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मंचीय कविता का नहीं है कोई विजन

हिमाचल का लेखक जगत अपने साहित्यिक परिवेश में जो जोड़ चुका है, उससे आगे निकलती जुस्तजू को समझने की कोशिश। समाज को बुनती इच्छाएं और टूटती सीमाओं के बंधन से मुक्त होती अभिव्यक्ति को समझने की कोशिश। जब शब्द दरगाह के मानिंद नजर आते हैं, तो किताब…

हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन (जन्म : 27 नवंबर, 1907 - मृत्यु : 18 जनवरी, 2003) हिंदी भाषा के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। इनकी प्रसिद्धि इनकी कृति ‘मधुशाला’ के  लिए अधिक है। हरिवंश राय बच्चन के पुत्र अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा जगत के प्रसिद्ध सितारे हैं।…

पाती…

प्रतिबिंब के अंतर्गत 12-11-2017 को प्रकाशित डा. सुशील कुमार फुल्ल का साहित्यिक परिचय और साक्षात्कार पढ़ा। ‘दिव्य हिमाचल’ को इस मायने में साधुवाद कि इस घोर सृजन विरोधी माहौल में भी आपने एक उम्मीद, एक आस, एक सपने को जिंदा रखा है। दहलीज पर एक…

ठोकरें खाकर प्रौढ़ हुआ साहित्य

प्रतिष्ठित साहित्यकार सुरेश सेन निशांत मंडी जिले से संबंध रखते हैं। उनका जन्म 12 अगस्त 1959 को हुआ। पहल, नया ज्ञानोदय, वार्गथ, जनपथ, वसुथा, जनपक्ष, विपाशा आदि प्रकाशनों में उनकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ‘कुछ थे जो कवि नहीं थे’ तथा ‘वे जो…

माहिल की किताब में स्वच्छ समाज की कामना

पुस्तक समीक्षा पुस्तक का नाम : स्वच्छ समाज की कामना लेखक का नाम : प्रेमचंद माहिल मूल्य : निशुल्क कुल पेज : 148 कुल प्रश्न : 117 हमीरपुर के सेवानिवृत्त प्रवक्ता प्रेम चंद माहिल ‘स्वच्छ समाज की कामना’ नामक पुस्तक का दूसरा संस्करण लेकर आए हैं।…

पद्मावती के बहाने इतिहास में दखल

इतिहास के अनुसार रानी पद्मावती ने अपने पति राजा रतन सिंह के बंदी हो जाने के बाद मर्यादा को ध्यान में रखते हुए चित्तौड़ की अनेक वीरांगनाओं के साथ जौहर कर लिया था। प्रदर्शनकारी यह भी कह रहे हैं कि रानियां कभी नृत्य नहीं करती थीं। इस ऐतिहासिक…

जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद (जन्म : 30 जनवरी, 1889, वाराणसी, उत्तर प्रदेश - मृत्यु : 15 नवंबर, 1937) हिंदी नाट्य जगत और कथा साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। भावना-प्रधान कहानी लिखने वालों में जयशंकर प्रसाद अनुपम थे। जिस समय खड़ी बोली और आधुनिक…

हिमाचली भाषा : कब तक दर्जे को तड़पेगी

एक मत के अनुसार जितनी पहाड़ी रियासतें हुआ करती थीं, उतनी ही बोलियां हैं। इस मत के मुताबिक लगभग 30 स्पष्ट बोलियां होनी चाहिए। यह केवल मात्र संभावना ही नहीं, पर हकीकत भी है। बेशक बोलियों में वैविध्य हो, लेकिन फिर भी इनमें समानता और एकता है और…

पहाड़ी भाषा में है विपुल सृजन की जरूरत

हिमाचल का लेखक जगत अपने साहित्यिक परिवेश में जो जोड़ चुका है, उससे आगे निकलती जुस्तजू को समझने की कोशिश। समाज को बुनती इच्छाएं और टूटती सीमाओं के बंधन से मुक्त होती अभिव्यक्ति को समझने की कोशिश। जब शब्द दरगाह के मानिंद नजर आते हैं, तो किताब…

बहुभाषी सृजनकर्मी : परमानंद शर्मा

जन्मदिन विशेष हिमाचल के वयोवृद्ध लेखक परमानंद शर्मा न केवल बहुभाषाविद हैं, अपितु बहुभाषी सृजनकर्मी भी हैं। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, पंजाबी एवं हिमाचली में अनेक ग्रंथों का प्रणयन किया है। 17 नवंबर सन् 1923 को जालंधर के एक गांव…

गजानन माधव मुक्तिबोध

गजानन माधव मुक्तिबोध (जन्म : 13 नवंबर, 1917-मृत्यु : 11 सितंबर, 1964) की प्रसिद्धि प्रगतिशील कवि के रूप में है। हिंदी साहित्य में सर्वाधिक चर्चा के केंद्र में रहने वाले मुक्तिबोध कहानीकार भी थे और समीक्षक भी। उन्हें प्रगतिशील कविता और नई…

साहित्य से सोहबत : जिंदगी के लिए जंग

साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 2017 के लिए हिंदी की लब्धप्रतिष्ठित लेखिका कृष्णा सोबती को प्रदान किया जाएगा। ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने बताया कि वर्ष 2017 के लिए दिया जाने वाला…

मन की पीड़ा है ‘उस छांव तले’ में

पुस्तक समीक्षा किताब का नाम : उस छांव तले कवयित्री : सुशील गौतम पेज संख्या : 112 प्रकाशक : अमृत प्रकाशन, दिल्ली-32 मूल्य : 250 रुपए प्रकाशन वर्ष : 2017 कवयित्री सुशील गौतम का नवीनतम काव्य संग्रह ‘उस छांव तले’ छपकर आया है। यह सुशील का तीसरा…

हिमाचली हिंदी साहित्य को दी उड़ान

डॉ. सुशील कुमार फुल्ल हिमाचल के वरिष्ठ कथाकार, साहित्येतिहासकार व आलोचक हैं। इनका जन्म 15 अगस्त, 1941 को हुआ। इन्होंने हिंदी में पीएचडी तथा अंग्रेजी में एमए तक शिक्षा प्राप्त की। यह वर्षों तक अध्यापन कार्य से जुड़े रहे। कहानी के क्षेत्र में…

संवेदना के प्रहरी कहानीकार : सुशील फुल्ल

लेखक के संदर्भ में किताब हिमाचल का लेखक जगत अपने साहित्यिक परिवेश में जो जोड़ चुका है, उससे आगे निकलती जुस्तजू को समझने की कोशिश। समाज को बुनती इच्छाएं और टूटती सीमाओं के बंधन से मुक्त होती अभिव्यक्ति को समझने की कोशिश। जब शब्द दरगाह के…
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