प्रगतिवादी नागार्जुन

नागार्जुन (जन्म 30 जून, 1911; मृत्यु 5 नवंबर, 1998) प्रगतिवादी विचारधारा के लेखक और कवि थे। नागार्जुन ने 1945 ईस्वी के आसपास साहित्य सेवा के क्षेत्र में कदम रखा। शून्यवाद के रूप में नागार्जुन का नाम विशेष उल्लेखनीय है। नागार्जुन का असली नाम…

कार्य और कविता में सामंजस्य प्रबंधन

परिचय * नाम : संगीता सारस्वत/संगीता श्री * प्रकाशित कृतियां : ढलानों पर खुशबू (काव्य संग्रह - 1983), सैलाब (गज़ल संग्रह), सवाल (गज़ल संग्रह), समय व संवाद गद्य लेखन। सुख में सुमिरन (गद्य) * सहभागिता : साहित्यकार कलाकार विवरणिका (1987), मानव…

साहिर लुधियानवी

साहिर लुधियानवी (जन्म 8 मार्च, 1921 लुधियाना - मृत्यु 25 अक्तूबर, 1980 मुंबई) भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार और कवि थे। साहिर ने जब लिखना शुरू किया तब इकबाल, फैज, फिराक आदि शायर अपनी बुलंदी पर थे, पर उन्होंने अपना जो विशेष लहजा और रुख…

एक विशेष मानसिक गढ़न की जरूरत

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…

लेखकीय व्यक्तित्व में आंतरिक द्वंद्व तो होगा ही

परिचय * नाम : तारा नेगी * जन्म : गांव पुजाली, बंजार, कुल्लू * रचनाएं : विभिन्न राज्य व राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित * प्रकाशन : दो कहानी संग्रह ‘दायरे’ एवं ‘अपने-अपने धरातल’ हिंदी में एवं ‘थोड़ा जिहा सुख’ कुल्वी,…

सांझा करते हैं खुद को किताबों के पन्नों से

परिचय * नाम : प्रियंवदा * जन्म : 4 अक्तूबर, 1977, जिला हमीरपुर के ढांगू ग्राम में, विभिन्न पत्रिकाओं में कविता, कहानी व आलेख प्रकाशित हुए हैं, 2007 में दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लिया * समीक्षा : कहानी संग्रहों तथा कहानियों…

अभिव्यक्ति के लिए कीमत चुकानी पड़ती है

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…

बात हक की गजल के पर्दे में

भावाभिव्यक्ति मानव मात्र की चाहत भी है और ज़रूरत भी। कवि-लेखक एक सजग सचेत निरीक्षक होता है जो जीवन के तमाम खट्टे-मीठे कटु अनुभवों को, जो उसे निरंतर उद्वेलित करते रहते हैं, उन दृश्यों को जो उसके हृदय को आलोडि़त कर जाते हैं, को आत्मसात् करता…

खुद को खुद की नजर से देखा जाए

घर, परिवार समाज और परिवेश प्रोत्साहित ही करता है, आंतरिक आत्मविश्वास और संबल माता-पिता से प्राप्त होता है। रिश्तों और दोस्ती में नकारात्मक लोगों को हटाना प्रत्येक स्त्री को आना चाहिए। अवांछनीय खरपतवार को हटाकर जीवन की क्यारी को सुंदर बनाना,…

दबाव के रहते भी लेखक-मन पीछे नहीं हटता

रचना प्रक्रिया में घर-परिवार, समाज व परिवेश हमेशा ही आगे रहता है। महिला लेखिका को आज भी इन समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। चाहकर भी नारी अपनी लेखन प्रतिभा को गति नहीं दे पाती, जिसकी वह इच्छा करती है। भारतीय समाज आज भी पूरी तरह महिला पर…

निर्णय ले सकने की सहूलियत व छूट

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…

खुद के मानवीय सरोकारों को पहचानना होगा

रचना-प्रक्रिया में घर-परिवार कहां फिट होता है? मेरे हिसाब से यह रुचि और समय का सवाल है। लिखने में मन रमा हो तो खाना-वाना किसे याद रहता है। जो भी करती हूं, इच्छा से करती हूं, मजबूरी से नहीं। जबरदस्ती दोनों के बीच तालमेल नहीं बिठाती हूं। कभी…

चक्रव्यूह भेद कर रास्ते तलाशने होंगे

निजी अनुभव के आधार पर कहना चाहूंगी कि घर, परिवार एवं समाज वर्तमान बदलती परिस्थितियों एवं प्रगतिशील जागरूक सोच के चलते महिलाओं के लेखन के संग-संग चलते प्रोत्साहित करता है। विषय में गहरी घुसपैठ, समय से लड़ने का हौसला, शिल्प रचाव का धैर्य,…

लिखना महिला का संवैधानिक अधिकार है

आसान नहीं है एक महिला का लेखिका बनना। जिंदगी के अंधसागर में गोते खाती, कुछ लिखने के लिए एक सूखी जमीन का टुकड़ा तलाशती है, अपने सुख और आराम के क्षणों को चुराती है, तब कहीं महिला ‘एक लेखिका’ बनती है। एक महिला के पास लिखने के लिए बहुत कुछ है,…

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (जन्म-21 फरवरी, 1896, मेदनीपुर, बंगाल; मृत्यु-15 अक्तूबर, 1961, प्रयाग) हिंदी के छायावादी कवियों में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। निराला जी एक कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उन्होंने कई…