Divya Himachal Logo Jun 24th, 2017

प्रतिबिम्ब


गज़ल

छोड़ो भी तकरार कि जीवन छोटा है,

यारो बांटो प्यार कि जीवन छोटा है।

निज-स्वार्थ के लिए रिश्ते से कटना मत,

म्यान में रख तलवार कि जीवन छोटा है।

घमंड की गठरी क्यों उठाए फिरता है,

जल्दी कर, उतार कि जीवन छोटा है।

तेरे सारे पूर्वज तो जग से चले गए,

तू भी मध्यमकार कि जीवन छोटा है।

इक दिन उसने कुंडी पाकर खींच लेना,

छोड़ देना संसार कि जीवन छोटा है।

रूठ गए जो उनको फिर जाकर मना लो,

फिर से करो इकरार कि जीवन छोटा है।

धरती एक सराय है मालिक कोई नहीं,

सब किराएदार कि जीवन छोटा है।

चुगली निंदा तो बंदे की आदत है,

क्यों खींचे दीवार कि जीवन छोटा है।

चुटकी की भांति उम्र सारी बीत गई,

किश्ती लग गई पार कि जीवन छोटा है।

निर्धन, राजा, संत, भिखारी-रूह एक है,

सबका कर सत्कार कि जीवन छोटा है।

सागर सारा गाह कर तट पर बैठा है,

अब कहता है यार कि जीवन छोटा है,

कैसे गिरता सुंदर निर्झर पर्वत से,

ऊंचा रख किरदार कि जीवन छोटा है।

अंबर छू ले, सागर गाह ले फिर न कहना,

यारो को फिर, यार कि जीवन छोटा है।

सामने आकर बात कर लो यदि करनी है,

पीठ पे ना कर वार कि जीवन छोटा है।

सजना प्यार में भरकर खुशबू, सुंदरता,

दे-दे एक उपहार कि जीवन छोटा है।

आंखें खोल कर रख मुंह से कुछ न कह

देखो ना संसार कि जीवन छोटा है।

अदान- प्रदान के तराजू में

सब रिश्ते व्यापार कि जीवन छोटा है।

खेवनहारे किश्ती को भीतर न रख

आर लगा या पार कि जीवन छोटा है।

वह मेरा, यह मेरा है-भ्रम तेरा,

फूलों के साथ खार कि जीवन छोटा है।

चांद सितारे रातों को रूशना देते

यूं करते उपकार कि जीवन छोटा है।

आ-जा, रूठ कर न जा बालम कहता है,

तेरे साथ त्योहार कि जीवन छोटा है।

– बलविंदर बालम, गुरदासपुर

ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब)

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May 15th, 2017

 
 

अनपढ़ा ते पढ़ेयो खरे, पढ़ेयां ते हन कढ़यों खरे

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May 15th, 2017

 

संस्कृति सहेजने की राह दिखाता लाहुल-स्पीति

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May 15th, 2017

 

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May 8th, 2017

 

स्मृतियों के हाशिए पर जोरावर सिंह

10 दिसंबर, 1841 को तिब्बती सेना ने तकलाकोट से चार किमी पहले तोयो नामक स्थान पर जोरावर सिंह व उसकी सेना को घेर लिया। तीन दिनों तक भयंकर युद्ध होता रहा। 12 दिसंबर, 1841 को डोगरा सेनापति जोरावर सिंह के कंधे पर गोली लगी और […] विस्तृत....

May 8th, 2017

 

कविता

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May 8th, 2017

 

बनारसी दास चतुर्वेदी

बनारसी दास चतुर्वेदी का जन्म 24 दिसंबर, 1892 को फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। बनारसी दास चतुर्वेदी प्रसिद्ध पत्रकार और शहीदों की स्मृति में साहित्य प्रकाशन के प्रेरणा स्रोत थे। उनकी गणना अग्रगण्य पत्रकारों और साहित्यकारों में की जाती है। हिंदी साहित्य के प्रति […] विस्तृत....

May 1st, 2017

 

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संस्कृत विश्व की प्राचीन भाषा है, इसी की उत्पत्ति के संबंध मंे कहा गया है कि सृष्टि के समय ब्रह्मा ने वेदों के साथ इसकी रचना की। वैदिक साहित्य एक समय में नहीं लिखा गया है। लंबे समय में इसका निर्माण हुआ है। ऋग्वेद प्रथम […] विस्तृत....

May 1st, 2017

 

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May 1st, 2017

 

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कहते है जो हिमाचल घूमने आया और यहां की धाम खाए बिना लौट गया, तो उसका हिमाचल घूमना आधा-अधूरा रह जाता है। हिमाचल में शादियों में बनने वाली धाम का स्वाद उस फाइव स्टार होटल के स्वाद को भी फीका कर देता है।  प्रदेश की […] विस्तृत....

May 1st, 2017

 
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