शमशेर बहादुर सिंह

शमशेर बहादुर सिंह (जन्म 13 जनवरी, 1911 - मृत्यु 12 मई, 1993) आधुनिक हिंदी कविता के प्रगतिशील कवि हैं। ये हिंदी तथा उर्दू के विद्वान हैं। प्रयोगवाद और नई कविता के कवियों की प्रथम पंक्ति में इनका स्थान है। शमशेर बहादुर सिंह दूसरा सप्तक (1951)…

लोक संस्कृति के संरक्षण में व्यथित जी का महती योगदान

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के अंतर्गत नेरटी गांव में फकीर चंद दीक्षित व माता शीला देवी के परिवार में ज्येष्ठ पुत्र के रूप में 15 अगस्त 1938 को जन्मे गौतम चंद वर्तमान में डॉ. गौतम शर्मा व्यथित के नाम से लोकप्रिय हैं। आरंभिक शिक्षा गांव के…

कमाल की कृति है ‘कूड़ा-धन’

पुस्तक समीक्षा * पुस्तक का नाम : कूड़ा-धन * लेखक : दीपक चौरसिया * प्रकाशक : प्रभात प्रकाशन, दिल्ली-2 * मूल्य : पांच सौ रुपए भारत के लगभग हर छोटे-बड़े शहर या गांव-कस्बे के आसपास ऊंचे उठते कचरे के ढेर, नालियों में बिलबिलाती गंदगी और…

शहर की ऐसी शराफत गले नहीं उतरती

पुस्तक समीक्षा * कहानी संग्रह का नाम : शहर की शराफत * कहानीकार का नाम : शेर सिंह * कुल पृष्ठ : 144 * मूल्य : 350 रुपए * प्रकाशक : भावना प्रकाशन, पटपड़गंज, दिल्ली हिमाचल के प्रसिद्ध लेखक शेर सिंह इस बार कहानी संग्रह ‘शहर की शराफत’ लेकर…

बालकृष्ण शर्मा नवीन

बालकृष्ण शर्मा नवीन (जन्म-8 दिसंबर, 1897 ई., भयाना ग्राम, ग्वालियर; मृत्यु- 29 अप्रैल, 1960) हिंदी जगत के कवि, गद्यकार और अद्वितीय वक्ता थे। हिंदी साहित्य में प्रगतिशील लेखन के अग्रणी कवि पंडित बालकृष्ण शर्मा के पिता श्री जमनालाल शर्मा…

प्रारंभिक पहाड़ी बोलियों में समानता और चुनौतियां

बोली का ज्ञान माता-पिता से मिलता है। बालक जीवन में जो कुछ बड़ा बनता है, वह माता-पिता द्वारा सिखाई गई बातों पर निर्भर करता है। ज्ञान के छोटे-छोटे टुकड़ों से जीवन का निर्माण होता है। मौलिकता और रचनात्मकता संयोजन के विवेकपूर्ण प्रबंधन का…

दिशाओं में उलझते हम

किसी दिलासा की आस हो या किसी कथित आदर्श को पकड़े रखने का मंतव्य, दोनों दशाओं में दिशा का ज्ञान सीमित होकर रहेगा। इच्छा हो या अनिच्छुक होने का एहसास, दोनों बंधन हैं। सामाजिक सोद्देश्यता हो या धर्म की कथित पगडंडी, दोनों का पथ हमें उथले कुएं…

जिंदगी की जंग का दस्तावेज

पुस्तक समीक्षा * लघु उपन्यास का नाम : मौन से संवाद * लेखक का नाम : राजेंद्र राजन * मूल्य : 120 रुपए * प्रकाशक : बौद्धि प्रकाशन, जयपुर ‘मौन से संवाद’ राजेंद्र राजन जी का दूसरा उपन्यास है। पहला सेलिब्रेशन भी पाठकों द्वारा बहुत पसंद किया…

वास्तविक जीवन की झलक

पुस्तक समीक्षा * पुस्तक का नाम : मेरी चुनी हुई कहानियां * लेखक का नाम : साधु राम ‘दर्शक’ * मूल्य : 500/-रुपए * प्रकाशक : अनिल प्रकाशन, 2619-20, न्यू मार्केट, नई सड़क, दिल्ली-110006 वयोवृद्ध लेखक साधु राम ‘दर्शक’ की नवीनतम पुस्तक ‘मेरी…

पते की बात

गुरु दक्षिणा ही सुखमय जीवन की आधारशिला आज हर व्यक्ति सुखमय जीवन की चाहत लिए बैठा है। सुखमय जीवन ही प्रत्येक व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य है। अब प्रश्न पैदा होता है कि लौकिक सुखमय जीवन की प्राप्ति कैसे हो? सुखमय जीवन के तीन आधारबिंदु हैं : 1.…

रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह दिनकर (जन्म : 23 सितंबर, 1908, बिहार; मृत्यु : 24 अप्रैल, 1974, तमिलनाडु) हिंदी के प्रसिद्ध लेखक, कवि एवं निबंधकार थे। राष्ट्रकवि दिनकर आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। उनको राष्ट्रीय भावनाओं से…

सरोज परमार का कलम से अटूट नाता

सरोज परमार किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। सरोज परमार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का विश्लेषण करना ठीक वैसे ही है, जैसे कोई आहिस्ता से नदी की लहरों का स्पर्श करते हुए गहरे समुद से रू-ब-रू हो पाए। सरोज परमार का व्यक्तित्व बहुआयामी है। इन्होंने…

लाशों के बीच शब्द ढूंढते मीडिया का अपना सच

नूरपुर के मलकवाल में गत सोमवार को बस हादसे में मारे गए 27 लोगों में शामिल चार से 15 साल की आयु के 23 बच्चों के आकस्मिक निधन ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। यह ऐसा दुःखद समाचार था, जिसके मिलते ही हर आदमी सुन्न होकर रह गया। शायद ही कोई…

अयोध्या सिंह उपाध्याय

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (जन्म-15 अप्रैल, 1865, मृत्यु-16 मार्च, 1947) का नाम खड़ी बोली को काव्य भाषा के पद पर प्रतिष्ठित करने वाले कवियों में बहुत आदर से लिया जाता है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में 1890 ई. के आस-पास अयोध्या सिंह…

कविता

गुलाम तुम गुलाम हो बंदिशें भी हैं पर बेडि़यां नहीं काम का खिलौना है हर कोई गलती करना अधिकार नहीं तुम्हारा स्वतंत्रता मुझे नहीं मालूम!!! देश तो आजाद है पर फैसला कानून भी नहीं लेता तो मेरी क्या मजाल! मैं और तुम तो गुलाम हैं…