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प्रतिबिम्ब


तेरी महक

  आज सूरज ने कुछ घबरा कर

रोशनी की एक खिड़की खोली

बादल की एक खिड़की बंद की

और अंधेरे की सीढि़यां उतर गया

आसमान के माथे पर जाने क्यूं

पसीना सा आ गया…

सितारों के बटन खोल कर

उसने चांद का कुरता उतार दिया…

बरस कोयलों की तरह बिखरे हुए

कुछ बुझ गए,कुछ बुझने से रह गए

वक्त का हाथ जब उन्हें समेटने लगा

उसके पोरों पर छाले पड़ गए

तेरे इश्क के हाथ से छूट गई

और जिंदगी की हंडिया टूट गई

इतिहास का मेहमान

आज चौके से भूखा उठ गया

हर एक हऱफ के बदन से

तेरी महक आती रही

मोहब्बत के पहले गीत की

पहली सतर गाती रही

हसरत के धागे जोड़ कर

हम ओढ़नी बुनते रहे

विरह की हिचकी में भी हम

शहनाई को सुनते रहे॥

March 7th, 2011

 
 

क्या कहते हैं ब्लॉग

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March 7th, 2011

 

जनजातीय लोक साहित्य

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February 14th, 2011

 

विश्व संस्कृत पुस्तक मेला

विश्व संस्कृत पुस्तक मेला तथा राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन संपन्न हो गया। संपूर्ण संस्कृत जगत ने एक अपूर्व घटना घटित होते देखी। इस अनुपम संस्कृत मेले ने एक अद्भुत ऐतिहासिक अवसर का निर्माण किया। संस्कृत और संस्कृति दोनों धन्य हुए। वास्तविक सम्मेलन के एक दिन पूर्व […] विस्तृत....

February 14th, 2011

 

वेलेंटाइन डे

14 फरवरी को पूरे विश्व  में मनाया जाने वाला प्रेम दिवस वास्तव में संत वेलेंटाइन के प्रयासों का सुफल है। एक ऐसा संत जो अपने सिद्धांतों में प्रेम को सर्वोपरि मानता था और छुप कर प्रेमियों को विवाह रचाने में सहयोग  में सहयोग देता था। […] विस्तृत....

February 14th, 2011

 

वन-उपवन में फागुन

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February 14th, 2011

 

धूप से बातें करें

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February 14th, 2011

 

साहित्य की स्थापना

साहित्य स्थापना सामाजिक कर्म की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता बनती जा रही है। समय के अभाव में गंभीरता से व पूरी सहृदयता से पढ़़ने वालों की कमी सी हो गई है। यह विडंबना ही कही जाएगी कि उच्च शिक्षित विद्वान किसी भी रचना को सतही ढंग से […] विस्तृत....

February 14th, 2011

 

कर्तव्य और मैत्रीभाव

श्री शिव सिंह चौहान उन लोगों में से हैं, जिन्होंने इस पर्वतीय प्रदेश के गठन से लेकर विकासात्मक गतिविधियों को बहुत नजदीकी से देखा है। हिमाचल प्रदेश को जो पहले केंद्रशासित और बाद में डा. यशवंत सिंह परमार के नेतृत्व में जिस प्रदेश की मजबूत […] विस्तृत....

February 14th, 2011

 

नदी

ग्लेशियरों की यात्रा पूर्ण होते ही जन्म लेती है एक नदी कभी-कभी ग्लेशियर जन्म देते हैं एक झील को भी जो परिवर्तित हो जाती है एक नदी में। नदी महत्वाकांक्षी है बनना चाहती है सागर मगर मनुष्य की महत्वाकांक्षाओं के आगे बौनी हो जाती है […] विस्तृत....

February 7th, 2011

 
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