Divya Himachal Logo Jan 21st, 2017

प्रतिबिम्ब


सौंदर्य बोध

अरे!

आपके

दांत

बड़े सुंदर

साफ हैं

बनावटी हैं

नकली हैं

दिखावटी हैं

हां,

तभी तो

आप

अच्छे दिख रहे हैं।

लंगड़ी घोड़ी

अपनी

शक्ल

अपनी

अक्ल

नाप नहीं सकता कोई

अपना

प्रतिबिंब

झांक कर

झूठमूठ

स्वयं को

अच्छा

आंककर

लंगड़ी घोड़ी

हांक नहीं सकता कोई।

— कश्मीर सिंह, रजेरा, चंबा हि.प्र.)

November 20th, 2016

 
 

ज्योतिबा फुले

ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 ई. को पुणे में हुआ था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग ‘फुले’ के नाम से जाने जाते थे। ज्योतिबा ने […] विस्तृत....

November 20th, 2016

 

हिमाचल में हिंदी का समकालीन संघर्ष

1966 में पंजाब के पहाड़ी भागों के हिमाचल में विलय से, पंजाबी भाषा का हिमाचल में प्रादुर्भाव हुआ, लेकिन हिमाचल की स्थानीय बोलियों पर या हिंदी पर कोई अधिक दुष्प्रभाव नहीं पड़ा। हिंदी और पंजाबी एक-दूसरे को सहयोग कर समृद्ध होती रहीं… किसी भी समाज […] विस्तृत....

November 13th, 2016

 

दस्तावेजी दृष्टि

पुस्तक का नाम : दृष्टि (पारिवारिक लघुकथा विशेषांक) संपादक  :  अशोक जैन वार्षिक सहयोग राशि :  200रुपए संपादकीय कार्यालय :  दृष्टि 908, सेक्टर-7 एक्सटेंशन अर्बन एस्टेट, गुड़गांव ‘दृष्टि’ हिंदी-साहित्य की ‘लघुकथा’ विधा को समर्पित एक मासिक पत्रिका है, जिसे इसके संपादक अशोक जैन ने भविष्य […] विस्तृत....

November 13th, 2016

 

महात्मा हंसराज

महात्मा हंसराज समाज सुधारक और शिक्षाविद थे। 1 जून, 1886 को महात्मा हंसराज ‘दयानंद एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल’ लाहौर के अवैतनिक प्रधानाध्यापक बने। उस समय उनकी उम्र मात्र 22 वर्ष थी। उनके महत्त्वपूर्ण योगदान और प्रयासों के फलस्वरूप ही देशभर में डीएवी के नाम से 750 […] विस्तृत....

November 13th, 2016

 

कविता

भेदी नैया खाए है हिचकोले, घोर तिमिर में यह डोले। भटकी रास्ता ऊंची लहरें, भेदी, भेद नहीं क्यूं खोले? चप्पू चलते आगे बढ़ती, नीचे उतरे ऊपर चढ़ती, चलती- चलती कभी हंसाती, कभी रुलाती पर, भेदी भेद नहीं है खोले। … मैंने कितने पतझड़ देखे, विधि […] विस्तृत....

November 13th, 2016

 

नागार्जुन

30 जून सन् 1911 को जन्मे वैद्यनाथ मिश्र ने अपनी फकीरी और बेबाकी से अपनी अनोखी पहचान बनाई। कबीर की पीढ़ी का यह महान कवि नागार्जुन के नाम से जाना गया। ‘यात्री’ आपका उपनाम था। बाबा नागार्जुन हिंदी, मैथिली, संस्कृत तथा बांग्ला में कविताएं लिखते […] विस्तृत....

November 6th, 2016

 

राजनीति में कुछ अच्छे काम कर सका क्योंकि मेरे भीतर लेखक जीवित रहा…

शांता कुमार की राजनीति साहित्य के मर्म से परिचित दिखती है और साहित्य, राजनीति की दुरुह पगडंडियों से। उनकी चर्चित किताब ‘हिमालय पर लाल छाया’ के परिवर्धित संस्करण का हाल में विमोचन हुआ है। इस अवसर पर हमने उनकी सक्रियता के दोनों ध्रुवों से जुडे़ […] विस्तृत....

November 6th, 2016

 

राजनीति की ‘लाल छाया’ में शब्दों की हरियाली

चीन के साथ युद्ध में कांगड़ा जनपद के सर्वाधिक सैनिक शहीद हुए। कांगड़ा का शायद ही कोई ऐसा गांव अथवा परिवार होगा, जहां के वीर सैनिकों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति न दी हो। उन दिनों सेना की ओर से […] विस्तृत....

October 30th, 2016

 

अंग्रेजी और चोगा, दोनों हटें

हाल-फिलहाल दो खबरें पढ़कर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई। एक तो भोपाल में पढ़ी और दूसरी दिल्ली में। दिल्ली की खबर यह है कि  ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ ने मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को अंग्रेजी के बारे में कई साहसिक सुझाव दिए। इस न्यास के […] विस्तृत....

October 30th, 2016

 
Page 5 of 153« First...34567...102030...Last »

पोल

क्या भाजपा व कांग्रेस के युवा नेताओं को प्रदेश का नेतृत्व करना चाहिए?

View Results

Loading ... Loading ...
 
Lingual Support by India Fascinates