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साहित्य में आज भी जीवित हैं फिराक गोरखपुरी

फिराक गोरखपुरी (वास्तविक नाम रघुपति सहाय, जन्म 28 अगस्त, 1896, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश; मृत्यु 3 मार्च, 1982, दिल्ली) भारत के प्रसिद्धि प्राप्त और उर्दू के माने हुए शायर थे। फिराक उनका तख़ल्लुस था। उन्हें उर्दू कविता को बोलियों से जोड़ कर…

सैरागैम के स्थापना दिवस पर कवियों की महफिल

सैरागैम कंपनी के सौजन्य से कांगड़ा शहर में एक बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन सैरागैम कंपनी का कांगड़ा में एक वर्ष पूरा होने पर किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रशासनिक अधिकारी प्रभात शर्मा ने की और मुख्यातिथि के रूप में डा. गौतम व्यथित तथा…

राह देखा करेगा सदियों तक जमाना

वह हमारे कलमी दोस्त थे, पिछल एक साल से बीमार चल रहे थे। आखिर 11 अगस्त को अलविदा कह गए। दयाराम सकलानी पत्रकार स्थित सरकाघाट तहसील मुख्यालय से मेरा गूढ़ परिचय सितंबर, 2008 में ही हुआ था, जबकि वह ‘दिव्य हिमाचल’ के जन्म से ही इसके साथ बतौर…

अनुभव के रंगों में ढली हैं नागपाल की कविताएं

अपने तीसरे काव्य संग्रह ‘उसकी-मेरी कविताएं’ में अरुण कुमार नागपाल ने अपने निजी अनुभवों को भावों में ढाल कर उन सवालों का जवाब देने का प्रयास किया है जो ज़िंदगी को ़खूबसूरत बनाने के लिए आवश्यक हैं। अपने आसपास की घटनाओं को नागपाल ने सघनता के…

डा. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

डॉ. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (जन्म 19 अगस्त, 1907 - मृत्यु 19 मई, 1979) हिंदी के शीर्षस्थ साहित्यकारों में से हैं। वह उच्च कोटि के निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, चिंतक तथा शोधकर्ता हैं। साहित्य के इन सभी क्षेत्रों में द्विवेदी जी अपनी प्रतिभा…

वेदों में राष्ट्र की कल्याण कामना

वैदिक ग्रंथों में भारतीय राष्ट्र की अवधारणा स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है और वेदों में भारत राष्ट्र की महिमागान के साथ ही राष्ट्र के कल्याण की कामना की गई है। वैदिक ग्रंथों के अध्ययन से इस सत्य का सत्यापन होता है कि राष्ट्र की अवधारणा भी वेदों,…

साहित्य का लोक संस्कृति को नमन

पुस्तक समीक्षा पत्रिका का नाम : साहित्य अमृत (मासिक) विशेषांक : लोक संस्कृति संपादक : त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी मूल्य : मात्र 30 रुपए प्रकाशन स्थल : 4/19, आसफ अली रोड, नई दिल्ली-2  अगस्त 1995 में सुप्रसिद्ध विद्वान एवं साहित्यकार स्व. पं.…

कविता

प्यास पलकों में नींद कहां हलचल सी मची है मैखाने में हुस्ने तसव्वुर को साकी तस्वीर तेरी देखता प्याले में है प्यास जो नहीं बुझती अतिशेदर्द सी भड़कती है जैसे बियां बां जंगल में रूहेफरिश्ते तड़पती है मुद्दत हुई पीते-पीते सूफियों के लबों पर…

शिमला में भारतीयता परोसता इंडियन कॉफी हाउस

पूरे भारत में आप कहीं भी चले जाएं, पर यदि अकस्मात आपको इंडियन कॉफी हाउस शिमला के दीदार हो जाएं तो दक्षिण भारतीय व्यंजनों का आस्वादन किए बिना आप रह नहीं सकते। व्यंजनों का स्वाद तमाम बड़े होटलों व रेस्तराओं से कहीं बेहतर तथा दाम इस स्पर्धा के…

साहित्य में घटती विश्व दृष्टि

आज बहुत से कवियों के अंतःकरण में जो बेचैनी है, ग्लानि, अवसाद एवं विरक्ति है उसका एक कारण उनमें विश्व दृष्टि का अभाव है जो उन्हें आभ्यंतर आत्मिक शक्ति प्रदान कर सके, उन्हें मनोबल दे सके व उनकी पीड़ाग्रस्त अगतिकता को दूर कर सके... साहित्य में…

स्वतंत्रता आंदोलन-देश भक्ति में प्रेस का योगदान

मंगलवार को हम आजादी की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इस उपलक्ष्य में ‘दिव्य हिमाचल’ ने प्रतिबिंब के इस अंक में कलम की ताकत को उकेरा है। कवियों-पत्रकारों व अन्य रचनाकारों ने आजादी की लड़ाई में क्या भूमिका निभाई, उसी का लेखा-जोखा यहां दे रहे…

एक था मोगा…

वर्ष 2017 की गुरु पूर्णिमा के दिन मोगा इस दुनिया को छोड़ कर चला गया। उसकी मृत्यु का समाचार मुझे अगले दिन सुबह उस समय मिला, जब मैं बस अड्डे पर रोजाना की तरह अखबार लेने गया। मोगा ‘कहलूरी शटराला’ का वह पात्र था जो हर किसी पर कटाक्ष करता था।…

भीष्म साहनी

भीष्म साहनी (जन्म- 8 अगस्त, 1915, रावलपिंडी, अविभाजित भारत; मृत्यु- 11 जुलाई, 2003, दिल्ली) प्रसिद्ध भारतीय लेखक थे। उन्हें हिंदी साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा का अग्रणी लेखक माना जाता है। वह आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से…

लोक कहावतों में स्वास्थ्य

लोक कहावतों के अनुसार लोग अपने व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर लंबे समय तक स्वस्थ और सुखमय जीवन बिताया करते थे। लोक कहावतों में स्वस्थ शरीर के लिए विशेष उल्लेख किया गया है, जिसे अपना कर आप भी लंबे समय तक स्वस्थ और सुखमय जीवन…

फलसफा

ज़िंदगी मुझे बता तेरा फलस़फा क्या है तड़प कर मर जाना अब ये सिलसिला क्या है तेरी बज्म में क्यों तकलीफ मिलती है जड़ें कटीं तो कली भी नहीं खिलती है सा़की ज़रा ठहरो कुछ सुकून आने दो पीने-पिलाने का सिलसिला बाद में होगा तुम्हारी ये जुल़्फ, नाजों…
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