Divya Himachal Logo Sep 25th, 2017

आस्था


शाटन देवी मंदिर में चढ़ती है लौकी

छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित शाटन देवी मंदिर से एक अनोखी परंपरा जुड़ी है। मंदिरों में आमतौर पर फूल, प्रसाद, नारियल आदि भगवान को चढ़ाने का विधान है, लेकिन शाटन देवी मंदिर में देवी को लौकी और तेंदू की लकडि़यां चढ़ाई जाती हैं। इस मंदिर को बच्चों का मंदिर भी कहते हैं। श्रद्धालु यहां अपने बच्चों की तंदुरुस्ती के लिए प्रार्थना करते हैं और माता को लौकी और तेंदू की लकड़ी अर्पण करते हैं…

भारत परंपराओं का देश माना जाता है। लोगों की आस्था के कारण यहां कई तरह की परंपराएं प्रचलित हैं। इन परंपराओं का अपना एक अलग इतिहास है। वर्षों से चली आ रही ये परंपराएं आज के आधुनिक भारत में भी निर्बाध चल रही हैं। वास्तव में इन परंपराओं का आधार यह विश्वास है कि इनके निर्वहन से लोगों को सुख-शांति व ऐश्वर्य मिलता है। इसी कारण वे आज के आधुनिक युग में भी विरासत में मिली इन परंपराओं को निभा रहे हैं। परंपराओं की इस शृंखला में हम आपको इस बार एक अनोखी परंपरा से अवगत करवाएंगे। छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित शाटन देवी मंदिर से एक अनोखी परंपरा जुड़ी है। मंदिरों में आमतौर पर फूल, प्रसाद, नारियल आदि भगवान को चढ़ाने का विधान है, लेकिन शाटन देवी मंदिर में देवी को लौकी और तेंदू की लकडि़यां चढ़ाई जाती हैं। इस मंदिर को बच्चों का मंदिर भी कहते हैं। श्रद्धालु यहां अपने बच्चों की तंदुरुस्ती के लिए प्रार्थना करते हैं और माता को लौकी और तेंदू की लकड़ी अर्पण करते हैं। इस मंदिर में यह परंपरा कैसे शुरू हुई, यह कोई नहीं जानता, लेकिन ऐसी मान्यता है कि जो भी यहां लौकी और तेंदू की लकड़ी चढ़ाता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। वैसे आम तौर पर लोग लौकी खाने से बचते हैं। कुछ को इसका स्वाद पसंद नहीं आता है तो कुछ को यह पता ही नहीं होता है कि यह कितनी फायदे वाली चीज है। अगर आपको भी यह लगता है कि लौकी खाने से कोई फायदा नहीं है तो आपको बता दें कि ऐसा नहीं है। लौकी एक बेहद फायदेमंद सब्जी है, जिसके इस्तेमाल से आप कई तरह की बीमारियों से राहत पा सकते हैं। किसी भी दूसरी चीज की तुलना में लौकी ज्यादा तेजी से वजन कम करती है। आप चाहें तो लौकी का जूस नियमित रूप से पी सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो इसे उबालकर, नमक डालकर भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। लौकी में नेचुरल वाटर होता है। ऐसे में इसके नियमित इस्तेमाल से प्राकृतिक रूप से चेहरे की रंगत निखरती है। आप चाहें तो इसके जूस का सेवन कर सकते हैं या फिर उसकी कुछ मात्रा हथेली में लेकर चेहरे पर मसाज कर सकते हैं। इसके अलावा लौकी की एक स्लाइस को काटकर चेहरे पर मसाज करने से भी चेहरे पर निखार आता है। मधुमेह के रोगियों के लिए लौकी किसी वरदान से कम नहीं है। प्रतिदिन सुबह उठकर खाली पेट लौकी का जूस पीना मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अगर आपको पाचन क्रिया से जुड़ी कोई समस्या है तो लौकी का जूस आपके लिए बेहतरीन उपाय है। लौकी का जूस काफी हल्का होता है और इसमें कई ऐसे तत्व होते हैं जो कब्ज और गैस की समस्या में राहत देते हैं।

September 9th, 2017

 
 

शिव के धाम कैलाश पर्वत के अनजाने रहस्य

इस पवित्र पर्वत की ऊंचाई 6714 मीटर है। यह पास की हिमालय सीमा की चोटियों जैसे माउंट एवरेस्ट के साथ रेस तो नहीं लगा सकता, पर इसकी भव्यता ऊंचाई में नहीं, लेकिन उसके आकार में है। उसकी छोटी सी आकृति विराट शिवलिंग की तरह है […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

तंत्र में है कुंडलिनी की उपयोगिता

कुंडलिनी के जागरण से साधक समस्त तंत्र क्रियाओं का विजेता बन जाता है। कोई भी तंत्र साधना उसके लिए दुष्कर नहीं रह जाती है, बल्कि तंत्र की सिद्धियां उसकी ओर स्वतः खिंची चली आती हैं। प्रत्येक तंत्र साधक को कुंडलिनी का ज्ञान होना अनिवार्य है। […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

अजूबे से कम नहीं हैं हम्पी के स्मारक

तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नाम से जाना जाता है और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहां एक समृद्धशाली सभ्यता निवास करती […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

व्रत एवं त्योहार

10 सितंबर रविवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, चतुर्थी, पंचमी 11 सितंबर सोमवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, षष्ठी 12 सितंबर मंगलवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, सप्तमी 13 सितंबर बुधवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, अष्टमी 14 सितंबर बृहस्पतिवार, भाद्रपद,  कृष्णपक्ष, नवमी 15 सितंबर शुक्रवार, भाद्रपद, कृष्णपक्ष, दशमी 16 सितंबर शनिवार, आश्विन, कृष्णपक्ष, एकादशी, इंदिरा एकादशी […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

क्या होती है नवधा भक्ति

क्या होती है नवधा भक्तिशास्त्रों में भक्ति की महिमा को तो विविध प्रकारों से रेखांकित किया ही गया है, विविध विशेषताओं के आधार पर उसका वर्गीकरण भी किया गया है।  प्राचीन शास्त्रों में भक्ति के 9 प्रकार बताए गए हैं जिसे नवधा भक्ति कहते हैं- श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

कला में जरूरी है विविधता

गुरुओं, अवतारों, पैगंबरों, ऐतिहासिक पात्रों तथा कांगड़ा ब्राइड जैसे कलात्मक चित्रों के रचयिता सोभा सिंह भले ही पंजाब से थे, लेकिन उनका अधिकतर जीवन अंद्रेटा (हिमाचल) की प्राकृतिक छांव में सृजनशीलता में बीता। इन्हीं की जीवनी और उनके विविध विषयों पर विचारों को लेकर आए […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

महिमा पुराणों की

पांचवां पुराण है भागवत पुराण। इसमें 18000 श्लोक तथा 12 स्कंद हैं। इस ग्रंथ में आध्यात्मिक विषयों पर विभिन्न ऋषियों के बीच की वार्तालाप शामिल है। इस पुराण में भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की महानता का बखान किया गया है। विष्णु और कृष्णावतार की कथाओं […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

विष्णु पुराण

तावदार्त्तिस्तथा वांछा तावमोस्तथासुखम्। यावन्न याति शरणै त्वामशेषाधन शनम्।। त्वंप्रसाद प्रसन्नात्मन् प्रपन्नानां कुरुष्व न। तेजसां नाथ सर्वेषां स्वशक्त्याप्यायन कुरु।। एवं सस्तूयमानस्तु प्रणतैरमेरेहरिः। प्रसन्नदृष्टि र्भगवानिदमाह स विश्वकृत्।। तेजसो भवतां देवाः करिष्याभ्युवर्बृहणन्। वदाम्यहं यत्क्रियतां भवद्भिस्तदिद सुराः। आनीय संहिता देत्यै क्षीराब्धौ सकलौषधीः।। प्रक्षिप्यात्रामृतार्थ ता सकला दैत्यदानवैः। मंथान मंदर कृत्वा […] विस्तृत....

September 9th, 2017

 

खंडित होते महिमामंडित डेरे

खंडित होते महिमामंडित डेरेपंजाब और हरियाणा में फैले डेरों पर संत रविदास के प्रभाव को स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है। संत रविदास ने मध्यकाल में छुआछूत जैसी सामाजिक बीमारियों पर प्रहार किया था। इसी कारण जब उनके विचारों का आश्रय लेकर डेरे स्थापित होने लगे, […] विस्तृत....

September 2nd, 2017

 
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