Divya Himachal Logo Jan 22nd, 2017

प्रतिबिम्ब


आशापूर्णा देवी

आशापूर्णा देवी बांग्ला भाषा की प्रख्यात उपन्यासकार हैं, जिन्होंने मात्र 13 वर्ष की आयु में लिखना प्रारंभ कर दिया था और तब से ही उनकी लेखनी निरंतर सक्रिय बनी रही। अपनी प्रतिभा के कारण उन्हें समकालीन बांग्ला उपन्यासकारों की प्रथम पंक्ति में गौरवपूर्ण स्थान मिला। उनके विपुल कृतित्व का उदाहरण उनकी लगभग 225 कृतियां हैं, जिनमें 100 से अधिक उपन्यास हैं। आशापूर्णा देवी की सफलता का रहस्य बहुत कुछ उनके शिल्प-कौशल में है, जो नितांत स्वाभाविक होने के साथ-साथ अद्भुत रूप से दक्ष है …

January 9th, 2017

 
 

सावित्री बाई फुले

सावित्री बाई  भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसीपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिबा सावित्री बाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। महात्मा ज्योतिबा को महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। सावित्री […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

एक आम महिला की व्यथा

लाहौलां की कथा लोक कथाओं, लोकगीत, लोक संगीत, विश्वासों और आस्थाओं की यह सबसे बड़ी पूंजी भी है और ताकत भी कि इनकी जड़ें लोकमानस में गहरे से जुड़ी होती हैं। यह सामान्य लोक ही इनका संरक्षक भी है। ‘लाहौलां की कथा’ छपने पर शायद […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

हिमाचल में रचनात्मकता की महक

साहित्यिक लेखा-जोखा 2016 आज पहाड़ों का सीना छलनी हो रहा है तो इस थीम पर आधारित कविताएं वाहवाही लूट रही हैं । 70-80 के दशक में हिमाचल के दूरदराज के क्षेत्रों के जीवन पर लिखी कहानियां देश भर में धूम मचाए हुए थीं । अब […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

कविताएं

बेटियां बेटियों के हिस्से में क्यों… आती हैं मजबूरियां… चलते चलते राह में क्यों आती है दुश्वारियां पग-पग पर जिम्मेदारियों, के बोझ तले दबे बचपन, यौवन और बुढ़ापा जीवन सारा दो नावों में सवार हिचकोले खाती बेटियां निभा जाती हैं रिश्तों को जैसे कांटों में […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

क्रिसमस पर सजी कवियों की महफिल

जिला भाषा, कला एवं संस्कृति अधिकारी कांगड़ा के कार्यालय में क्रिसमस के अवसर पर कवियों की एक विशिष्ट महफिल सजी। इसमें जिला भर के विभिन्न स्थानों से आए हुए लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक कवि-कवयित्रियों ने बढ़-चढ़कर कर भाग लिया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रतिष्ठित […] विस्तृत....

January 2nd, 2017

 

अनुपम मिश्र

अनुपम मिश्र  प्रसिद्ध पर्यावरणविद, लेखक, संपादक और छायाकार थे। गांधी शांति प्रतिष्ठान दिल्ली में उन्होंने पर्यावरण कक्ष की स्थापना की। वह इस प्रतिष्ठान की पत्रिका ‘गांधी मार्ग’ के संस्थापक और संपादक थे।  वह राजेंद्र सिंह की संस्था तरुण भारत संघ के लंबे समय तक अध्यक्ष […] विस्तृत....

December 26th, 2016

 

पानी की अनुपम कहानी

शोध चाहे वह किसी भी तरह का हो, यदि वह लोक और उसकी भाषा से नहीं जुड़ता, तो तथ्य और अंतःदृष्टि दोनों के स्तर पर ही निष्प्राण ही रहता है।  बाद में कार्यक्रमों अथवा गांधी शांति प्रतिष्ठान में ही उनसे कई बार मिलना हुआ। उनसे […] विस्तृत....

December 26th, 2016

 

भाषा और पर्यावरण

अनुपम मिश्र समय-समय पर प्रतिबिंब में भी प्रकाशित होते रहे। उनकी पहचान तो पर्यावरविद के रूप में होती है लेकिन भाषा और व्यवस्था की भी उनकी एक साफ समझ थी। सभी विकृतियों को छूते हुए भी उनकी भाषा साफ बनी रहती, सहजता से प्रवाहित होती […] विस्तृत....

December 26th, 2016

 

कविताएं

लाल गुलाबी खुश हैं लेकिन गम के मारे हरे-हरे हैं नोटों की अदला-बदली से स्वयं नोट भी डरे-डरे हैं नहीं अभी तक पता किसी को खोटे कौन व कौन खरे हैं, एक हाथ से वे जाते हैं और दूसरे से आते आपस में बतिया नहीं […] विस्तृत....

December 26th, 2016

 
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