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मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखंड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंजिलों से गुजरा। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय…

उर्दू का योगदान भूल गए हैं हम

उर्दू के पत्र-पत्रिकाओं की विडंबना यह है कि स्वयं उर्दू भाषा से जुड़ा मुस्लिम वर्ग उसकी क़द्र नहीं करता। ऐसा देखने में आता है कि बड़े शहरों व छोटे कस्बों में एक उर्दू अख़बार को कम से कम 25-50 लोग पढ़ते हैं। उर्दू का चाहने वाला भी अपनी जेब…

सृजन और संहार की परिचायक बरसात

बादलों का उमड़ना-घुमड़ना तथा उससे उत्पन्न घनघोर गर्जना प्रकृति को चेतन अवस्था में ले आती है। श्रावण मास के आगमन संग दक्षिण-पश्चिम मानसून का पदार्पण संपूर्ण भारत समेत हिमाचली पहाड़ों को हरा-भरा व जलयुक्त कर देता है। हिमाचली सौंदर्य को बरसात…

पुस्तक समीक्षा : अंधेरे के पार रोशनी की झलक दिखाती कहानियां

पुस्तक : मैं जीना सिखाता हूं लेखक : अजय पाराशर मूल्य : 200 रुपए प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, एफ-77, सेक्टर-9, इंडस्ट्रियल एरिया, जयपुर एड्स पीडि़तों के अनुभवों के संसार में झांकना और उनके जीवन के अंधेरे कोनों की टोह लेना इतना आसान नहीं है। बाह्य…

सिमटते आंगन ने सावन के झूलों को लगाई ब्रेक

पहले सावन का महीना आते ही गांव के मोहल्लों में झूले पड़ जाते थे और सावन की मल्हारें गूंजने लगती थी। ग्रामीण युवतियां-महिलाएं एक जगह देर रात तक श्रावणी गीत गाकर झूला झूलने का आनंद लेती थी। वहीं जिन नव विवाहित वधुओं के पति दूरस्थ स्थानों पर…

नए बीज

ब्यास किनारे देवदारों तले बांसुरी बजाती डोलमा नहीं जानती अभी कि उस जैसी निश्छल सरल, सीधी लड़कियां बांसुरी नहीं बजाती वे तो बेरहम, बीमार, उबाऊ रस्मों के ढोल पीटती आ रही हैं सदियों से उसके बांसुरी वादन से न पहाड़ हिलेंगे न मैदान इधर-उधर…

वासुदेव शरण अग्रवाल

वासुदेव शरण अग्रवाल भारत के प्रसिद्ध विद्वानों में से एक थे। वह भारत के इतिहास, संस्कृति, कला, साहित्य और प्राच्य विद्या आदि विषयों के विशेषज्ञ थे। वासुदेव शरण अग्रवाल हिंदी विश्वकोश संपादक मंडल के प्रमुख सदस्य थे। उन्होंने मथुरा संग्रहालय…

जीवंत परंपराओं का प्रतीक ‘शांत महायज्ञ’

इस पूजन के लिए ब्राह्मणों को एक विशेष प्रकार की पोशाक पहनाई जाती है। यह पोशाक पीले या भगवे रंग के वस्त्र से बना पूरी बाजू का चोगा होता है और सिर पर पहनने के लिए इसी रंग की टोपी होती है। इस पूजन का मुख्य आकर्षण बलि देने के बाद बकरों का छत से…

कैसा छंद

कैसा छंद बना देती हैं बरसातें बौछारों वाली, निगल-निगल जाती हैं बैरिन नभ की छवियां तारों वाली! गोल-गोल रचती जाती हैं बिंदु-बिंदु के वृत्त बना कर, हरी हरी-सी कर देता है भूमि, श्याम को घना-घना कर। मैं उसको पृथ्वी से देखूं वह मुझको देखे अंबर…

घन गरजे

सखि, वन-वन घन गरजे! श्रवण निनादा-मगन मन उन्मन प्राण-पवन-कण लरजे! परम अगम प्रियतमा गगन की शंख-ध्वनि आई मंथर गति रति चरण चारू की चाप गगन में छाई अंबर कंपित पवन संचारित संसृति अति सरसाई मंद्र-मंद्र आगमन सूचना हिय में आन समाई क्षण में प्राण…

काले बादल

कहां से आए बादल काले? कजरारे मतवाले! शूल भरा जग, धूल भरा नभ, झुलसीं देख दिशाएं निष्प्रभ, सागर में क्या सो न सके यह करुणा के रखवाले? आंसू का तन, विद्युत का मन, प्राणों में वरदानों का प्रण, धीर पदों से छोड़ चले घर, दुख-पाथेय संभाले! लांघ…

गुरु दत्त

गुरु दत्त फिल्म निर्माता-निर्देशक और अभिनेता थे। ‘गुरु दत्त’ का वास्तविक नाम ‘वसंथ कुमार शिवशंकर पादुकोण’ था। गुरु दत्त अपने आप में एक संपूर्ण कलाकार बनने की पूरी पात्रता रखते थे। वे विश्व स्तरीय फिल्म निर्माता और निर्देशक थे। साथ ही उनकी…

बूंद-बूंद से झरती कविता

बारिश की बूंदों से धरती पर ही कोंपलें नहीं फूटतीं, मन की मिट्टी में भी नवांकुर निकल आते हैं। इस मौसम में सृजनात्मकता अपने चरम पर होती है। प्रकृति के सभी अंग-उपांग सक्रिय हो जाते हैं और इसी कारण, धरती  सोलह शृंगार करके नववधू जैसी बन जाती है।…

ये मेघ साहसिक सैलानी

ये मेघ साहसिक सैलानी! ये तरल वाष्प से लदे हुए द्रुत सांसों से लालसा भरे, ये ढीठ समीरण के झोंके, कंटकित हुए रोएं तन के किन अदृश करों से आलोडि़त स्मृति शेफाली के फूल झरे! झर-झर झर-झर अप्रतिहत स्वर जीवन की गति आनी-जानी! झर - नदी कूल के झर नरसल…

बादल चले गए वे

बना बना कर चित्र सलोने यह सूना आकाश सजाया राग दिखाया रंग दिखाया क्षण-क्षण छवि से चित्त चुराया बादल चले गए वे आसमान अब नीला-नीला एक रंग रस श्याम सजीला धरती पीली हरी रसीली शिशिर-प्रभात समुज्जल गीला बादल चले गए वे दो दिन दुख के दो दिन सुख के…
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