धर्म भाव की जागृति

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे... ऐसी अवस्था में उस चोर की क्या दशा होगी? उसे न तो नींद आएगी, न उसे खाने या अन्य कोई काम करने में रुचि रह जाएगी। उसका सारा मन इस बात में ही लगा रहेगा कि सोना किस तरह हाथ लगे। क्या तुम ऐसा समझते हो कि यह…

सबल होने की कला

ओशो बुद्ध ने कहा, ऐसा कुछ भी नहीं है। चीजें हो रही हैं। बुद्ध ने जो प्रतीक लिया है जीवन को समझाने के लिए, वह है दीये की ज्योति। सांझ को तुम दीया जलाते हो। रातभर दीया जलता है, अंधेरे से लड़ता है। सुबह तुम दीया बुझाते हो। क्या तुम वही ज्योति…

नींबू पानी के फायदे

नींबू को अमृत समान भी कहा गया है। नींबू शरीर को तरोताजा तो रखता ही है साथ ही कई रोगों से भी दूर रखता है। अगर आप प्रतिदिन एक गिलास नींबू पानी का सेवन करते हैं तो छोटी-मोटी बीमारियों से हमेशा दूर रहेंगे। नींबू के कई गुणकारी लाभ होते हैं।…

अध्यात्मवाद का समावेश

अवधेशानंद गिरि वर्तमान की समस्त समस्याओं का एक ही सहज सरल निदान है अध्यात्मवाद। यदि शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक सभी क्षेत्रों में अध्यात्मवाद का समावेश कर लिया जाए, तो समस्त समस्याओं का समाधान साथ-साथ होता चले तथा आत्मिक प्रगति के…

खुल्लम-खुल्ला

जेन कहानियां जेन साधिका इशुन एक आश्रम में ध्यान का अभ्यास कर रही थी। इसी आश्रम में लगभग बीस पुरुष साधक भी ध्यान सीखा करते थे। सिर मुंडा होने और अत्यंत साधारण कपड़े पहने रहने के बावजूद इशुन बड़ी खूबसूरत नजर आती थी। अनेक आश्रमवासी पुरुष साधक…

पुरखों के संवाद

कल, आज और कल-ये तीन छोटे-छोटे शब्द कुछ लाख बरस का, लाख नहीं तो कुछ हजार बरसों का इतिहास, वर्तमान और भविष्य अपने में बड़ी सरलता से, तरलता से समेटे हुए हैं। बहुत ही सरलता से जुड़े हैं ये कल, आज और कल। हमें इसके लिए कुछ करना नहीं पड़ता। बस…

लोहार्गल सूर्य मंदिर

राजस्थान के झंझुनू जिले से 70 किमी. दूर आड़ावल पर्वत के उदयपुरवाटी के कस्बे में लोहार्गल मंदिर स्थित है, जिसका संबंध पांडवों से जुड़ा हुआ है। इस तीर्थ स्थल को पुष्कर तीर्थ के सभी तीर्थों में से मुख्य तीर्थ स्थल माना जाता है। मान्यता है कि…

जानकी घाम सीतामढ़ी

विष्णु पुराण के वर्णानुसार सम्राट जनक की हल कर्षण, यज्ञ भूमि तथा उर्बिजा सीता के अवतीर्ण होने का स्थान है। लछमना (वर्तमान में लखनदेई) नदी के तट पर उस यज्ञ का अनुष्ठान एवं संपादन बताया जाता है। हल कर्षण, यज्ञ के परिणामस्वरूप भूमिसुता सीता…

पूर्णिमा या अमावस्या

साधना में कौन सा दिन मदद करता है? पूर्णिमा के दिन ऊर्जा थोड़ी अधिक होती है। सिर्फ पागलपन ही नहीं बढ़ता। अगर आप शांत हैं, तो आप और अधिक शांत हो जाएंगे। अगर आप आनंदित हैं तो आप अधिक आनंदित हो जाएंगे। यानी आपका जो भी गुण है, वह और बढ़ जाएगा।…

हंसता हुआ धर्म

ओशो कृष्ण का व्यक्तित्व बहुत अनूठा है। अनूठेपन की पहली बात तो यह है कि कुष्ण हुए तो अतीत में, लेकिन हैं भविष्य के। अभी भी कृष्ण मनुष्य की समझ से बाहर हैं। भविष्य में ही यह संभव हो पाएगा कि कृष्ण को हम समझ पाएं। इसके कुछ कारण हैं। सबसे बड़ा…

किसी अजूबे से कम नहीं हैं रामायण के पात्र

जटायु रामायण का एक प्रसिद्ध पात्र है। जब रावण सीता का हरण करके लंका ले जा रहा था तो जटायु ने सीता को रावण से छुड़ाने का प्रयत्न किया था। इससे क्रोधित होकर रावण ने उसके पंख काट दिए थे जिससे वह भूमि पर जा गिरा... -गतांक से आगे... कौशल्या…

प्रयास और प्रसाद

बाबा हरदेव संसार में इनसान को जो कुछ पाना होता है, वो परमात्मा को पीछे करके पाया जाता है यानी परमात्मा की तरफ पूरी पीठ करनी पड़ती है, इसके लिए संघर्ष चाहिए। इस सूरत में कर्ता होने के सभी कष्ट सहन करने पड़ते हैं, लेकिन परमात्मा को पाने के…

गीता रहस्य

स्वामी रामस्वरूप इस प्रकार योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को यह समझाने में सफल हुए कि जो गति ऋषि-मुनियों को वर्षों योगाभ्यास अपितु कई जन्मों तक योगाभ्यास करने के पश्चात प्राप्त होती है, वह अर्जुन जैसे योद्धाओं को युद्ध में वीरगति प्राप्त करने…

अवांछनीय प्रतिक्रिया

श्रीराम शर्मा कई बार मनुष्य अपने अनुचित कार्यों और आदतों के संबंध में दुखी भी होता है और सोचता है कि उन्हें छोड़ दूं। अवांछनीय अभ्यासों की प्रतिक्रिया उसने देखी-सुनी भी होती है। परामर्श उपदेश भी उसी प्रकार के मिलते रहते हैं, जिनमें…

बिंदु और त्रिकोण में तात्त्विक अंतर नहीं

जीव त्रिकोण है तथा जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति तीन अवस्थाएं हैं और वे तीन कोणों में अवस्थित हैं। बिंदु भाव में समस्त प्रपंचवासना वृक्ष की भांति सूक्ष्म रूप से बीज में लीन रहती है। जब वह बीज अपने अंतर्लीन जगत को व्यक्त करने की इच्छा से…