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कम्पीटीशन रिव्यू


न्यूट्रीशन साइंस

करें करियर का पोषण

न्यूट्रीशन साइंस न्यूट्रीशन साइंस न्यूट्रीशन साइंस न्यूट्रीशन साइंस आहार और स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। आहार को प्रथम औषधि भी माना जाता है। जीवनशैली और खान-पान की आदतों में बड़ी तेजी से बदलाव हुआ है। इसके कारण बीमारियों के बढ़ते साम्राज्य ने न्यूट्रीशन साइंस में करियर के नए अवसर पैदा किए हैं…

मनुष्य का पूरा जीवन अपने पोषण और सुरक्षा में ही गुजर जाता है। पर यह है भी जरूरी क्योंकि अगर मनुष्य अपने शरीर की देखभाल नहीं करेगा, तो वह अपने दैनिक कार्य नहीं निपटा पाएगा, कमजोरी का एहसास करेगा। अब खाने को तो   कुछ भी खाकर अपनी भूख मिटाई जा सकती है, पर मनुष्य के लिए क्या खाना सही है, जिससे उसके शरीर का पोषण भी हो, यह सब हमें पता चलता है इस आहार एवं पोषण विज्ञान  से। शारीरिक आवश्यकताओं  के अनुसार आहार की पहचान और उनके अनुप्रयोग का अध्ययन आहार एवं पोषण विज्ञान में किया जाता है। इसे मनुष्य के पोषण संबंधित देखरेख का विज्ञान भी कहा जा सकता है। मनुष्य की जीवनशैली और खान-पान की आदतों में तेजी से बदलाव आया है। इसके कारण नई-नई बीमारियां भी अस्तित्व में आ रही हैं। इस तरह की बीमारियों के नियंत्रण में पोषण और आहार विज्ञान की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। इसी कारण इस क्षेत्र में करियर की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। आहार किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाता है। एक अच्छे तथा संतुलित आहार की आदत जीवन क्षमता को बेहतर बनाती है तथा घटिया आहार रुग्णता और रोगों को बढ़ाता है। हर युवा आज अपने स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट हो गया है। जिम जाने के साथ-साथ वह अपनी डाइट के प्रति भी उतना ही जागरूक हो गया है। आहार विज्ञान भोजन प्रबंधन से संबंधित होता है। इसीलिए न्यूट्रीशन साइंस का आधुनिक दौर में महत्त्व बढ़ा है और रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी हुई है।

शैक्षणिक योग्यता

इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों को स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर होम साइंस, फूड साइंस अथवा आहार एवं पोषण विज्ञान में पढ़ाई करनी चाहिए।  स्नातक की पढ़ाई करने के लिए होम साइंस, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान में से किन्हीं दो विषयों के साथ दस जमा दो  पास होना अनिवार्य है।

विभिन्न विशेषज्ञता क्षेत्र चिकित्सकीय आहार विज्ञानी– अस्पताल क्लीनिक तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में डाइट एक्सपर्ट के रूप में कार्य करते हैं।

सामुदायिक आहार विज्ञानी– सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों, स्वास्थ्य एवं फिटनेस क्लबों तथा डे केयर सेंटरों में कार्य करते हैं।

प्रबंधन आहार विज्ञानी- खाद्य सेवा प्रणालियों में आहार विशेषज्ञ होते हैं। वे अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूल खाद्य सेवाएं, कैफेटेरिया तथा रेस्तरां में कार्य करते हैं।

सलाहकार आहार विज्ञानी- स्वतंत्र व्यावसायिक व्यक्ति होते हैं, जो नर्सिंग होम सलाहकार अथवा पुस्तक लेखक होते हैं तथा चिकित्सा केंद्रों एवं फिटनेस कार्यक्रमों में रोगी के सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं।

विशेषज्ञों की बढ़ती मांग

लगभग दो दशक से आहार एवं पोषण विज्ञान में तेजी से विकास हो रहा है। सामान्य जनता में भी आहार के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। भोजन की आदतों में बदलाव और गंभीर बीमारियों के कारण आहार विशेषज्ञ की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। आहार एवं पोषण विशेषज्ञ का कार्य व्यक्ति को उसकी उम्र, लिंग, शारीरिक कार्यक्षमता के अनुसार व विभिन्न प्रकार की बीमारियां जैसे हृदय अटैक, किडनी के रोग,  कैंसर और डायबिटीज आदि में बीमारी के अनुसार आहार परामर्श देना होता है। आहार विशेषज्ञ की आवश्यकता गांव से लेकर कारपोरेट वर्ल्ड और फूड रिसर्च सेंटर तक में है। शोध से पता चला है कि 60 फीसदी बीमारियां सिर्फ  आहार के जरिए ही नियंत्रित की जा सकती हैं। अधिकांश शहरी जनसंख्या की भोजन आदतों में परिवर्तन होने के कारण पोषण विज्ञानियों और आहार विज्ञानियों की भूमिका अधिक महत्त्वपूर्ण होती जा रही है। जनसंख्या वृद्धि के साथ नर्सिंग होम, स्कूलों, कारागारों, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा गृह स्वास्थ्य देखरेख एजेंसियों में भोजन एवं पोषण संबंधी परामर्श की मांग में बढ़ोतरी हुई है।

वेतनमान

सरकारी क्षेत्र में सरकारी मानकों के आधार पर वेतनमान निर्धारित होता है। कुछ निजी क्षेत्र के होटल, रेस्तरां और खाद्य विनिर्माता उच्च वेतन तथा आकर्षक लाभ देते हैं। प्रारंभ में 15 हजार से 25 हजार और पद, अनुभव और सीनियोरिटी बढ़ने से इस में बढ़ोतरी होती है। निजी क्षेत्र में आपका वेतन आपकी कुशलता पर ही निर्भर करता है। यह आपके ऊपर निर्भर है कि आप अपने काम में कितने कुशल हैं।

प्रमुख शिक्षण संस्थान

 चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)

 सेंट बीड्स कालेज, शिमला

 उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद, आंध्र प्रदेश

 आरकेएमवी कालेज, शिमला

 महाराजा सयाजीराव बड़ौदा विश्वविद्यालय, गुजरात

 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र

 महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर

आहार विज्ञानी के कार्य

 खाद्य एवं पोषण कार्यक्रमों की योजना बनाना।

 स्कूलों तथा अस्पतालों में भोजन व्यवस्था का पर्यवेक्षण करना।

 आहार संबंधी बदलावों का सुझाव देना।

 रोगियों को आहार के महत्त्व की शिक्षा देना।

 बहुविषयक स्वास्थ्य देखभाल कार्य करना।

 बीमारी की गंभीरता तथा उपचार की जटिलता में भोजन के लाभ-हानि के बारे में बताना।

 रोगी की पोषण संबंधी स्थिति को ध्यान में रखते हुए डाइट चार्ट का सुझाव देना।

अवसर कहां-कहां

सरकारी क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों, सरकारी स्वास्थ्य देखभाल विभागों, स्कूल-कालेजों और कैफेटेरिया में पोषण संबंधी आवश्यकताओं के नियोजन के कार्य कर सकते हैं। खेल एवं स्वास्थ्य क्लब, खेल होस्टलों और एथलीट कैंप के लिए भी कार्य कर सकते हैं। स्वास्थ्य तथा मनोरंजन क्लबों, कैंटीन तथा नर्सिंग देखभाल संस्थाओं को भी पोषण विज्ञानियों और आहार विज्ञानियों की सेवाओं की आवश्यकता होती है। सितारा होटलों तथा रेस्तरां के खान-पान विभाग , अध्यापन, अनुसंधान के क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर हैं। विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक या निजी क्षेत्र के अनुसंधान संस्थानों, खाद्य उत्पादन विनिर्माता कंपनियों तथा अस्पतालों में भी अनुसंधान करियर चुन सकते हैं। इस क्षेत्र में स्वरोजगार की भी संभावनाएं हैं। निजी अस्पताल तथा फिटनेस सेंटर बेहतर पोषण विशेषज्ञों की सेवाएं लेने में तत्पर होते हैं। स्वतंत्र आहार सलाहकार के रूप में भी काम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य देखभाल में भूमिका

आहार विज्ञानी की भूमिका 19 वीं शताब्दी के प्रारंभ से ही काफी महत्त्वपूर्ण रही है। अब उसकी भूमिका को व्यापक रूप से स्वीकार भी किया जाने लगा है। कुछ व्यक्ति सोचते हैं कि आहार विज्ञानी केवल व्यक्तियों को अपना वजन कम करने के लिए आहार संबंधी राय देते हैं,जबकि यह उनकी भूमिका का एक छोटा सा भाग है। आहार विज्ञानी पोषण संबंधी देखभाल के बारे में रोगी तथा चिकित्सक के बीच एक संपर्क कड़ी के रूप में कार्य करता है। इस तरह आहार विज्ञानी का कार्य अर्द्ध चिकित्सकीय होता है। आहार के नियमों की अवहेलना करने पर रोगी की दशा बिगड़ जाती है और कभी-कभी तो यह जानलेवा भी साबित होती है। दवा के साथ रोग के अनुकूल आहार लेने से स्वास्थ्य में बहुत तेजी से सुधार आता है। इसके विपरीत आहार का ध्यान न रखने से दवाओं का असर बहुत कम होता है।

सेहत के प्रति संजीदगी से बढ़ा है स्कोप

डा. रेखा मल्होत्रा डीन होम साइंस कालेज, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी पालमपुर

डा. रेखा मल्होत्रान्यूट्रीशन साइंस में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने रेखा मल्होत्रा से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…

न्यूट्रीशन साइंस में करियर का क्या स्कोप है।

वर्तमान में न्यूट्रीशन साइंस विषय अति महत्त्वपूर्ण है। लोग आज अपनी सेहत के प्रति काफी जागरूक हो गए हैं। इस वजह से इस करियर में स्कोप भी काफी बढ़ गए हैं। सेहत से जुड़े इस व्यवसाय में डाइटीशियन, स्कूल, कालेज, अनुसंधान के केयर सेंटर व वृद्धाश्रम इत्यादि में जाने के बेहतर स्कोप हैं।

इस फील्ड में करियर बनाने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए ?

न्यूट्रीशन क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए युवाओं की शैक्षणिक योग्यता साइंस विषय के साथ या होम साइंस विषय में दस जमा दो होना आवश्यक है।

न्यूट्रीशन साइंस मे कौन-कौन से विशेषज्ञ कोर्स किए जा सकते थे।

न्यूट्रीशन साइंस विषय में डाइटिक्स में डिप्लोमा, न्यूट्रीशन में डिप्लोमा, स्नातक डिग्री, होम साइंस, एमएससी व फूड साइंस में पीएचडी इत्यादि की जा सकती है। यह एक व्यापक क्षेत्र है और इसमें लगभग आधा दर्जन विशेषज्ञ कोर्स शामिल हैं।

रोजगार के अवसर किन क्षेत्रों में उपलब्ध हैं?

वर्तमान समय में सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों, स्कूलों, कालेज, डे-केयर सेंटरों, नर्सिंग होम में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, जबकि युवा प्राइवेट तौर से भी अपना व्यवसाय कर सकते हैं।

प्रारंभिक आय इस क्षेत्र में कितनी है।

इस क्षेत्र में प्रारंभिक आय 15000 से 20000 तक की है।

प्रदेश में इस संबंधित पाठ्यक्रम कहां पढ़ाया जाता है।

न्यूट्रीशन साइंस से संबंधित पाठ्यक्रम कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के होम साइंस कालेज के अतिरिक्त यह विषय सेंट बीड्स कालेज शिमला तथा आरकेएमवी कालेज शिमला में  भी पढ़ाया जाता है।

युवाओं को इस क्षेत्र में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

न्यूट्रीशन साइंस का मानव के जीवन में महत्त्वपूर्ण रोल है। इस क्षेत्र में पदार्पण हेतु प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। सरकारी व अर्द्धसरकारी क्षेत्र तक पहुंचने हेतु युवाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

न्यूट्रीशन साइंस की प्रमुख शाखाओं के बारे में बताएं।

न्यूट्रीशन साइंस की लगभग एक दर्जन प्रमुख शाखाएं हैं, जिसमें फूड साइंस न्यूट्रीशन एंड टेक्नोलॉजी, फूड एवं न्यूट्रीशन, फूड साइंस, फूड साइंस एंड न्यूट्रीशन तथा ह्यूमन न्यूट्रीशन इत्यादि शाखाएं शामिल हैं।

जो युवा इस फील्ड में आना चाहते हैं, उनके लिए कोई संदेश दें।

युवतियों के अतिरिक्त इस आधुनिक युग में युवकों का रुझान भी इस क्षेत्र में बढ़ा है। इस क्षेत्र में आने के लिए जमा दो की परीक्षा में हाई पर्सेंटेज में पास होना जरूरी है। इस विषय में युवाओं में रुचि व समर्पण की भावना होना जरूरी है। वर्तमान में हर व्यक्ति अपनी सेहत के प्रति जागरूक है, जिस कारण यह विषय महत्त्वपूर्ण हो गया है।

-राकेश सूद, पालमपुर

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