यही वह स्थान है, जहां मुझे होना चाहिए।

तैयारी कब शुरू की और कैसे की?

मैने दसवीं कक्षा के बाद से पायलट बनने की पूरी तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। मैं जानता था कि भौतिक  एवं गणित ही ऐसे विषय हैं, जो मुझे मेरे उद्देश्य को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं। इसलिए मैने नॉन मेडिकल संकाय चुना। परंतु मेरी असफलता कभी भी मेरे रास्ते में नहीं आई, बल्कि मैंने असफलताओं से सीख ली और आगे

बढ़ता रहा।

वायु सेना में जाने के लिए कोई तीन विशेषताएं जो जरूरी हैं

वायु सेना में जाने के लिए जज्बा होना जरूरी है, जिसके लिए बतौर पायलट संरक्षित (प्रिजर्वेंस) और नियमित होना भी आवश्यक है। अनुशासन तो जरूरी है ही।

वायु सेना ज्वाइन करके राष्ट्र के लिए आपका पैगाम क्या है?

मेरा राष्ट्र के नाम यह पैगाम है कि मात्र  कोई वर्दी पहनने से राष्ट्र की सेवा नहीं कर सकता है, बल्कि देश का वह हर नागरिक भी राष्ट्र सेवा कर सकता है, जो अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी और सच्चे दिल से कर रहा है और यह भावना सभी में समाहित होनी चाहिए। इस प्रकार के मानसिक बदलाव की आज राष्ट्र को आवश्यकता भी है।

शैक्षणिक व शारीरिक तैयारियों का संतुलन कैसे बिठाते हैं?

जैसे कहा भी गया है कि स्वस्थ तन में स्वस्थ मन निवास करता है, इसलिए शैक्षणिक दुरुस्ती के  साथ-साथ शारिरीक तंदुरुस्ती भी नितांत आवश्यक है।

हिमाचली युवा आपके अनुसार कहां मात खाते हैं?

हिमाचल में हमारे युवाओं को इस प्रकार का मार्गदर्शन नहीं है, लोग अवसरों के प्रति भी जागरूक नहीं हैं। ड्रग्ज ने भी युवाओं को बर्बाद कर दिया है। युवाओं को इन से दूर रहना चाहिए।

जीवन के प्रति आपका अनुशासन क्या है?

जीवन में हमें छोटे और बड़े दोनों प्रकार के उद्देश्य व लक्ष्य सुनिश्चित करने चाहिए। छोटे उद्देश्यों से ही बड़े लक्ष्य  प्राप्त होते हैं।

अपने आपको अब कितना बदला हुआ महसूस करते हैं?

अब मैं अपने आप में काफी सकारात्मक बदलाव महसूस कर रहा हूं। मैं आगामी जीवन में बहुत स्पष्ट और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद के साथ बहुत से अवसरों को देख रहा हूं।

नेवी और थल सेना के बजाय वायु सेना को ही क्यों चुना?

मैंने वायु सेना को चुना, क्योंकि मै सदैव जानता था कि पायलट बनने के लिए केवल वायु सेना ही मुझे यह मंच दे सकती है।

हिमाचली युवाओं के लिए करियर में भारतीय सेनाओं के जरिये कितने अवसर या विकल्प हो सकते हैं?

युवाओं के लिए सुरक्षा सेवाओं में बहुत अवसर हैं, जिनमें बारहवीं के पश्चात एनडीए, स्नातक के बाद सीएससी, एनसीसी, एफसी, एटी है, जिसमें लड़कियों के लिए भी ये सभी समान अवसर हैं।

हिमाचली शिक्षा कहां कमजोर पड़ती है, क्या करना चाहिए?

भारत के दूसरे राज्यों की अपेक्षा हिमाचल में शिक्षा बहुत बेहतर है। मुझे लगता है कि समय को देखते हुए उसका उचित इस्तेमाल होना चाहिए। हिमाचल में शिक्षा कमजोर नहीं, पर मंच उपलब्ध नहीं है।

हिमाचली होने के नाते आप अलग कैसे हैं?

हिमाचली होने पर गर्व है और छोटे से प्रदेश से निकलकर देश के क्षितिज पर छाने की अलग ही अनुभूति है।

हिमाचली युवाओं को आपके प्रमुख तीन टिप्स!

मुझे युवाओं की क्षमता और परिश्रम पर विश्वास है कि उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है, स्वप्न को सच करने के लिए स्वप्न देखना ही होगा।

 – बृजेश फिष्टा, रोहड़ू

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