Divya Himachal Logo Mar 25th, 2017

विचार


उल्टा चोर कोतवाल को…!

कांग्रेस अब टुर्र-टुर्र क्यों कर रही है? कथित अन्याय पर अब टसुए क्यों बहा रही है? दलबदल या खरीद-फरोख्त की तो कांग्रेस ही जननी है, तो राहुल गांधी भाजपा पर आरोप क्यों लगा रहे हैं? बेशक गोवा में 17 और मणिपुर में 28 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी। सर्वोच्च न्यायालय में कांग्रेसी वकील से यही सवाल किए गए कि पार्टी ने राज्यपाल के समक्ष अपने बहुमत का दावा पेश क्यों नहीं किया? बहुमत के हलफनामे सुप्रीम कोर्ट में दिए जाएंगे या राज्यपाल को? सरकार को शपथ राज्यपाल दिलाएंगे या सुप्रीम कोर्ट? कांग्रेस ने अदालत में भी जादुई आंकड़ा पेश नहीं किया है। इन फटकारों के साथ कांग्रेस की रोड़ानुमा राजनीति को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। नतीजतन गोवा में मनोहर पर्रिकर ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की और बुधवार 15 मार्च को मणिपुर में भी भाजपा के मुख्यमंत्री एन.बीरेन और उनकी कैबिनेट ने शपथ ले ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रलाप कर रहे हैं। सत्ता द्वारा पैसा बहाने यानी विधायकों और दलों की खरीद-फरोख्त के आरोप चस्पां कर रहे हैं। बेचारे युवराज कांग्रेस के अतीत का इतिहास क्या जानें? यदि पढ़ने-लिखने में यकीन होता, तो उनके नेतृत्व में कांग्रेस 24 चुनाव क्यों हारती? राहुल जी, आपको 1982 का प्रसंग बता रहे हैं। हरियाणा चुनाव में देवीलाल को 36 और भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस को 32 सीटें मिली थीं। बहुमत का आंकड़ा 46 सीट का है। केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी और दलबदल निरोधक कानून की भी व्यवस्था नहीं थी। तत्कालीन राज्यपाल तपासे ने दूसरे स्थान पर रही कांग्रेस के नेता भजनलाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी। भजनलाल देवीलाल की जनता पार्टी सरकार को तोड़-फोड़ कर कांग्रेस में आए थे, लिहाजा वह ताउम्र ‘आयाराम-गयाराम’ के पर्याय बने रहे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का ही एक प्रसंग याद दिलाता हूं। 1993 के चुनाव में 177 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी। उसके बाद सपा को 109 और बसपा को 67 सीटें मिली थीं। लेकिन सरकार बनाने का न्योता सपा-बसपा गठबंधन के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह को मिला। इसी तरह 1999 में महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन की 125 सीटें सर्वाधिक थीं। कांग्रेस की 75 और एनसीपी की 58 सीटें थीं। दोनों में कोई पूर्व गठबंधन नहीं था, लेकिन चुनाव बाद गठबंधन करके कांग्रेस-एनसीपी ने सरकार बनाई। भगवा गठबंधन को सरकार के लिए पूछा तक नहीं गया था। कर्नाटक में 2004 के चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक 79 सीटें हासिल हुईं। कांग्रेस को 65 और जनता दल-एस को 58 सीटें मिलीं। दोनों दलों में कोई पूर्व गठबंधन नहीं था, फिर भी राज्यपाल ने उनके मुख्यमंत्री को शपथ दिला दी। 2005 में झारखंड में 30 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी, लेकिन जेएमएम की 17 और अन्य कई दलों के समर्थन का दावा करने वाले शिबू सोरेन को सरकार का न्योता मिला। यही नहीं, कश्मीर में जब कांग्रेस और पीडीपी की सरकार बनी थी, तब नेशनल कान्फें्रस के सबसे ज्यादा 28 विधायक जीते थे। कांग्रेस के 21 और पीडीपी के 15 विधायक ही जीत कर आए थे। ऐसे कई और उदाहरण होंगे, जहां राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी को नकार कर अन्य पार्टी या गठबंधन की सरकार बनवा दी। ऐसे तमाम उदाहरण जानने के बाद राहुल गांधी जवाब देंगे कि देश में लोकतंत्र की हत्या कब और किसने की? राज्यपाल ने केंद्रीय एजेंट के तौर पर कब-कब काम किया? राहुल जी, जरा अपने बुजुर्ग नेताओं से पूछ लें कि कांग्रेस ने कितने दलों को तोड़ा है, दलबदल कराया है, सरकारें बनाई और बचाई हैं और इन करतूतों में कितना पैसा बांटा गया है? यदि गोवा और मणिपुर में कुछ असंवैधानिक होता, तो उच्चतम न्यायालय शपथ ग्रहण पर ही रोक लगा सकता था। गौरतलब यह है कि गोवा में बहुमत साबित करने का प्रस्ताव भी राज्यपाल के वकील हरीश साल्वे ने रखा था, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार किया और राज्यपाल तक अपना फैसला पहुंचाया। दरअसल संविधान के अनुच्छेद-164 में राज्यपाल को मुख्यमंत्री और कैबिनेट नियुक्त करने के संदर्भ में विशेषाधिकार दिया गया है। यदि जनादेश स्पष्ट है कि किसी दल या गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ है, तो राज्यपाल उसके नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे। यदि जनादेश खंडित या त्रिशंकु है, तो फिर सबसे बड़ी पार्टी का आधार बेमानी है। दरअसल राज्यपाल को संतुष्ट होना है कि बहुमत किसके पक्ष में है। कांग्रेस गोवा और मणिपुर में यह मौका गंवा बैठी। उसके विधायक दल का नेता भी नहीं चुना जा सका और वह राज्यपाल को अपने पक्ष के आंकड़े भी नहीं बता पाई। भाजपा की रणनीति यहां भी रंग लाई, नतीजतन उसके दो और मुख्यमंत्री बने। अब कांग्रेस लोकतंत्र की आड़ में दुहत्थड़ मार रही है, तो उसकी लड़ाई हारी हुई है। बेहतर यह होगा कि सबसे बड़ी पार्टी को संवैधानिक बाध्यता से जोड़ दिया जाए। कांग्रेस संसद में ऐसा बिल पारित कराने के मद्देनजर मोदी सरकार से बात करे। खाली-पीली आरोपों से कांग्रेस का उद्धार नहीं होने वाला है।

March 16th, 2017

 
 

मिट्टी होती किसान की मेहनत

मिट्टी होती किसान की मेहनत( बचन सिंह घटवाल  लेखक, मस्सल, कांगड़ा से हैं ) पशुओं की उजाड़ और नुकसान करने की प्रवृत्ति का दंश झेलता किसान कृषि के दायरे को सीमित करने के लिए विवश हो गया है। खेतों में मेहनत के परिणामस्वरूप अगर कृषक को अंततः नुकसान ही […] विस्तृत....

March 16th, 2017

 

विजय महोत्सव

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) फिर केसरिया रंग का, ऐसा चढ़ा खुमार, विजय महोत्सव बन गया, होली का त्योहार। होली खेली इस कद्र, यूपी में लठमार, बुआ, बबुआ गिर पड़े, हाथ हुआ बेकार। धर्मयुद्ध था नीति का, जीत लिया मैदान, डाकू छिपते फिर […] विस्तृत....

March 16th, 2017

 

हार पर आत्ममंथन हो

( डा. शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल, तेलंगाना ) हालिया चुनावी नतीजों के बाद मायावती ने अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ दिया। मायावती के बाद अब अखिलेश ने भी उन्हीं के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया। इसके साथ ही कई अन्य बड़े […] विस्तृत....

March 16th, 2017

 

निजी स्कूलों की मनमानी

( डा. ओपी शर्मा, शिमला ) हिमाचल प्रदेश में हजारों निजी स्कूल सेवाएं दे रहे हैं। इन संस्थानों पर सरकार का नियंत्रण न के बराबर है। स्कूल प्रबंधक बच्चों से मनमाने ढंग से उगाही कर रहे हैं। प्रायः निजी स्कूल अपने स्तर पर आदेश जारी […] विस्तृत....

March 16th, 2017

 

ट्रंप के बहाने खुद को मजबूत कीजिए

ट्रंप के बहाने खुद को मजबूत कीजिएडा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) हमारे देश में अमरीका, चीन तथा अन्य देशों में बने सस्ते माल का भारी मात्रा में आयात हो रहा है। चीन के सस्ते माल के सामने हमारे तमाम कारखानों ने घुटने टेक दिए हैं। […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 

बजट को धरातल पर उतारने की परीक्षा

बजट को धरातल पर उतारने की परीक्षा( कर्म सिंह ठाकुर लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं ) एक बजट के मार्फत प्रदेश की समूची आकांक्षाओं को संबोधित नहीं किया जा सकता, अतः हर कदम पर लीक से हटकर नएपन की अपेक्षा रहेगी। यह भी कि प्रदेश जिस तरह कर्ज के मर्ज से […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 

चुनावी सूचकांक में हिमाचल

हालिया चुनावी नतीजों ने राजनीति को परिवर्तन की जिस दिशा की ओर मोड़ दिया है, वहां हिमाचल अब भाजपा की राडार से दूर नहीं। दूसरी ओर पड़ोसी पंजाब की पायल पहनकर कांग्रेस भी अपने सफल कदमों की आहट सुनाना चाहेगी। यह दीगर है कि राष्ट्रीय […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 

मोदी का ‘मिशन 2022’

चुनावी महाजीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मिशन 2022’ तय किया है और यह भी साफ किया है कि वह चुनाव केंद्रित काम नहीं करते। मोदी सरकार का मौजूदा कार्यकाल मई, 2019 तक का है। प्रधानमंत्री ने जो लक्ष्य तय किए थे, उनमें 2022 तक […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 

इधर बजट हुआ उधर ऋण लिया

( सुरेश कुमार, योल, कांगड़ा ) चार घंटे 26 मिनट बजट सुनने की खुशी अभी काफूर भी नहीं हुई थी कि अगले दिन ही समाचार पढ़ने को मिला कि प्रदेश सरकार 700 करोड़ रुपए का ऋण लेगी। यह तो होना ही है, भला प्रदेश सरकार […] विस्तृत....

March 15th, 2017

 
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