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कम्पीटीशन रिव्यू


खेतीबाड़ी के कारण स्थायी निवास की परंपरा पड़ी

खेतीबाड़ी के आरंभ हो जाने पर वे लोग एक स्थान पर रहने लगे और उनका पारिवारिक जीवन स्थायी होने लगा। इसी प्रकार धीरे-धीरे सामूहिक निवास अथवा समाज की बुनियाद पड़ी। हिम देश में रहने के कारण उनको कठिन शीत से  बचने के लिए विशेष प्रकार के घर बनाने पड़े होंगे…

प्रागैतिहासिक हिमाचल

अपनी सभ्यता और संस्कृति के आरंभिक चरणों में इन लोगों का क्या जीवनयापन रहा होगा, निश्चित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता। इतना अवश्य कहा जा सकता है कि अन्य देशों की भांति शुरू-शुरू में वे लोग भी अन्न पैदा करने वाले नहीं अपितु भोजन सामग्री जुटाने वाले रहे होंगे। आरंभिक काल में वे लोग कंद मूल, फल आदि खाकर अपना पेट पालते होंगे अथवा जंगली जानवरों को मारकर उनका मांस खाते होंगे। धीरे-धीरे उन्होंने वन्य पशुओं को पकड़ कर अपने वश में कर लिया और उनका पालन-पोषण करके अपने कार्यों में उनका उपयोग किया। उनका दूध पीने लगे और बोझा ढोने के लिए उनका उपयोग करने लगे। जब पशुधन बढ़ गया तो चारे की खोज में अपने पशुओं के साथ दूर-दूर घाटियों और पर्वतों में जाने लगे और उनका जीवन चरवाहे सा बन गया। आज भी किन्नौर के कनावरे, भरमौर के गद्दी, लाहुल और स्पीति के लाहुले अपने पशुधन के साथ ग्रीष्म ऋतु में ऊंचे पहाड़ों पर, शरद ऋतु में नीची घाटियों में चले जाते हैं। इस प्रकार घूमते-फिरते उनका मिलन दूसरे लोगों से भी होने लगा। पशुओं की रक्षा के लिए उनमें आपस में भी मेलजोल बढ़ गया और वे समूहों में रहने लगे। इसी घुमंतू जीवन में उन्होंने कृषि करनी भी सीख ली। आरंभिक काल में खेतीबाड़ी का काम निचली घाटियों और नदी-नालों के किनारे रहा होगा। सबसे पहले उन्होंने गेहूं ही उपजाया होगा, क्योंकि वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं सबसे पहले हिंदुकुश और पंजाब के मध्य भाग-हिमालय में कहीं उपजाया गया था। खेतीबाड़ी के आरंभ हो जाने पर वे लोग एक स्थान पर रहने लगे और उनका पारिवारिक जीवन स्थायी होने लगा। इसी प्रकार धीरे-धीरे सामूहिक निवास अथवा समाज की बुनियाद पड़ी। हिम देश में रहने के कारण उनको कठिन शीत से बचने के लिए विशेष प्रकार के घर बनाने पड़े होंगे। भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उनके वस्त्र पहले-पहले जंगली जानवरों की बालदार खालों के रहे होंगे। बाद में उन्हीं की ऊन से उन्होंने कात कर बुनकर अपने वस्त्र बनाए। आज भी बहुत ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऊन के वस्त्र पहने जाते हैं, जो प्रायः हाथ से ही कातकर और बुनकर बनाए जाते हैं। पालतू जानवरों का उपयोग उन्होंने सामान ढोने और परिवहन के लिए आरंभ किया। पशुओं के सामान ढोने की सुविधा के कारण उन्होंने सिंधु क्षेत्र के लोगों के साथ अपने व्यापारिक संबंध स्थापित किए। सिंधु प्रदेश को निर्यात होने वाली वस्तुओं में मुख्य थी देवदार की लकड़ी, बारहसिंगे के सींग, जड़ी-बूटियां और शिलाजीत। इसके बदले में वहां से खाद्य सामग्री, सूती कपड़ा और धातु के औजार आयात करते होंगे।

March 15th, 2017

 
 

भस्मासुर रथ के फटे कपड़े को रखते हैं पूजा घर में

लोग रथ पर टूट पड़ते हैं और उसे तोड़ देते हैं। इसके बाद रथ के चारों ओर लपेटा सफेद कपड़ा लूट लेते हैं। कपड़े को लूटने, चीरने व फाड़ने का दृश्य देखते  ही बनता है। लूटे गए वस्त्र को लोग प्रसाद रूप में घर ले […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 

कैरियर रिसोर्स

स्वर्ण पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल नगरोटा बगवां स्वर्ण पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रशिक्षित और अनुभवी महिला और पुरुष अध्यापकों के लिए निम्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित हैं। टीजीटी- कला, विज्ञान(मेडिकल, नॉन मेडिकल), प्रवक्ता (गणित, वाणिज्य, अंग्रेजी, इतिहास, भौतिक विज्ञान, केमिस्ट्री, संस्कृत) सी एंड […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 

क्‍या आप जानते हैं

किन्नौर जिले के ‘ छितकुल’ गांव की स्थानीय देवी कौन सी है? (क) माथी                (ख) तैती (ग) सापनी               (घ) किन्नरी ‘ लिप्पा’ नामक स्थल किस नदी के किनारे स्थित है? (क) बास्पा नदीं           (ख) रिस्पा नदीं (ग) तैती नदी             (घ) भावा नदी सुप्रसिद्ध ‘ बृजराज […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 

पत्रकारिता में प्रभावी करियर

पत्रकारिता में प्रभावी करियरमीडिया, समाज तथा शासन का वास्तविक दर्पण है। यह जनसाधारण की समस्याओं, मांगों को उठाने तथा उन्हें न्याय दिलाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म भी बन गया है। पत्रकारिता में करियर एक प्रभावी विकल्प है   और कुछ मामलों में एक उच्च वेतन देने वाला व्यवसाय भी। […] विस्तृत....

March 8th, 2017

 

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गुगलाड़ा, जवाली

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गुगलाड़ा, जवालीउपमंडल जवाली के अंतर्गत जवाली-गुगलाड़ा मार्ग पर तकरीबन 8 किलोमीटर की दूरी पर तकरीबन 8 कनाल भूमि पर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, गुगलाड़ा प्रदेश के अग्रणी स्कूलों में एक अहम स्थान रखती है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गुगलाड़ा ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी […] विस्तृत....

March 8th, 2017

 

मोबाइल आधारित मीडिया का समय

मोबाइल आधारित मीडिया का समयसंजय द्विवेदी अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि, भोपाल पत्रकारिता में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने संजय द्विवेदी से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश… पत्रकारिता में युवाओं के लिए करियर के क्या स्कोप हैं […] विस्तृत....

March 8th, 2017

 

प्रहरी पत्रकार अरुण शौरी

प्रहरी पत्रकार अरुण शौरीअर्थशास्त्र में पीएचडी करने के बाद उन्होंने 1967 में विश्व बैंक में अपना करियर शुरू किया। विश्व बैंक में वह पहले 1968 से 1972 और फिर 1975 से 1977 तक अर्थशास्त्री रहे।  वह 1972 से 1974 तक भारतीय योजना आयोग के सलाहकार भी रहे हैं… […] विस्तृत....

March 8th, 2017

 

समसामयिकी

समसामयिकीआईएनएस विराट की विदाई दुनिया में सबसे ज्यादा समय तक सेवा देने वाला विमान वाहक पोत आईएनएस विराट आखिरकार रिटायर हो गया। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की मौजूदगी में मुंबई में आयोजित एक समारोह में आईएनएस विराट को भव्य विदाई दी गई। लगभग 57 सालों […] विस्तृत....

March 8th, 2017

 

साप्ताहिक घटनाक्रम

साप्ताहिक घटनाक्रम* भारत-पाक अटारी बॉर्डर पर 360 फुट ऊंचे फ्लैगमास्ट का उद्घाटन किया गया। इसे देश का सबसे ऊंचा फ्लैगमास्ट कहा जा रहा है। यह तिरंगा 120 लंबा और 80 फुट चौड़ा है। इसके निर्माण पर 3.50 करोड़ रुपए का खर्च आया है। इससे पहले झारखंड […] विस्तृत....

March 8th, 2017

 
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