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कम्पीटीशन रिव्यू


भारत का इतिहास

स्वराज्य पार्टी ने की आत्मनिर्णय की मांग

समिति की रिपोर्ट नेहरू-रिपोर्ट के नाम से विख्यात हुई। यह भारतीयों द्वारा अपने देश के संविधान निर्माण की पहली चेष्टा थी। कुछ संशोधनों के साथ नेहरू-रिपोर्ट को सर्वदल सम्मेलन ने सिद्धांत रूप में स्वीकार कर लिया। नेहरू समिति द्वारा प्रस्तुत सांविधानिक व्यवस्था डोमिनियन स्टेटस तथा संसदीय पद्धति पर उत्तरदायी सरकार के सिद्धांतों पर आधारित थी। इसमें यह माना गया था कि प्रभुता का वास भारत के लोगों में है, कुछ मूल अधिकार दिए गए थे तथा एक संघात्मक व्यवस्था की रूपरेखा सुझाई गई थी, जिसके अंतर्गत अवशिष्ट शक्तियों का वास केंद्र में होता, केंद्रीय तथा प्रांतीय विधानसभाओं के लिए चुनाव सम्मिलित निर्वाचक मंडलों के आधार पर होते तथा अल्पसंख्यकों के लिए कुछ सीमित काल के लिए स्थानों के आरक्षण का प्रावधान होता। 31 अक्तूबर 1929 को वायसराय लार्ड इर्विन ने घोषणा की कि साइमन आयोग की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद, भारत की सांविधानिक समस्या पर विचार करने के लिए एक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ब्रिटिश भारत और देशी राज्यों के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। यह सम्मेलन भारत के भावी संविधान के बारे में विभिन्न वर्गों की अधिकतम सहमति प्राप्त करने का  प्रयास करेगा। 1929-32 में लंदन में तीन गोलमेज हुए। इन सम्मेलनों के फलस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने कुछ विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए, जो मार्च 1933 में एक श्वेतपत्र में प्रकाशित किए गए। ब्रिटिश संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति ने श्वेतपत्र की योजना  का परीक्षण किया और कुछ परिवर्तनों के साथ उन्हें स्वीकार किया। संसद ने यह संशोधित योजना 1935 के भारतीय शासन अधिनियम के रूप में पास की। जहां तक भारत के इस दावे का संबंध था कि उसे अपने संविधान को बनाने का अधिकार मिलना चाहिए, संसदीय संयुक्त समिति ने कहा कि भारतीयों को संविधान बनाने का अधिकार देना इस समय व्यावहारिक नहीं है। 1935 के अधिनियम की धारा- 110 में यह भी कहा गया कि भारत के संघीय और प्रांतीय विधानमंडलों को स्वतः संविधान में संशोधन करने का अधिकार न होगा। 1934 में स्वराज्य पार्टी ने आत्म निर्णय के अधिकार की मांग की और एक प्रस्ताव द्वारा घोषणा  की कि  आत्म-निर्णय के अधिकर  को क्रियान्वित करने का एकमात्र उपाय देश का संविधान बनाने के लिए  भारतीय प्रतिनिधियों की एक संविधान सभा बुलाना। कांग्रेस ने भी इस मांग का समर्थन किया और कांग्रेस कार्यकारिणी समिति ने जून 1934 में श्वेत पत्र के संबंध में एक प्रस्ताव पास किया।

April 19th, 2017

 
 

क्या आप जानते हैं

किस झील के किनारे हिंदुओं, सिखों और बौद्धों का तीर्थ स्थान है? (क) रेणुका झील              (ख) चंद्रताल झील (ग) रिवालसर झील          (घ) डल झील 2. मुलगन घाटी हिमाचल प्रदेश के कौन से जिला में स्थित है? (क) सोलन में              (ख) किन्नौर में (ग) मंडी में                […] विस्तृत....

April 19th, 2017

 

आधुनिकता के कारण खत्म हो रही जनेऊ की परंपरा

रजस्वला होने के कारण स्त्रियों को जनेऊ का अधिकार नहीं है। आधुनिकता के प्रभाव में यज्ञोपवीत परंपरा खो रही है। जनेऊ धारण करने की प्रवृत्ति में हो रही कमी का प्रमुख कारण आधुनिकता तथा इस संस्कार से जुड़े नियमों की कठोरता है…  रीति-रिवाज व संस्कार […] विस्तृत....

April 19th, 2017

 

समसामयिकी

समसामयिकीरेल विकास प्राधिकरण केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेलवे में बड़े सुधार की शुरुआत करते हुए रेल विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दे दी। इससे पहले सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में रेल बजट का आम बजट में विलय कर दिया था।  उम्मीद है कि एक […] विस्तृत....

April 12th, 2017

 

साहित्य की समझ जरूरी

साहित्य की समझ जरूरीसीमा शर्मा संस्थापक, हिमाचल संस्कृति शोध संस्थान एवं नाट्य रंगमंडल, मंडी रंगमंच में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने सीमा शर्मा से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश… रंगमंच में करियर का क्या स्कोप है? रंगमंच से ही फिल्म, टेलीविजन, […] विस्तृत....

April 12th, 2017

 

साप्ताहिक घटनाक्रम

साप्ताहिक घटनाक्रम* 07 अप्रैल, 2017 को फिल्म समारोह निदेशालय द्वारा 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। निर्देशक सुमित्रा भावे और सुनील सुकथनकर द्वारा निर्देशित मराठी फिल्म ‘कसाव’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए स्वर्ण कमल प्रदान किए जाने की घोषणा की नई। अभिनेता अक्षय […] विस्तृत....

April 12th, 2017

 

सरोकारी सिनेमा के चंद्र प्रकाश

सरोकारी सिनेमा के चंद्र प्रकाशचंद्र प्रकाश द्विवेदी हिंदी सिनेमा के जाने- माने निर्देशक और पटकथा लेखक हैं। चंद्र प्रकाश द्विवेदी का जन्म सन् 1960 में राजस्थान के दोदुआ सिरोही गांव में हुआ। वर्ष 1991 में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘चाणक्य’ से उन्हें पहचान मिली। इस धारावाहिक में […] विस्तृत....

April 12th, 2017

 

नाट्यशास्त्र

नाट्यशास्त्रनाट्यशास्त्र नाट्य कला पर व्यापक ग्रंथ एवं टीका, जिसमें शास्त्रीय संस्कृत रंगमंच के सभी पहलुओं का वर्णन है। माना जाता है कि इसे तीसरी शताब्दी से पहले भरत मुनि ने लिखा था। इसके कई अध्यायों में नृत्य, संगीत, कविता एवं सामान्य सौंदर्यशास्त्र सहित नाटक की […] विस्तृत....

April 12th, 2017

 

सफलता का रंगमंच

सफलता का रंगमंचचंद साल पहले थियेटर फुल टाइम प्रोफेशन के तौर पर सोचना भी मुश्किल था, लेकिन अब थियेटर कई मौकों के साथ मेन स्ट्रीम करियर बन चुका है। अगर आपके व्यक्तित्व में रचनात्मक अभिव्यक्ति से दूसरों को आकर्षित करने का हुनर है, अभिनय में रुचि और […] विस्तृत....

April 12th, 2017

 

हिमाचली पुरुषार्थ : पिचों के पारखी सुनील चौहान

हिमाचली पुरुषार्थ : पिचों के पारखी सुनील चौहानउन्होंने जीवन के संघर्ष के दौरान एक खेल और रेडीमेड कपड़ों की दुकान भी चलाई, लेकिन उन्होंने व्यापार को आगे बढ़ाने की बजाय मैदान की तरफ भागने में अधिक दिलचस्पी दिखाई। अपनी दूसरी पारी शुरू करते हुए चौहान ने अपने गृह नगर में बिलासपुर क्रिकेट […] विस्तृत....

April 12th, 2017

 
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