Divya Himachal Logo Aug 24th, 2017

विचार


नाहक गर्म होता चीन

(स्वास्तिक ठाकुर, पांगी, चंबा )

चीन का बुनियादी चरित्र ही ऐसा रहा है कि पहले वह अपने पड़ोसी देशों की जमीन पर कब्जे का दावा करता है और उसके बाद उस दावे को सच साबित करने के लिए धमकियों की भाषा पर ही उतर आता है। डोकलाम क्षेत्र में पिछले डेढ़ माह से जो तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, वह उसी फितरत की बानगी है। भूटान ने भी खुले तौर पर कहा है कि चीन उसके क्षेत्र में नाजायज कब्जे को लेकर फालतू की धौंस दिखा रहा है। उसके बावजूद चीन के रवैये में कोई बदलाव आता नजर नहीं आ रहा। भारत स्थित चीनी राजदूत लू झाओहुई ने सिक्किम सेक्टर में चल रहे गतिरोध को लेकर मंगलवार को जो बयान दिया, वह आग में घी डालने वाला है। उन्होंने कहा है, ‘गेंद भारत के पाले में है और भारत को यह तय करना है कि किन विकल्पों को अपना कर गतिरोध खत्म किया जा सकता है।’ इस बयान को एक तरह से चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले चीनी मीडिया और वहां के थिंक टैंक ने कहा था कि अगर उचित तरीके से नहीं निपटा गया, तो युद्ध छिड़ सकता है। क्या चीन अब अपने इस विवाद को युद्ध के जरिए ही सुलझाना चाहता है? यदि चीन यह चाहता है कि उसे दुनिया में एक बड़ी ताकत के रूप में आदर के साथ देखा जाए, तो उसे अपनी आक्रामक विदेश नीति का परित्याग करना होगा। वह जिस तरह छोटे-छोटे मसलों पर जरूरत से ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है और कई बार संबंधित देश को धमकाने या फिर उससे संबंध तोड़ने पर आमादा हो जाता है, उससे वह एक अडि़यल, गैर जिम्मेदार और मनमानी करने वाले देश के रूप में ही उभर रहा है। अगर उसे युद्ध से ही यह मसला सुलझाना है, तो फिर अपनी यह ख्वाहिश पूरी करने करने की कोशिश भी कर ले। लेकिन ख्याल रहे कि इस मर्तबा उसे अपने प्रतिद्वंद्वी की ताकत को कमतर आंकने की भूल करने से बचना चाहिए।

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August 12th, 2017

 
 

नीतीश की सोच का खोट

(सूबेदार मेजर (से.नि.) केसी शर्मा, गगल ) दलबदल भारतीय राजनीति में आजकल जोरों पर है। अपने सुरक्षित सियासी करियर की खातिर कई बड़े व सिद्धांतवादी नेता भी दूसरे दल में जाने को आतुर दिखते हैं। जोड़-तोड़ की राजनीति ने इतना भय पैदा कर दिया है […] विस्तृत....

August 12th, 2017

 

समाज का राजनीतिक बर्ताव

क्या वाकई हिमाचली समाज केवल सियासी बैसाखियों पर ही चलेगा, यह सवाल हर चुनाव से पहले और नई सरकारों के गठन पर पूछा जाना चाहिए। अब सामाजिक आंदोलनों का राजनीतिक महत्त्व बढ़ने लगा है, जबकि पहले सियासत ने ही समाज को इन रास्तों पर अपनी […] विस्तृत....

August 12th, 2017

 

भारतीयों को नई सामाजिक संस्कृति की दरकार

भारतीयों को नई सामाजिक संस्कृति की दरकारप्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हम बरसों तक गुलाम रहे और विदेशी शासकों का शोषण सहन करते रहे, अब आम लोगों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। प्राचीन हिंदू संस्कृति मूल्य आधारित थी, लेकिन सैकड़ों बरसों की विदेशी […] विस्तृत....

August 11th, 2017

 

संकल्प करेंगे और करके रहेंगे

भारत छोड़ो आंदोलन की याद में संसद में विशेष चर्चा का निष्कर्ष यह रहा कि वह पीएम मोदी के संकल्प और सोनिया गांधी की नफरतवादी भयातुर सियासत में बंट कर रह गया। राज्यसभा में तृणमूल कांगे्रस के एक सांसद ने भाजपा भारत छोड़ो के नारे […] विस्तृत....

August 11th, 2017

 

प्रशिक्षकों की व्यवस्था करे कालेज प्रशासन

प्रशिक्षकों की व्यवस्था करे कालेज प्रशासनभूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों तथा प्राध्यापकों से आशा की जाती है कि प्रदेश में खेलों को सही वातावरण देने के लिए अपने-अपने महाविद्यालय से पहल करें। खेल की सुविधा के अनुसार उसके प्रशिक्षक को अपने यहां सम्मानपूर्वक बुलाकर […] विस्तृत....

August 11th, 2017

 

ताक पर यातायात नियम

(दीक्षा शर्मा, धर्मशाला, कांगड़ा ) श्रावण माह के मेलों के दौरान पहाड़ी राज्य हिमाचल में दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। इस दौरान बाहर से आने वाले वाहनों द्वारा जमकर यातायात नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। कहीं बाइक […] विस्तृत....

August 11th, 2017

 

हर मुद्दे पर राजनीति न हो

(ठाकुर दास शर्मा, मोती बाजार, मंडी ) प्रदेश में घूमने वाले कुछ दरिंदे इतने निरंकुश हो चुके हैं कि उन्हें कानून व्यवस्था का भी कोई डर नहीं रह गया है। प्रदेश में होने वाले दुष्कर्म या छेड़छाड़ के मामले इसी हकीकत को बयां करते हैं। […] विस्तृत....

August 11th, 2017

 

शिक्षा में जरूरी है परीक्षा

(अनिल कुमार, कोटली, मंडी ) विद्यार्थी की योग्यता को मापने के लिए परीक्षा एक महत्त्वपूर्ण साधन है। परीक्षा द्वारा संबंधित विषय में विद्यार्थिओं की गुणवत्ता का काफी हद तक सही आकलन किया जा सकता है। परीक्षाओं की उपयोगिता और अनिवार्यता को लेकर देश में कई […] विस्तृत....

August 11th, 2017

 

दरकते पहाड़ में समाता विकास

उन्हीं रास्तों पर जीवन का विराम मिल रहा, जिन्हें चौड़ा किया मंजिल पाने के लिए। हिमाचल में जीने की गति और पाने की तमन्ना का हिसाब लेती बरसात और दूसरी ओर आर्थिक बेडि़यां खोलती मेहनत का रिसाव। परवाणू से शिमला को फोरलेन बनाने की जरूरत […] विस्तृत....

August 11th, 2017

 
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