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प्रतिबिम्ब


आज के अश’आर

रोशनी डूब गई चांद ने मुंह ढांप लिया

अब कोई राह दिखाई नहीं देती मुझको 

मेरे एहसास में कुहराम मचा है लेकिन 

कोई आवाज सुनाई नहीं देती मुझको। 

रात के हाथ ने किरनों का गला घोंट दिया 

जैसे हो जाए जमींबोस शिवाला कोई 

ये घटाटोप अंधेरा,ये घना सन्नाटा

अब कोई गीत है बाकी न उजाला कोई 

फिर वही बढ़ते हुए,रुकते हुए कदमों की चाप

फिर वही सहमी हुई सिमटी हुई सरगोशियां 

फिर वही बहकी हुई,महकी हुई सी आहटें

फिर वही गाती-सी लहराती-सी कुछ मदहोशियां 

़कतील शि़फाई

इक नए स़फर का हम फिर से इब्तिदा करते हैं चलो 

जिंदगी जीने का फिर से हौसला करते हैं चलो 

खुलेंगे अभी परवाज़ों में अपने परों से और हम 

दायरा अदना सा आसमान का करते हैं चलो 

खुमारी जर्रों की रहे हवाओं के यकसां उड़ना 

हम भी इनकी तरह सितारे छुआ करते हैं चलो 

बच्चों के हाथों में हैं चांद सूरज से घूमते छल्ले 

इन नन्हें-नन्हें ख्वाबों में जिया करते हैं चलो 

मुमकिन नहीं हर रास्ते के मुकां से मुसाफिर हो खुश 

चलो हम फिर से  नया स़फर इब्तिदा करते हैं चलो जीते जी हर मसले का हल ढूंढ सकते हैं हम 

इस जिंदगी को फरिश्तों की दुआ करते हैं चलो 

 वक्त के साथ हालात का मुकाबला कर अंशुमाली 

इस जिंदगी को इक नया फलसफा करते हैं चलो 

अतुल अंशुमाली,नादौन

April 4th, 2011

 
 

मन और मैं

भाग चला फिर भाग चला मन हर ले चला मुझे भेस बदल ले चला खुद बन बैठा मालिक मैं बंधा टॉमी (कुत्ता) खींच ले चला मुझे घुमाने खुद श्याम हुआ मैं नाचा बन गोपी नित नए रास रचाता बंसी की तान पै नचाता खिलौनों से […] विस्तृत....

April 4th, 2011

 

मसरूर… कुछ और भी

बहरहाल मेरी पुस्तक प्रकाशित होने के बाद एक बात तो हुई है कि हिमाचल में मसरूर मंदिर के बारे में लोगों की जिज्ञासा सहज रूप से जागृत हो गई है। मेरी किताब ‘कोरोनेशन ऑफ शिवा रीडिस्कवरिंग मसरूर टेंपल’ के इस परिचय से दिल्ली, इंडिया इंटरनेशनल […] विस्तृत....

March 28th, 2011

 

‘मसरूर मंदिर को शिव मंदिर कहना ठीक नहीं’

होटल धौलाधार में पर्यटन निगम द्वारा आयोजित सेमिनार में विख्यात लेखक प्रो. एनके सिंह द्वारा ‘मसरूर रॉक कट टेंपल’ को शिव मंदिर कहना बिलकुल गलत है व तथ्यों से परे है। एक ऐसा व्यक्ति जो इतिहास व धरोहरों की जानकारी न रखता हो, वह भी […] विस्तृत....

March 28th, 2011

 

दो कदम पीछे

सुखद सत्य है कि देश भर में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल में सृजन कार्य प्रगति पर है। युवा सृजन, विशेषकर पद्य और उसमें भी छंदमुक्त काव्य में हिमाचल ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, सृजन पद्य से गद्य की ओर […] विस्तृत....

March 28th, 2011

 

सृजनात्मक चमत्कार

रचनात्मक आधार लेखक की अनुभूति जन्य विचार प्रक्रिया की पराकाष्ठा पर सृजन का आवेग सुनिश्चित करते हैं। रचनाशीलता मानवीय विकास की आधारशिला बनकर स्वर्गिक पुष्पों के मधु रस के अमृतपान के समान प्रेम के रसोद्वेक से भावशून्य मानव की प्राण प्रतिष्ठा करने का कार्य करती […] विस्तृत....

March 28th, 2011

 

शुद्ध उच्चारण ही हिंदी का सम्मान

जिस माध्यम से हम अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं उसे बोली या भाषा कहते हैं। बोली का दायरा कुछ क्षेत्र तक ही सीमित होता है, जबकि भाषा बोली का ही परिमार्जित परिष्कृत और विस्तृत रूप है। बोली अनपढ़ तथा भाषा सुघड़ है। विचारों का […] विस्तृत....

March 28th, 2011

 

मुश्किलें

कितना स्पष्ट होता आगे बढ़ते जाने का मतलब अगर दसों दिशाएं हमारे सामने होतीं हमारे चारों ओर नहीं कितना आसान होता चलते जाना यदि केवल हम चलते होते और बाकी सब रुका होता मैंने अक्सर इस ऊलजलूल दुनिया को दसों सिरों से सोचने और बीस […] विस्तृत....

March 14th, 2011

 

मिनी पुस्तकालय खुलें

हर पंचायत में मिनी पुस्तकालय स्थापित हो और उसके लिए मनरेगा की तर्ज पर धनराशि आबंटित की जाए। ऐसा भी हो सकता है प्रत्येक विधायक को मिलने वाली विकास राशि में से पांच प्रतिशत धन मिनी पुस्तकालयों को पुस्तक खरीद के लिए दिया जाए… वैसे […] विस्तृत....

March 14th, 2011

 

साथ

जब मैं उसके साथ नहीं होती तो वह मुझे हर शै में तलाश करता है पहरों सोचता है मेरे बारे में   और मिलने की आस करता हैपर जब मैं मिलती हूँ उस सेतो वह तब भी कुछखोया सा उदास सान जाने क्यों रहता है !!   —रंजू विस्तृत....

March 14th, 2011

 
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