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मूल्य सार्वभौमिक होते हैं

हिमाचल की महिला लेखिकाओं के साहित्यिक परिचय व उनकी वैचारिक अभिव्यक्ति को मंच देकर ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया समूह ने अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य किया है, जिसके लिए रचनाकार महिलाओं ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की है। संस्थान के प्रति…

महिला लेखन : अंतर्द्वंद्व जारी है…

परिचय नाम : अदिति गुलेरी, धर्मशाला विभिन्न प्रांतीय व राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। आकाशवाणी जालंधर, धर्मशाला तथा गुंजन से कविताएं प्रसारित। हि. प्र. साहित्य अकादमी तथा दिल्ली साहित्य अकादमी के आयोजनों में भागीदारी प्रकाशन…

बनी रहने दो अलग पहचान

परिचय * नाम : प्रोमिला भारद्वाज, बिलासपुर * विधा : कविता गीत और गजल हिंदी में तथा अंग्रेजी में कविताएं अभिरुचि : साहित्यिक व सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी/दूरदर्शन के साधना चैनल से काव्य पाठ का प्रसारण प्रकाशन : काव्य संग्रह ‘स्वर…

महिलाओं का दखल सार्वजनिक क्षेत्र में बढ़ा है

परिचय * नाम : मीनाक्षी एफ पाल, शिमला * कृतियां  : शार्ट स्टोरीज आफ हिमाचल प्रदेश (अनुवाद), सीढ़ीदार खेत की चैली (द्विभाषीय कविताएं), हिंदी कहानियों तथा कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद, विविध विषयों पर अकादमिक पुस्तकें, विविध संगोष्ठियों व…

लिखा हुआ उत्पीड़क को कटघरे में खड़ा करे

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…

दबाव झेले बगैर रचना संभव नहीं है

एक रचनाकार के रूप में वर्गीय दृष्टि और उससे उपजे सवाल रचना प्रक्रिया के मूल में रहते हैं और वहीं से बनती है एक राह जो अपना माध्यम खुद खोज लेती है। रचनाकार जब अपनी दृष्टि से उन परतों को देख पाने में समर्थ होता है तो परतों को उघाड़ने का दबाव…

सामान्य मानवीय इकाई की स्थिति तक पहुंचना

एक औरत को अपना अस्तित्व कायम रख पाने के लिए बहुत ही संघर्ष करना पड़ता है। दुनियादारी और घर-परिवार की बेडि़यों में जकड़ी हुई औरत कह पाने और कर पाने के लिए प्रयासरत रहती है। उसके प्रयास सफलता पाने से पहले किन पीड़ाओं को सहन करते हैं, यह तो बस…

स्त्री के लिए मुक्ति आसान नहीं

‘औरत होना ही क्या कम था/ कि वह रचने लगी कविता’-कवि अनामिका की कविता के बहुत बरस पहले पढ़े ये शब्द मन में चुभ जाते हैं अब भी अकसर! तो, एक तो औरत होना, ऊपर से लिखना भी, यह दोहरा अपराध जैसे अब भी समाज की दृष्टि में अखरता है शायद! जबकि यह भी सच…

प्रगतिवादी नागार्जुन

नागार्जुन (जन्म 30 जून, 1911; मृत्यु 5 नवंबर, 1998) प्रगतिवादी विचारधारा के लेखक और कवि थे। नागार्जुन ने 1945 ईस्वी के आसपास साहित्य सेवा के क्षेत्र में कदम रखा। शून्यवाद के रूप में नागार्जुन का नाम विशेष उल्लेखनीय है। नागार्जुन का असली नाम…

कार्य और कविता में सामंजस्य प्रबंधन

परिचय * नाम : संगीता सारस्वत/संगीता श्री * प्रकाशित कृतियां : ढलानों पर खुशबू (काव्य संग्रह - 1983), सैलाब (गज़ल संग्रह), सवाल (गज़ल संग्रह), समय व संवाद गद्य लेखन। सुख में सुमिरन (गद्य) * सहभागिता : साहित्यकार कलाकार विवरणिका (1987), मानव…

साहिर लुधियानवी

साहिर लुधियानवी (जन्म 8 मार्च, 1921 लुधियाना - मृत्यु 25 अक्तूबर, 1980 मुंबई) भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार और कवि थे। साहिर ने जब लिखना शुरू किया तब इकबाल, फैज, फिराक आदि शायर अपनी बुलंदी पर थे, पर उन्होंने अपना जो विशेष लहजा और रुख…

एक विशेष मानसिक गढ़न की जरूरत

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…

लेखकीय व्यक्तित्व में आंतरिक द्वंद्व तो होगा ही

परिचय * नाम : तारा नेगी * जन्म : गांव पुजाली, बंजार, कुल्लू * रचनाएं : विभिन्न राज्य व राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित * प्रकाशन : दो कहानी संग्रह ‘दायरे’ एवं ‘अपने-अपने धरातल’ हिंदी में एवं ‘थोड़ा जिहा सुख’ कुल्वी,…

सांझा करते हैं खुद को किताबों के पन्नों से

परिचय * नाम : प्रियंवदा * जन्म : 4 अक्तूबर, 1977, जिला हमीरपुर के ढांगू ग्राम में, विभिन्न पत्रिकाओं में कविता, कहानी व आलेख प्रकाशित हुए हैं, 2007 में दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लिया * समीक्षा : कहानी संग्रहों तथा कहानियों की…

अभिव्यक्ति के लिए कीमत चुकानी पड़ती है

लिखना, अक्षर-अक्षर जुगनू बटोरना और सूरज के समकक्ष खड़े होने का हौसला पा लेना, इस हौसले की जरूरत औरत को इसलिए ज्यादा है क्योंकि उसे निरंतर सभ्यता, संस्कृति, समाज और घर-परिवार के मनोनीत खांचों में समाने की चेष्टा करनी होती है। कुम्हार के चाक…
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