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प्रतिबिम्ब


कविताएं

तुम्हारे बिना मैं यतीम हो जाता

तेरे बिना हमारी दुनिया ,

होती जैसे अंधेरी गुफा

सूरज क्या होता है वह तो

बिलकुल इतना समझ न पाती,

या वह ऐसा अंबर होती,

जिसमें तारा एक न चमके

या फिर ऐसा प्यार कि

जिसमें आलिंगन का स्नेह , न बाती।

दुनिया होती सागर जैसी,

मगर नीलिमा से अनजानी

हिम आच्छादित,धवल छटा से,

जो मनमोहक ,चिर, सुंदर,

या फिर ऐसा उपवन होती,

जिनमें कलियां ,सुमन न खिलते,

जहां न गाती मधुर बुलबुलें,

जहां ने टिड्डों का मधुर स्वर।

पातहीन सब तरूवर होते

भद्दे, भोंडे ,काले,

गर्मी नहीं, न जाड़ा होता ,

न बसंत, केवल पतझर,

लोग असभ्य सभी हो जाते ,

दीन-हीन से,  भाव-शून्य से

रहा गीत…तो गीत न लेता जन्म

कभी इस धरती पर ।

-रसूल हमजातोव

भूखे लोगों

अपना हाथ बढ़ाओ

कविता की ओर

हथियार है कविता ,

नेतृत्व का दायित्व

लेना ही पड़ेगा…।

– बर्तोल ब्रेख्त, जर्मन कवि

February 27th, 2017

 
 

उनके झोले में हर वक्त मिलती है साहित्यिक पत्रिकाएं

आपको नई पत्रिका चाहिए क्या? मंडी शहर में पहुंचते ही अपने मिलने वाले परिचितों से चर्चित कवि सुरेश सेन निशांत यही सवाल पूछते हैं। उनके झोले में हर वक्त कोई न कोई साहित्यिक पत्रिका का ताजा अंक मौजूद रहता है। मतलब वह मंडी तभी आते […] विस्तृत....

February 27th, 2017

 

..लोग तो अब भी पढ़ना चाहते हैं साहित्य

यादविंद्र शर्मा साहित्य को पाठकों से दूर किया जा रहा है। पाठकों ने कभी भी साहित्य का विरोध नहीं किया है। पत्र-पत्रिकाएं साहित्य को पाठकों से जोड़ने का माध्यम रही हंै। मगर वर्तमान समय में दैनिक पत्र साहित्य को उचित स्थान नहीं दे रहे हैं। […] विस्तृत....

February 27th, 2017

 

हिमाचली संभावनाओं को हकीकत में बदला जाना शेष है

साहित्य अकादमी के लिए नहीं बल्कि पाठकों केलिए ही लिखा जाता है। वहीं समग्र हिमाचल अभी एक अवधारणा मात्र है। एक होमोजिनस …हिमाचल एक ऐसी संभावना है जिसे हकीकत में बदला जाना बाकी है। भैागोलिक ,सांस्कृतिक और भाषिक बहुलता के चलते हिमाचल एक समूची इकाई […] विस्तृत....

February 27th, 2017

 

हिमाचली साहित्य हिंदी जगत का ध्यान आकर्षित कर रहा है

साहित्य पाठक के लिए ही लिखा जाता रहा है और हिमाचल में लिखा जा रहा गंभीर साहित्य भी निश्चित तौर पर पाठकों के लिए ही लिखा जा रहा है, किसी संस्था के लिए नहीं। मुझे ऐसा कतई नहीं लगता कि ऐसा नहीं हो रहा है। […] विस्तृत....

February 27th, 2017

 

विद्यानिवास मिश्र

विद्यानिवास मिश्र हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार, सफल संपादक, संस्कृत के प्रकांड विद्वान और जाने-माने भाषाविद थे। हिंदी साहित्य को अपने ललित निबंधों और लोक जीवन की सुगंध से सुवासित करने वाले विद्यानिवास मिश्र ऐसे साहित्यकार थे, जिन्होंने आधुनिक विचारों को पारंपरिक सोच में खपाया था। […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

घने नीम तरु तले

ललित निबंधों में प्रकृति सर्वाधिक जीवंत रूप में उपस्थित होती है। इनमें प्रकृति के अंग-उपांग इतनी सजीवता के साथ स्थान पाते हैं कि लगता है वे हमारे अस्तित्व का अहम हिस्सा हैं। सच यह भी है कि पहाड़ी क्षेत्र में प्रकृति अपने शीर्षस्थ रूप में […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

लोक गाथाओं में देवाख्यान

सतलुज घाटी देवभूमि है। यहां क्षेत्र अधिष्ठात्री भीमाकाली, अंबिका देवी, परशुराम, कोटेश्वर महादेव, मानणेश्वर महादेव, पंदोई देव, देव कुरगण, ममलेश्वर महादेव, शमशरी महादेव, माहूंनाग और चिखड़ेश्वर महादेव जैसे देवी-देव मंदिर पुरातन काल से संस्कृति व परंपराओं के संरक्षक रहे हैं। देवाख्यान वस्तुतः गोपनीय होता है। […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

कविताएं

बीता साल गुजारा हमने बीता साल गुजारा हमने पत्नी को मनाने में चप्पल-जूते घिस गए हमारे ससुराल आने-जाने में। बीता साल गुजारा हमने स्कूल से फरलो लगाने में रजिस्टर में ऑन ड्यूटी भरकर पहुंच जाते मयखाने में छात्रों को साल भर कुछ न पढ़ाया हमको […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 

मेलों में बना रहे ‘लोक’

मेले हमारी संस्कृति का एक दर्पण हैं, प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। यहां तो साल भर लगभग हर रोज ही कहीं न कहीं ढोल- नगाड़ों के स्वर गूंजते रहते हैं, पूरा साल मेलों का दौर चलता है और इससे ही हमारी समृद्ध […] विस्तृत....

February 20th, 2017

 
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