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प्रतिबिम्ब


जिंदगी

जिंदगी से हर बात शुरू होती है

जिंदगी पर ही हर बात खत्म हो जाती है।

क्यों न करें हम बात जिंदगी की

जिंदगी ही जिंदगी की हमराज हो जाती है।

मिलता है तोहफा नसीब से जिंदगी का

हर इन्सां के लिए जिंदगी सौगात हो जाती है।

रूई की तरह मुलायम है जिंदगी तो

कहीं चट्टान की तरह कठोर हो जाती है।

सिसकती है कहीं कोनों में चुपचाप तन्हा

कहीं फुटपाथों पर भूखी सो जाती है।

इस जंदगी का कहना ही क्या कभी

कांटों से भरी, कभी फूलों की लड़ी हो जाती है।

हर पल को जी लो जिंदगी के साथ वरना

पता भी नहीं चलता, वक्त की लहरों में कब यह खो जाती है।

आए हो जहां में तो, जिंदगी का जश्न मनाओ

जिंदादिली का नाम जिंदगी अपने नाम हो जाती है।

— वंदना राणा, सैट 3, टाइप 3, कैंडल लॉज, लौंगवुड, हिप्र

February 6th, 2017

 
 

लोक गाथाओं में सतलुज का राग

लोक गाथा में भगवान वामन दो पग में पूरी पृथ्वी लांघ जाते हैं। परिणामतः आधा पद बलि अपने सिर पर धारण करता है। पृथ्वी के राज्य को खोने के बाद बलि भगवान से प्रार्थना करता है कि उसे धरती पर बारह संक्रांतियों और बारह अमावस […] विस्तृत....

February 6th, 2017

 

मन्मथनाथ गुप्त

मन्मथनाथ गुप्त भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी तथा सिद्धहस्त लेखक थे। इन्होंने हिंदी, अंग्रेजी तथा बांग्ला में आत्मकथात्मक, ऐतिहासिक एवं गल्प साहित्य की रचना की है। यह मात्र 13 वर्ष की आयु में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए और जेल गए। बाद […] विस्तृत....

February 6th, 2017

 

विनोद-परिहास के आदिम प्रसंग

‘कुमारसंभव’ में कालिदास ने अपने आराध्य शिव को ही हास्य का आलंबन बनाया है। ब्रह्मचारी बटु शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या करने वाली पार्वती का मजाक उड़ाते हुए कहता है-हे पार्वती! जरा सोचो तो कि गजराज पर बैठने योग्य तुम जब […] विस्तृत....

January 30th, 2017

 

रघुवीर सहाय

रघुवीर सहाय  की गणना हिंदी साहित्य के उन कवियों में की जाती है, जिनकी भाषा और शिल्प में पत्रकारिता का प्रभाव होता था और उनकी रचनाओं में आम आदमी की व्यथा झलकती थी। रघुवीर सहाय एक प्रभावशाली कवि होने के साथ – साथ कथाकार, निबंध […] विस्तृत....

January 30th, 2017

 

हिमाचली लोक जीवन में कुलज माता

विवाह उत्सव में एक नहीं बार-बार इनकी पूजा करनी पड़ती है। कुलज की स्थापना कृषक-श्रमिक परिवारों में विभिन्न रूपों में होती है। कहीं पिंडियों के रूप में तो कहीं देहरी अथवा मढ़ी के रूप में तो कहीं दाड़ू की टहनी के रूप में इनकी उपस्थिति […] विस्तृत....

January 30th, 2017

 

कविताएं

‘तुम्हारे यूं चले जाने से’ तुम्हारे यूं ही चले जाने से न जाने कितनी बातें होंगी न जाने कितने सपने टूटे होंगे उन गरीब, असहाय लोगों के जिनके लिए तुम एक बैंक अधिकारी ही नहीं थे, बल्कि एक मसीहा थे। तुम्हारे यूं ही चले जाने […] विस्तृत....

January 30th, 2017

 

लोकगाथाओं में सतलुज के राग

किन्नौर में एक रोचक लोककथा है कि शोणितपुर (सराहन) के राजा बाणासुर ने मानसरोवर से सतलुज को सराहन तक अपना अनुगमन करने का आदेश दिया। सराहन पहुंचकर बाणासुर ने नदी को आगे का मार्ग स्वयं ढूंढ निकालने का आदेश दिया और स्वयं वहीं राज्य स्थापित […] विस्तृत....

January 30th, 2017

 

भूटान : सादगी का वैभव

प्रकृति की गोद में बसा भूटान एक ऐसा देश है, जो खुशहाली पर जोर देता है। जहां पूरी दुनिया का जोर जीडीपी यानी ‘सकल घरेलू उत्पाद’ पर होता है, वहीं भूटान अपने नागरिकों का जीवन स्तर जीएनएच यानी ‘सकल राष्ट्रीय खुशी’ से नापता है। यह […] विस्तृत....

January 23rd, 2017

 

पंडित भीमसेन जोशी

पंडित भीमसेन जोशी किराना घराने के महत्त्वपूर्ण शास्त्रीय गायक थे। उन्होंने 19 साल की उम्र से गायन शुरू किया था और वह सात दशकों तक शास्त्रीय गायन करते रहे। देश-विदेश में लोकप्रिय हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायकों में उनकी गिनती होती थी। अपने एकल […] विस्तृत....

January 23rd, 2017

 
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