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हिमाचली मीडिया ने बढ़ाए हिंदी के पाठक

हिमाचल प्रदेश हिंदी भाषी राज्य है। यहां के निवासी साधारणतः हिंदी में ही संवाद करते हैं। इससे यहां के हिंदी मीडिया को हिमाचल में फलने-फूलने का अवसर मिला है। हिंदी की लोकप्रियता भी बढ़ी है। यह आम बोल-चाल की भाषा बन गई है। एक समय था जब प्रदेश…

विश्व हिंदी दिवस

हिमाचल हिंदी भाषी राज्य है। हिंदी को अपनाकर यह प्रदेश उसे क्या दे पाया है और इसे क्या हासिल हुआ, लेखन की कसौटी पर हिंदी कहां खड़ी है, प्रदेश में हिंदी का शैक्षणिक स्वरूप क्या है, हिमाचली मीडिया में हिंदी की अवस्थिति क्या है और हिंदी के…

जिंदा हैं धर्मवीर भारती… आज भी, कल भी

डॉ. धर्मवीर भारती आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। वह साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी रहे। डॉ. धर्मवीर भारती को 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनका उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’…

औपन्यासिक आस्वाद की मार्मिक कहानियां

पुस्तक समीक्षा कहानी संग्रह : काश! पंडोरी न होती (2016) पृष्ठ संख्या : 112 मूल्य : रुपए 250/- लेखिका : मृदुला श्रीवास्तव प्रकाशक : अंतिका प्रकाशन, सी-56/यूजीएफ-ढ्ढङ्क, शालीमार गार्डन, एक्सटेंशन-ढ्ढढ्ढ, गाजियाबाद-201005 (उत्तर प्रदेश)…

कविता

कोई सत्ता नहीं एक सुबह रोज दस्तक देती है एक सूरज अकसर आवाज देता रहता है साथ चलने का आग्रह करता रहता है उन बस्तियों, मोहल्लों, गांवों तक जहां प्रकाश की किरणें कभी सीधी रेखा में नहीं चलती रस्मों-रिवाजों की घिसी-पिटी चक्कियां बारीक नहीं खासा…

दोहे

राम नाम की सेल में... दुःशासन और द्रौपदी, मिलकर खेलें खेल। चीरहरण के खेल में, कान्हा भेजे जेल।। बतरस कभी ना घोलिए, अवसर बीतो जाए। ऐसी भाषा मौन की, हिय की कथा सुनाए।। शून्य में महाशून्य है, काल में महाकाल। सांची उसकी जोत है, सच्चा पुरख…

भारतेंदु हरिश्चंद्र

भारतेंदु हरिश्चंद्र (जन्म 9 सितंबर 1850 - मृत्यु 6 जनवरी 1885) आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं। भारतेंदु हिंदी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे। जिस समय भारतेंदु का अविर्भाव हुआ, देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। अंग्रेजी…

कविता

लम्हें कितने नाजुक होते हैं लम्हें बीत जाते हैं अतीत हो जाते हैं, मगर जुड़ी रहती हैं खट्टी-मिट्ठी यादें हर लम्हा बेखुदी लम्हें हसीन होते हैं जो याद आने पर थपथपाते हैं प्यार से मेरी जागती रात को भी देते हैं जो सहारा प्यारा-प्यारा मेरे एकांत…

डॉ. धर्मवीर भारती

डॉ. धर्मवीर भारती (जन्म - 25 दिसंबर, 1926, मृत्यु - 4 सितंबर, 1997) आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। वह साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ के प्रधान संपादक भी रहे। डॉ. धर्मवीर भारती को 1972 में पद्मश्री से…

साहित्य में आज भी जीवित हैं फिराक गोरखपुरी

फिराक गोरखपुरी (वास्तविक नाम रघुपति सहाय, जन्म 28 अगस्त, 1896, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश; मृत्यु 3 मार्च, 1982, दिल्ली) भारत के प्रसिद्धि प्राप्त और उर्दू के माने हुए शायर थे। फिराक उनका तख़ल्लुस था। उन्हें उर्दू कविता को बोलियों से जोड़ कर…

सैरागैम के स्थापना दिवस पर कवियों की महफिल

सैरागैम कंपनी के सौजन्य से कांगड़ा शहर में एक बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन सैरागैम कंपनी का कांगड़ा में एक वर्ष पूरा होने पर किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रशासनिक अधिकारी प्रभात शर्मा ने की और मुख्यातिथि के रूप में डा. गौतम व्यथित तथा…

राह देखा करेगा सदियों तक जमाना

वह हमारे कलमी दोस्त थे, पिछल एक साल से बीमार चल रहे थे। आखिर 11 अगस्त को अलविदा कह गए। दयाराम सकलानी पत्रकार स्थित सरकाघाट तहसील मुख्यालय से मेरा गूढ़ परिचय सितंबर, 2008 में ही हुआ था, जबकि वह ‘दिव्य हिमाचल’ के जन्म से ही इसके साथ बतौर…

अनुभव के रंगों में ढली हैं नागपाल की कविताएं

अपने तीसरे काव्य संग्रह ‘उसकी-मेरी कविताएं’ में अरुण कुमार नागपाल ने अपने निजी अनुभवों को भावों में ढाल कर उन सवालों का जवाब देने का प्रयास किया है जो ज़िंदगी को ़खूबसूरत बनाने के लिए आवश्यक हैं। अपने आसपास की घटनाओं को नागपाल ने सघनता के…

डा. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

डॉ. हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (जन्म 19 अगस्त, 1907 - मृत्यु 19 मई, 1979) हिंदी के शीर्षस्थ साहित्यकारों में से हैं। वह उच्च कोटि के निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, चिंतक तथा शोधकर्ता हैं। साहित्य के इन सभी क्षेत्रों में द्विवेदी जी अपनी प्रतिभा…

वेदों में राष्ट्र की कल्याण कामना

वैदिक ग्रंथों में भारतीय राष्ट्र की अवधारणा स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है और वेदों में भारत राष्ट्र की महिमागान के साथ ही राष्ट्र के कल्याण की कामना की गई है। वैदिक ग्रंथों के अध्ययन से इस सत्य का सत्यापन होता है कि राष्ट्र की अवधारणा भी वेदों,…
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