कहानी कंदरौर पुल की

सभ्यताओं, दो संस्कृतियों और दो ऐतिहासिक स्थानों को आपस में जोड़ कर नव सृजन करता है। निर्मित पुलों की फेहरिस्त में असंख्य नाम हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला में कंदरौर नामक स्थान पर निर्मित कंदरौर पुल का अपना एक अमूल्य एवं समृद्ध…

वह शहर

वह शहर अब वीरान हो गया नहीं रहते अब वहां आदमी क्योंकि आदमी अब आदमी का ही दुश्मन हो गया। राज करते हैं वहां अब घुसपैठिए और आतंकवादी चारों तरफ दहशत और मौत का साया हो गया। नहीं भरते बच्चे किलकारियां। नहीं गाती अब…

बरसात में

बरसात में वह हरियाली सा बिछ जाता है चहुंओर बादलों सा बरसता है दूर-दूर तक धुंध सा छा जाता है हर कोने कछार में रिमझिम के मधुर स्वरों में गूंजता है एक गीत सा भीगी-हवाओं सा हो जाता है किसी याद मे धीरे-धीरे बागों…

सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म नागपंचमी के दिन 16 अगस्त, 1904 को इलाहाबाद के पास निहालपुर गांव में हुआ था। सुभद्रा कुमारी की काव्य प्रतिभा बचपन से ही सामने आ गई थी। आपका विद्यार्थी जीवन प्रयाग में ही बीता। सुभद्रा और महादेवी वर्मा दोनों बचपन…

आखिरी पड़ाव पर लोक काव्य

अब तो यह धरोहर सुरक्षित है केवल उन ग्रामीण वृद्धाओं के पास जो अगले लोक के द्वार पर बैठी हैं। नई पीढ़ी के पास न तो ऐसे अवसर हैं, न दिलचस्पी है। न ही अब समाज में ऐसे अवसर जुटाए जाते हैं, जहां ऐसी धरोहर का अगली पीढ़ी को हस्तांतरण हो सके। हिंदी…

हम कवि रासबिहारी बोल रहा हूं

भइया साहितकार हैं जभी तो साहितकार लगाए रहे हैं नाम से पहले। नाम तो हम गुमनाम रखे रहे फिर भी मशहूर हो गए ससुरे साहित जगत में। हमारी एक किताब आई है... लिखने-लिखाने के नुस्खे। जरा शिच्छा मंत्रालय में बात तो करिए न। कुछ लेना- देना हो तो निस्…

मां

आज  के विकास और सभ्यता के पैमाने पर मां का कहीं कोई वजूद ही नहीं है वह बिलकुल ‘अनपढ़ गंवार’ थीं सीधी-सपाट, पहाड़ी औरत पर अनपढ़, गंवार, जाहिल और गरीब होने पर भी मां के पास हुनरों का अंबार था वे सीना-पिरोना जानती…

गजल

रफ्ता-रफ्ता दूर हुए वो, साथी मेरे कल के, जिनको हमने सिखलाया था, चलना हल्के-हल्के।। हम ठहरे मजलूम-ओ-मुफलिस, जिनका नहीं ठिकाना, लेकिन वो भी निकले शातिर, रहते पता बदल के।। देते भी आवाज कभी हम, जो मिल जाते अकसर, पास होकर भी रहे…

ऋतु सावन की

मेघ जल बरसा रहे धरती की अगन मिटा रहे कली-कली मुस्करा रही किसान खुशी से झूम रहे अपने खेतों को चूम रहे पशुओं की आवाज आ रही इंद्रधनुष की छटा देखो काली-काली घटा देखो हवा कोना कोना महका रही वर्षा की चर-चर लगी मेंढको…

पंडित विष्णु नारायण भातखंडे

पंडित विष्णु नारायण भातखंडे भारत के ‘हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत’ के विद्वान व्यक्ति थे। शास्त्रीय संगीत के सबसे बड़े आधुनिक आचार्य के रूप में उनका नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। पूरी तरह से निःस्वार्थ और समर्पित संगीत साधक भातखंडे ने…

पुस्तक संस्कृति को सहेजने की जरूरत

कम्प्यूटर या मोबाइल की स्क्रीन पर आंखें गड़ाकर ट्विटर, फेसबुक, अखबार या किताब पढ़ने का वो आनंद कहां, जो मजा अधलेटे अपने दिल पर पुस्तक रखकर पुस्तक पढ़ने का है। एक  तरफ  ऑनलाइन पढ़ने से जहां दिमाग व आंखों पर अनावश्यक तनाव आने से नींद कोसों…

कांगड़ा लोक साहित्य परिषद ने मनाया परंपरा उत्सव

नेरटी, तहसील शाहपुर (कांगड़ा) गांव में स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर व देहरी उसी इतिहास की धरोहर है। यहीं पर चंबा नरेश राज सिंह शत्रु सेना से खोपड़ी उड़ जाने के बावजूद भी अढ़ाई घड़ी लड़ते शहीद हुए थे। सन् 1794 के आषाढ़ प्रविष्टे सात को, उन्हीं…

क्षणिकाएं

मद्य निषेध वह शराब छोड़ो अभियान में अपना योगदान निभा रहा था शराब में धुत्त होकर मद्य निषेध के पोस्टर चिपका रहा था। आरक्षण गरीबी खड़ी चौराहे पर अमीरी से भीख मांग रही हमारे नेता चाव से एक तरफ राशन दूसरी तरफ…

गजल

स्वप्न निद्रा में जब आते सपने यादें बन तड़पाते सपने। बंदे के साथ सदा रहते, खत्म नहीं हो जाते सपने। क्या-क्या करते क्या बताऊं , दूजा जन्म दिखाते सपने। अनहोने अनदेखे अद्भुत, क्या-क्या रूप दिखाते सपने। मुद्दत से जो…

गागर में ज्ञान का सागर

पुस्तक : सामान्य ज्ञान मंजूषा लेखक : राजीव गर्ग प्रकाशक : मैकग्रा हिल एजुकेशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली मूल्य : 285 रुपए जब भी कोई युवा प्रतियोगी परीक्षा में भाग्य आजमाने की सोचता है तो सबकी सलाह होती है सामान्य ज्ञान…