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प्रतिबिम्ब


इतिहास के आईने में सिरमौर

अंग्रेजी सरकार ने राजा की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उनके सम्मान में कई उपाधियां प्रदान कीं। 1915 में महाराजा को केसीसीएसआई की उपाधि, 1918 में उनको लेफ्टिनेंट कर्नल बनाया गया और वंशानुगत महाराजा की उपाधि प्रदान की गई, जिनसे शासकों की श्रेणी में उनका सर्वोच्च स्थान बन गया। 1921 ई. में उनको केसीआईई की उपाधि और उनको दी जाने वाली सलामी में तोपों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी गई।

महाराजा के शासनकाल में शुरू किए गए सुधारों में मुख्य रूप से महाराज के पिता द्वारा शुरू की गई सुरेंद्र वाटर वर्क्स को पूरा करना, सारे राज्य में निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा, विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों का निर्माण, हाई स्कूल भवन का विस्तार, महिमा पुस्तकालय का उद्घाटन और नाहन से काला अंब रोड को पक्का करना आदि शामिल हैं। इसके शासन के मुख्य सुधारों में बंदोबस्त में संशोधन, जो 1931 में पूरा हुआ और जो 10 सालों से विलंबित था, को लागू करना शामिल है। इसके कारण मालिकाना हक के विश्ववसनीय रिकार्ड तैयार होने के साथ-साथ राज्य के भू-राजस्व 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी हुई।

13 अगस्त, 1933 को महाराजा अमर प्रकाश का सात समुद्र पार विदेशी भूमि पर दुखदायी परिस्थितियों में देहांत हो गया। कुछ समय से महारानी बीमार चल रही थी और डाक्टरी सलाह से इलाज के लिए उनको यूरोप ले जाने का फैसला लिया गया। वहां जाने के लिए महाराजा नाहन से मंगलवार के दिन 11 मई, 1933 को चले। नाहन छोड़ते समय महाराजा का स्वास्थ्य ठीक था, लेकिन उनकी दायीं बाजू में मामूली दर्द था, जिसके बारे में विश्वास था कि कुछ वर्ष पहले बिजली की बैटरी से महाराज की दुर्घटना हो गई थी, उसकी वजह से उनकी बाजू में दर्द है।

उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान हकुमत राय के साथ मारसैलीज के रास्ते वियाना जाने के लिए समुद्री यात्रा शुरू की। स्वेज नहर तक महाराजा बिलकुल स्वस्थ थे और उन्होंने काहिरा तक की यात्रा सुखद ढंग से की। जब वह पोर्टशैड में स्टीमर पर चढ़े तो उनको बुखार महसूस हुआ। कर्नल राय ने उनकी दर्द वाली बाजू की बिजली से सिंकाई की, परंतु उनका दर्द बढ़ता ही गया और साथ ही बुखार ज्यादा होता गया तो महाराजा मरसैलीज में जहाज से उतर गए और फिर लंदन के लिए रवाना हो गए, जहां वे दो जून को पहुंचे। वहां पर उनकी सेहत का निरीक्षण व जांच लंदन के प्रसिद्ध डाक्टरों, जिनमें डा. सर विलियम बिल कोक्स, डा. ब्रेनी व लार्ड डाउसन थे, ने की। कुछ दिन बाद महाराजा का ज्वर सामान्य हो गया, परंतु वह फिर बीमार पड़ गए, जो चिंता का विषय था और डाक्टरों की सलाह अनुसार वह वियाना के लिए चल पड़े, जहां वह 26 जुलाई को पहुंचे।

डा. पोरगस की सलाह अनुसार वह विनियर काटेज सेनिटोरियम में चले गए। महाराजा के पुनः बीमार होने पर उनको सिर में दर्द भी शुरू हो गया था। एक मेडिकल बोर्ड, जिसमें डा. पोरगस व तीन अन्य डाक्टर थे, महाराजा के स्वास्थ्य की जांच-परख की। इसके बाद प्रोफेसर लारेंस से भी परामर्श किया गया और वह भी बोर्ड के रोग निदान से सहमत हो गए। वियना के सभी प्रसिद्ध डाक्टरों से परामर्श किया गया, परंतु तंत्रिका शोथ में उत्पन्न हुई बीमारी घातक सिद्ध हुई। महाराजा का 13 अगस्त, 1933 को देहांत हो गया। वियना में ब्रिटिश दूतावास के दूरभाष के अनुसार दाह-संस्कार कर दिया गया।

महावीर सिंह मान, सेवानिवृत्त असिस्टेंट,  डायरेक्टर,  आर्काइव्ज विभाग, हरियाणा

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February 28th, 2016

 
 

अब खुशी है न कोई गम रुलाने वाला

अब खुशी है न कोई गम रुलाने वाला हमने अपना लिया हर रंग जमाने वाला। हर बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा- चेहरा जिस तरह देखिए आने को है आने वाला। उसको रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था सारा घर ले गया घर छोड़ […] विस्तृत....

February 28th, 2016

 

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हाय…! मुझे खंजर मार भागा है पकड़ो-पकड़ो-पकड़ो उसे दबोचो उसे बचकर नहीं जाना चाहिए अरे कोई सुनता क्यों नहीं ? मेरे लिए न सही अपने लिए तो कुछ करो यही हाल रहा यारो तो सबका ऐसा ही मंजर होगा सीना सबका छलनी होगा बार-बार ऐसा […] विस्तृत....

February 28th, 2016

 

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

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February 28th, 2016

 

विमर्श का केंद्र बने बाल साहित्य

 ‘बड़ों’ के लिए लिखने वाले कितने ही साहित्यकारों ने समृद्ध बाल साहित्य की रचना भी की है, जिनमें विष्णु प्रभाकर, जय प्रकाश भारती, राष्ट्रवंधु, हरिकृष्ण देवसरे, क्षमा शर्मा, दामोदर अग्रवाल, शेरजंग और दिविध रमेश आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। इसके साथ ही कविता के क्षेत्र […] विस्तृत....

February 7th, 2016

 

इतिहास के आईने में सिरमौर

उसने राज्य के लगभग सभी विभागों  में सुधार किए, परंतु उस द्वारा शुरू किए वाटर वर्क्स और सीमा पर प्लेग की चौकियां स्थापित करना सबसे महत्त्वपूर्ण है। साढ़े बारह वर्ष के शासन के उपरांत राजा सुरेंद्र विक्रम प्रकाश लगभग तीन महीने की बीमारी के बाद […] विस्तृत....

February 7th, 2016

 

राजस्थान में अच्छी पहल

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी कुलपतियों ने कुछ सराहनीय फैसले किए हैं। सबसे बड़ा फैसला तो यह कि दीक्षांत समारोहों में अब काले गाउन नहीं पहने जाएंगे। उनकी जगह स्नातक और शिक्षक क्रीम कलर का कुर्ता-पाजामा पहनेंगे। छात्राएं इसी […] विस्तृत....

February 7th, 2016

 

आपकी भाषा, आपकी संस्कृति

मैं सभी अपने मित्रों से प्रार्थना करता हूं कि आप अपनी आने वाली पीढ़ी को जरूर अपनी भाषा सिखाएं। यह हमारी धरोहर है, इसे कृपा करके लुप्त होने से बचाएं। कलाकार होने के नाते यह अपनी भाषा के लुप्त होने की बात मुझे काफी समय से […] विस्तृत....

February 7th, 2016

 

फैज अहमद फैज

फैज अहमद फैज प्रसिद्ध शायर थे, जिनको उनकी इंकलाबी और रूमानी रचनाओं की वजह से जाना जाता है।  सेना, जेल तथा निर्वासन में जीवन व्यतीत करने वाले फैज ने कई नज्में, गजलें लिखी तथा उर्दू शायरी में आधुनिक प्रगतिवादी दौर की रचनाओं को सबल किया। […] विस्तृत....

February 7th, 2016

 

गजल

अब सलामत हमें अपना घर चाहिए। आंख जो भी उठाए वो सर चाहिए ।। बंद कर दो सभी जंगो जेहाद तुम । इक मुहब्बत का बसना शहर चाहिए ।। अब न लस्सी न मक्खन न दूधो दही। नाश्ते में परोंठा बटर चाहिए ।। चाहते हो […] विस्तृत....

February 7th, 2016

 
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