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प्रतिबिम्ब


मजबूरी

कालेज पूरा हो गया था। राखी की शादी कुछ दिनों बाद थी। सभी दोस्तों को निमंत्रण पत्र मिल गए, सभी जाने की तैयारी के लिए खरीददारी करने लगे, लेकिन उसकी सहेली गुडि़या थोड़ी चुप सी थी। साथ तो होती पर, सबमें अकेली। घूमकर शाम को घर पहुंची। ‘आ गई तुम, गुडि़या’ मां ने पूछा, लेकिन चुप थी। जवाब नहीं दिया। फिर अचानक बोली, मां राखी की शादी है। अगले हफ्ते हम सब दोस्तों को बुलाया है, पर मैं तो न जा पाऊंगी। मां एकाएक बोली, अरे पगली मैंने रोका है, क्या? चली जाना तेरी इतनी अच्छी सहेली रही वो। पर मां वह तो इतने ऊंचे खानदान से है और कहां हम! ऊपर से वह राजपूत घराने की और हम उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।

सिसकती हुई गुडि़या बोली, मां हम दलित हैं, उसने तो सहेली समझकर बुलाया, पर हो सकता है मेरे जाने से उसकी दादी और माता-पिता नाराज हों, मेरे पास उसको शुभकामनाओं के अलावा कुछ देने के लिए नहीं है। मां सब सुनकर दरवाजे के पास खामोश खड़ी थी। अचानक थोड़ा रुककर बोली, मैं तो तुम्हारी इतनी पुरानी दोस्तों में ये जाति का जाल भूल गई थी, पर तू उदास न हो। शादी में न जा पाना तेरी मजबूरी है, कभी न कभी वह ससुराल से जरूर यहां तुझ से मिलने आएगी। मैं तेरी मां हूं। तेरा दर्द समझ सकती हूं, पर बेटी कुछ मजबूरियां हमें इतना बेबस कर देती हैं कि हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते।

गुडि़या यह सुनकर अंदर चली गई। मेरा यही कसूर है न कि मैंने तेरी कोख से तेरे घर में जन्म लिया है और मैं गरीब दलित खानदान में पैदा हुई हूं। मां ये मजबूरी नहीं, अभिशाप है। आज मेरे लिए कल किसी और के लिए। गुडि़या सिसकती कहती रही, क्यों है यह, कैसी है यह मजबूरी?

नितिका शर्मा

January 9th, 2017

 
 

लोक देवता ख्वाजा पीर

यही तो इन लोक-देवताओं की वास्तविकता का प्रमाण है। फिर इनसे क्षमा-याचना करके और दूध, दही, रोट, चूरमां, खीर तथा बलेई आदि देवता से संबंधित पकवान भेंट किया जाता है। तब दूध में खून आना अपने आप ही बंद हो जाता है। यदि इन लोक […] विस्तृत....

January 9th, 2017

 

सृजन की जमीन पर उम्मीदों का नववर्ष

हिमाचल में सृजन की उर्वरा जमीन पर उम्मीदों की नई कोंपलें फूटंेगी ऐसी संभावना है। साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ अपने समय का प्रामाणिक दस्तावेज भी होता है। जो अपने समय, समाज, संस्कृति और इतिहास को भी रेखांकित करता है। हिमाचली रचनाकारों में […] विस्तृत....

January 9th, 2017

 

हिमाचली भाषा की संभावनाएं

हिमाचल प्रदेश भाषा विभाग की पहाड़ी दिवस पर आयोजित संगोष्ठियों में भी इस विषय पर बहस हुई। ‘दिव्य हिमाचल’ के प्रतिबिंब स्तंभ में इस विषय पर लेखकों के विचार पाठकों को पढ़ने-सोचने को मिले, जो इस भाषा के प्रति सामयिक चिंतन को रेखांकित करते हैं। […] विस्तृत....

January 9th, 2017

 

आशापूर्णा देवी

आशापूर्णा देवी बांग्ला भाषा की प्रख्यात उपन्यासकार हैं, जिन्होंने मात्र 13 वर्ष की आयु में लिखना प्रारंभ कर दिया था और तब से ही उनकी लेखनी निरंतर सक्रिय बनी रही। अपनी प्रतिभा के कारण उन्हें समकालीन बांग्ला उपन्यासकारों की प्रथम पंक्ति में गौरवपूर्ण स्थान मिला। […] विस्तृत....

January 9th, 2017

 

सावित्री बाई फुले

सावित्री बाई  भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसीपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिबा सावित्री बाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। महात्मा ज्योतिबा को महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। सावित्री […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

एक आम महिला की व्यथा

लाहौलां की कथा लोक कथाओं, लोकगीत, लोक संगीत, विश्वासों और आस्थाओं की यह सबसे बड़ी पूंजी भी है और ताकत भी कि इनकी जड़ें लोकमानस में गहरे से जुड़ी होती हैं। यह सामान्य लोक ही इनका संरक्षक भी है। ‘लाहौलां की कथा’ छपने पर शायद […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

हिमाचल में रचनात्मकता की महक

साहित्यिक लेखा-जोखा 2016 आज पहाड़ों का सीना छलनी हो रहा है तो इस थीम पर आधारित कविताएं वाहवाही लूट रही हैं । 70-80 के दशक में हिमाचल के दूरदराज के क्षेत्रों के जीवन पर लिखी कहानियां देश भर में धूम मचाए हुए थीं । अब […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

कविताएं

बेटियां बेटियों के हिस्से में क्यों… आती हैं मजबूरियां… चलते चलते राह में क्यों आती है दुश्वारियां पग-पग पर जिम्मेदारियों, के बोझ तले दबे बचपन, यौवन और बुढ़ापा जीवन सारा दो नावों में सवार हिचकोले खाती बेटियां निभा जाती हैं रिश्तों को जैसे कांटों में […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

क्रिसमस पर सजी कवियों की महफिल

जिला भाषा, कला एवं संस्कृति अधिकारी कांगड़ा के कार्यालय में क्रिसमस के अवसर पर कवियों की एक विशिष्ट महफिल सजी। इसमें जिला भर के विभिन्न स्थानों से आए हुए लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक कवि-कवयित्रियों ने बढ़-चढ़कर कर भाग लिया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रतिष्ठित […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 
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