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चक्रव्यूह भेद कर रास्ते तलाशने होंगे

निजी अनुभव के आधार पर कहना चाहूंगी कि घर, परिवार एवं समाज वर्तमान बदलती परिस्थितियों एवं प्रगतिशील जागरूक सोच के चलते महिलाओं के लेखन के संग-संग चलते प्रोत्साहित करता है। विषय में गहरी घुसपैठ, समय से लड़ने का हौसला, शिल्प रचाव का धैर्य,…

लिखना महिला का संवैधानिक अधिकार है

आसान नहीं है एक महिला का लेखिका बनना। जिंदगी के अंधसागर में गोते खाती, कुछ लिखने के लिए एक सूखी जमीन का टुकड़ा तलाशती है, अपने सुख और आराम के क्षणों को चुराती है, तब कहीं महिला ‘एक लेखिका’ बनती है। एक महिला के पास लिखने के लिए बहुत कुछ है,…

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (जन्म-21 फरवरी, 1896, मेदनीपुर, बंगाल; मृत्यु-15 अक्तूबर, 1961, प्रयाग) हिंदी के छायावादी कवियों में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। निराला जी एक कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और कहानीकार थे। उन्होंने कई…

मूल से जुड़ना स्व से जुड़ना है

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…

मुंशी प्रेम चंद

मुंशी प्रेमचंद (जन्म 31 जुलाई, 1880 - मृत्यु 8 अक्तूबर, 1936) भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंजिलों से गुजरा। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय…

नितांत एकांत पाने की चुनौती

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

आचार्य रामचंद्र शुक्ल (जन्म - 4 अक्तूबर, 1884, मृत्यु - 1941 ई.) बीसवीं शताब्दी के हिंदी के प्रमुख साहित्यकार थे। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों में हिंदी साहित्य का इतिहास प्रमुख है, जिसका हिंदी पाठ्यक्रम को निर्धारित करने में प्रमुख स्थान…

संवेदना के सुजगे कहानीकार : एसआर हरनोट

लेखक के संदर्भ में किताब हिमाचल का लेखक जगत अपने साहित्यिक परिवेश में जो जोड़ चुका है, उससे आगे निकलती जुस्तजू को समझने की कोशिश। समाज को बुनती इच्छाएं और टूटती सीमाओं के बंधन से मुक्त होती अभिव्यक्ति को समझने की कोशिश। जब शब्द दरगाह के…

मोक्ष का उज्ज्वल रास्ता है ‘आत्म मंथन’

पुस्तक समीक्षा पुस्तक का नाम : आत्म मंथन लेखक का नाम : डॉ. आरके गुप्ता मूल्य : 350 रुपए प्रकाशक : पार्वती प्रकाशन, 73-ए, द्वारिकापुरी, इंदौर, मध्य प्रदेश बिलासपुर से संबंधित हिमाचल के प्रसिद्ध लेखक डॉ. आरके गुप्ता इस बार आध्यात्मिक विषयों…

हिंदी का नया ‘कबूतर’: सोशल मीडिया

हिंदी दिवस पर हाल में देशभर में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी कई तरह के आयोजन हुए। इनमें हिंदी के विकास में बेहतरीन योगदान देने वाले वैयक्तिक व सामूहिक प्रयासों का खूब अलंकरण हुआ। साहित्य, मीडिया व सिनेमा ऐसे प्रमुख स्तंभ हैं जो भाषायी विकास…

रामधारी सिंह दिनकर

हिंदी के कवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर,1908 को सिमरिया, मुंगेर (बिहार) में एक सामान्य किसान रवि सिंह तथा उनकी पत्नी मनरूप देवी के पुत्र के रूप में हुआ था। रामधारी सिंह दिनकर एक ओजस्वी व राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कवि के रूप में जाने…

पहाड़ चढ़ती हिंदी भूल गई सृजनशीलता

डॉ. सुशील कुमार फुल्ल पुष्पांजलि, राजपुर (पालमपुर) हिमाचल में भाषा को लेकर निरंतर विभ्रम की स्थिति बनी हुई है। सन् 1975 से हिमाचल की राजकाज की भाषा हिंदी है, परंतु हिंदी के प्रचार-प्रसार में कोई चमत्कार आज तक तो नहीं हुआ, कल की कौन जाने।…

हिंदी के प्रति कम होता अनुराग

यह सच है कि आज हिंदी भारत के अधिकांश भू-भाग में बोली जाती है, यह भी सच है कि इसे राजकीय भाषा के रूप में मान्यता मिली हुई है, इसकी पढ़ाई भी बड़े पैमाने पर हो रही है तथा इसमें काम भी अब पहले की अपेक्षा बड़े स्तर पर हो रहा है। इसके बावजूद एक…

स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक हिंदी का डंका

प्रदेश में हिंदी विषय एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। इस विषय के महत्त्व का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा में हिंदी को शामिल किया गया है।…

हिमाचल में संगोष्ठियों तक सिमटी हिंदी

हिमाचल में हिंदी का अस्तित्व संगोष्ठियों और कवि सम्मेलनों तक ही सिमटता जा रहा है। यूं तो हिमाचल के हर सरकारी दफ्तर में हिंदी में काम करने पर जोर दिया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर निर्देश नियमों को धत्ता बताते हुए अंग्रेजी में ही…
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