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विचार


शहर या कंकरीट के जंगल

हिमाचल के शहर तेजी से कंकरीट के जंगल में तबदील हो रहे हैं। शहरों के विस्तारीकरण को जगह की कमी खलने लगी है। राजधानी शिमला में ही विकास का ऐसा बदरंग रूप आया है, जो आधुनिक शहरों से हिमाचल को कोसों दूर होने का एहसास दिलाता है। प्रदेश में सबसे अधिक अवैध निर्माण डलहौजी, धर्मशाला, शिमला, सोलन तथा मंडी में हो रहा है। ठियोग, वाकनाघाट, डलहौजी प्लानिंग एरिया तथा रिकांगपिओ, केलांग, काजा, पांगी, भरमौर, चमैरा, पंडोह, हाटकोटी, खजियार, सराहन, उदयपुर, मणिकर्ण, चायल, ताबो, रोहतांग, सोलंग, चामुंडा, नैरचौक, जाबली, बड़ोग, कंडाघाट, बीर-बिलिंग, बाबा-बालकनाथ, पौंग डैम, त्रिलोकपुर, गरली-परागपुर, नग्गर, हेरात स्पेशल एरिया में बिना प्लानिंग के ही भवन बन रहे हैं। यहां बगैर डिवेलपमेंट प्लान के ही निर्माण हो रहा है। इससे रातोंरात अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।

January 2nd, 2011

 
 

100 करोड़ का घाटा झेल रहे निकाय

यूं तो हिमाचल तेजी से हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है, लेकिन शहरी ढांचे की माली हालत के कारण नगर निकाय कंगाल हो रहे हैं। सभी नगर निकायों का घाटा जोड़ दिया जाएं, तो यह करीब 100 करोड़ रुपए बनता है। हिमाचल की एकमात्र […] विस्तृत....

January 2nd, 2011

 

कितनी तरक्की, टीसीपी बेखबर

हिमाचल में 56 शहर चिन्हित किए जा चुके हैं। बावजूद इसके सबसे व्यवस्थित, कम व्यवस्थित शहर कौन से हैं, इसका उल्लेख टीसीपी समेत शहरी विकास विभाग के पास नहीं है। रैंकिंग की बात तो दूर रही। साठ के दशक में बना बिलासपुर चंडीगढ़ की तर्ज […] विस्तृत....

January 2nd, 2011

 

कैसे होते रहे इतने बड़े घोटाले

(खुशवंत सिंह, लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं (रमेश कोटियान ने उडूपी दक्षिण केरल से भेजा)-   उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि वह बताएं कि अपने मंत्री ए. राजा द्वारा इतना भारी नुकसान पहुंचाने से पहले उनके द्वारा कुछ न किए जाने के क्या कारण […] विस्तृत....

January 1st, 2011

 

खुशनुमा सुबह

(पदम चंद वर्मा, सपरून, सोलन)- इस सुबह को, आओ, खुशनुमा बनाएं हम। नई हंसी फिर इस जिस्म में जगाएं हम॥ जो बीता, वो भी एक हिस्सा था, जिंदगी का। नए कलेवर में, आओ, नया साल मनाएं हम॥ आशाएं खत्म नहीं होतीं, चाहतें धुंधली नहीं होतीं। […] विस्तृत....

January 1st, 2011

 

पार्किंग की बढ़ती समस्या

(प्रदीप सिंह, दौलतपुर चौक, ऊना)- आज पूरे देश में जैसे हर स्थान पर पार्किंग की समस्या है, हमारा हिमाचल प्रदेश भी इस समस्या से अछूता नहीं है। वर्जित क्षेत्रों में जहां पर गाड़ी खड़ी करना अवैध है, वहां पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी […] विस्तृत....

January 1st, 2011

 

नजरिया बदलता पर्यटन

पर्यटन महकमा अपने पांव बाहर निकाल रहा है और अगर इस संकल्प की मंजिल तय होती है, तो प्रदेश अपने सामर्थ्य की नई इबारत लिख पाएगा। पर्यटन की दृष्टि से पंच सितारा होटलों की बुनियादी जरूरत सारे प्रदेश में है और अगर विभाग सोलन, कुल्लू-मनाली, […] विस्तृत....

January 1st, 2011

 

…और 2010 भी बीत गया

(सुरेश कुमार, योल)- समय की सूइयां सुख दुख समेटे 2010 को इतिहास बना गईं। 2011 को विरासत में मिले घपले-घोटाले, तो कुछ उपलब्धियों के अंबार। ओलंपिक और राष्ट्रमंडल में देश कुछ कर गया, तो ए राजा जैसे मंत्री टू-जी स्पेक्ट्रम में देश को खोखला कर […] विस्तृत....

January 1st, 2011

 

हिमाचल के साथ हमेशा धोखा हुआ

(पवित्र लता शर्मा,फतेहपुर)- हिमाचल 40 साल का लंबा सफर तय कर चुका है, पर उसके पास जाने कितने सवाल हैं, जिनका केंद्र के पास कोई जवाब नहीं। जेनेरेशन टैक्स के लिए 90-91 में जब जस्टिस चंद्र चूड़ ने कह दिया था कि कोई अड़चन नहीं […] विस्तृत....

January 1st, 2011

 

पवित्रता सर्वोपरि और द्वार है स्वर्ग का

(योगीराज अमर ज्योति)- यहां तो धर्म-कर्म, भक्ति-पूजा तथा व्रत-उपवास भी स्वार्थ की गुप्त छाया के नीचे चल रहे हैं यदि कहीं कुछ सेवा प्रेम का व्यवहार भी दिखाई पड़ता है, तो उसमें भी कहीं न कहीं स्वार्थ की आंख मिचौनी चल रही है… जीवन-चेतना की […] विस्तृत....

January 1st, 2011

 

पोल

क्या कांग्रेस को हिमाचल में एक नए सीएम चेहरे की जरूरत है?

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