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प्रतिबिम्ब


कविताएं

दूध की नदियां …

ऊपर आसमान और नीचे जमीं है।

प्यार ही प्यार बरसता यहीं है।

कश्मीर से कन्या कुमारी तक स्वर्ग

कहीं है तो यहीं है, यहीं है।

खेत-खलिहानों में पलता है जीवन,

जान से बढ़कर होता है पशुधन,

दूध की नदियां बहें दिन-रात,

अमन-शांति की मिसाल है यह

किसानों की बदौलत

हरियाली चहुं ओर है,

चेहरों पर लाली

और बाजुओं में जोर है,

भर पेट खाना सबको जहां मिले

वह स्थान कहीं तो यहीं है, यहीं है।

-राजकुमार सकोलिया,  29/11 भारगो नगर, जालंधर

बेटी

धरती का शृंगार है बेटी।

कुदरत का उपहार है बेटी।।

रंग-बिरंगे मौस्म बेशक।

जैसे ऋतु बहार है बेटी।।

कहीं शारदा कहीं रणचंडी।

चिडि़यों की उडार है बेटी।।

दो कुलों की शान इसी से।

प्रेम का इक संसार है बेटी।।

इस बिन सृजन न हो पाएगा।

धरती का विस्तार है बेटी।।

बेटी बिन जग बेदम-नीरस।

जग में सरस फुहार है बेटी।।

मधुर-मधुर एहसास है बेटी।

पूर्णता-परिवार है बेटी।।

धरती का स्पंदन है यह।

ईश-रूप साकार है बेटी।।

बेटे का मोह त्यागो प्यारे।

नूतन-सृजन-नुहार है बेटी।।

कुल की शान बढ़ाए बेटी।

मत समझो कि भार है बेटी।।

दिल की बातें दर्द सुनाए।

अपनी तो सरकार है बेटी।।

— अशोक दर्द, प्रवास कुटीर, गांव व डाकघर बनीखेत, तहसील डलहौजी, जिला चंबा

December 12th, 2016

 
 

साहित्यिक सेवानिवृत्ति का निर्वात

डा.अनीता शर्मा को यह श्रेय जाता है कि उन्होंने कई लोगों के बीच छुपा बैठा साहित्यकार व कलाकार उजागर किया। सभी को मंच प्रदान किया। पीठ थपथपाई और कई प्रतिभाएं उभर कर सामने आईं। प्रकाश शर्मा जैसे लोक गायक की, उन्होंने मदद की। वयोवृद्ध कलाकारों […] विस्तृत....

December 5th, 2016

 

बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

हिंदी साहित्य के अग्रणी कवियों में से एक पंडित बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का जन्म 8 दिसंबर, 1897 ई. को ग्वालियर राज्य के भयाना नामक ग्राम में हुआ था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, श्रीमती एनी बेसेंट एवं श्री गणेशशंकर विद्यार्थी के संपर्क में आने के बाद […] विस्तृत....

December 5th, 2016

 

लाहुला की कथा

लाहुला को भाग्य ने कुछ दिन का जीवन लिखा था। उसे पैदा होने के कुछ दिन बाद किसी भट्ट परिवार को दे दिया  गया था, उस परिवार ने कुछ दिन लालन-पालन कर 8-9 वर्ष की आयु में ही उसकी बेमेल शादी किसी बुजुर्ग से करवा […] विस्तृत....

December 5th, 2016

 

पुस्तक समीक्षा : ‘अधकचरी अवधारणाओं’ से आगे के हरि सिंह

किताब का नाम : जम्मू- कश्मीर के जननायक महाराजा हरि सिंह लेखक : डा.कुलदीप चंद अग्निहोत्री प्रकाशक : प्रभात प्रकाशन,4/7 आसफ अली रोड, नई दिल्ली मूल्य : दौ सौ रुपए भारतीय अकादमिक जगत स्थापित मान्यताओं और छवियों के चहुं ओर चक्कर लगाने की अक्षमता से […] विस्तृत....

December 5th, 2016

 

पुस्तक समीक्षा

कठिन आत्ममंथन  का ‘कौस्तुभ’ किताब का नाम  : कौस्तुभ कवियित्री         : डेजी एस शर्मा प्रकाशक         : यूनीस्टार बुक प्राइवेट लिमिटेड,  सेंक्टर 34ए, चंडीगढ़                      मूल्य              : 175 रुपए मंथन, जब कभी भी होता है, चाहे वह व्यक्तिगत स्तर पर हो या सामुदायिक स्तर पर, उसमें […] विस्तृत....

November 27th, 2016

 

डाकघर से निकलती रही है साहित्य की चिट्ठी

भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के दौरान महान रचनाकार दीनबंधु मित्र डाकघर में पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत थे। जब वह डाकघर निरीक्षण के लिए नदिया, मुर्शिदाबाद और जसोर आदि जगहों में गए, तो अंग्रेजों द्वारा किसानों के भयानक शोषण को देखकर उनका मन बड़ा […] विस्तृत....

November 27th, 2016

 

काशी प्रसाद जायसवाल

काशी प्रसाद जायसवाल भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार एवं साहित्यकार थे। ये इतिहास तथा पुरातत्त्व के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान थे। काशी प्रसाद जायसवाल ‘काशी नागरी प्रचारिणी सभा’ के उपमंत्री भी बने थे। इन्होंने ‘बिहार रिसर्च जर्नल’ तथा ‘पाटलीपुत्र’ नामक पत्रों का संपादन भी किया था। […] विस्तृत....

November 27th, 2016

 

मीडिया समाधानकर्ता हो उपदेशक नहीं

मीडिया को उपदेशक नहीं समाधानकर्ता की भूमिका अदा करनी चाहिए। सूचना का संतुलन पत्रकारिता का सबसे बड़ा उत्तरदायित्व है। पीड़ा की तिजारत से बचते हुए उसकी अभिव्यक्ति पर बल दिया जाना चाहिए। पत्रकारों को अपनी शारीरिक एवं मानसिक तंदुरुस्ती पर बल देना चाहिए… पत्रकारिता के […] विस्तृत....

November 20th, 2016

 

महसूस करें बालमन की ‘दिव्यता’

पुस्तक समीक्षा पत्रिका  : दिव्यता-बाल विशेषांक प्रकाशकः दिव्यता पब्लिकेशन, सी-117, सेक्टर -ए, महानगर, लखनऊ मूल्य : 20 रुपए संवेदनाओं के सिकुड़न के दौर में भावनाओं के किसलय  छूने की कोशिशें नगण्य जैसी हो गई हैं। वैश्वीकरण की प्रक्रिया के कारण अब तमाम विधाओं में बच्चों […] विस्तृत....

November 20th, 2016

 
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