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विचार


बीओटी आधार का विस्तार

अंततः बीओटी (बिल्ट आपरेट एंड ट्रांसफर) के रास्ते हिमाचली विकास को अंगीकार किया जा रहा है, वरना इस सफर की अब तक की मंजिलें बदनाम ही हुई हैं। प्रदेश का सार्वजनिक निर्माण महकमा अपनी तीन प्रमुख सुरंगों को बीओटी के मार्फत हकीकत में बदलने की तमन्ना रखता है, जबकि प्रदेश के कुछ बस अड्डे भी इसी तरह के निवेश को आवाज दे रहे हैं। कुल मिलाकर यह आगाज प्रदेश के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने की जोरदार पहल हो सकती है। इससे पूर्व कुछ बस स्टैंड बीओटी के आधार पर बन चुके हैं, लेकिन ऐसे निवेश को सार्थक बनाने के बजाय उद्देश्य प्रभावित हुए हैं। खास तौर पर बस स्टैंड जैसी परियोजनाओं से जुड़े व्यापारिक लाभ के अति दोहन के कारण ढांचागत जरूरतें सिकुड़ गईं।  मकलोडगंज में सर्वप्रथम बीओटी आधार पर बस स्टैंड व पार्किंग की महत्त्वाकांक्षी परियोजना केवल व्यावसायिक परिसर बनकर विवादित है, तो मंडी बस स्टैंड परियोजना भी आलोचनाओं के दंश झेल रही है। मंडी में बस स्टैंड के मायने अगर यात्रियों की सुविधा ही छीन लें, तो बीओटी केवल व्यावसायिक परिसर बनाने की मशीन बन जाएगी। जाहिर तौर पर कोई भी निवेशक तभी ऐसी परियोजनाओं में रुचि लेगा यदि उसके धन की वापसी सुनिश्चित होगी, लेकिन इसके लिए पारदर्शिता जरूरी है। मकलोडगंज का बस स्टैंड आज भी अपने उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाया, क्योंकि व्यापारिक लक्ष्यों ने परियोजना प्रारूप ही बदल दिया। ऐसे में बीओटी परियोजनाओं के दस्तावेज सार्वजनिक किए बिना,  उद्देश्य कभी मुकम्मल नहीं होंगे। बीओटी संबंधी निरीक्षण केवल विभागीय परिपाटी न होकर, राज्य अधोसंरचना की विशेष जांच प्रक्रिया से होकर गुजरे तो गुणवत्ता व उद्देश्य सफल हो सकते हैं। हम बार-बार बस स्टैंड नहीं बना सकते और न ही दुकानों के लिए बस स्टैंड के स्थान को जाया कर सकते हैं। ये सभी परियोजनाएं कम से कम आगामी 50 साल तक तो चलें, अन्यथा बीओटी के जरिए यह प्रदेश अपनी बेशकीमती संपत्ति ही बेच देगा।  प्रदेश की अधोसंरचना की मजबूती के लिए निजी पूंजीनिवेश एक आवश्यक विकल्प है और यदि पब्लिक प्राइवेट भागीदारी को पुष्ट किया जाए, तो न केवल बस स्टैंड या सुरंगें ही बनेंगी, बल्कि हर क्षेत्र में संभावनाएं तराशी जा सकती हैं। प्रदेश के प्रमुख मार्गों को सुपर हाई-वे में बदलने तथा पर्यटक आवश्यकताओं के अनुरूप ढांचागत सुधार के लिए बीओटी को प्रोत्साहित किया जा सकता है। खास तौर पर हाई-वे टूरिज्म व मनोरंजन स्थलों के विकास में संभावनाएं दिखाई देती हैं। बेशक कुछ नगर परिषदों ने बीओटी के माध्यम से अपनी संपत्तियां गंवा दीं, लेकिन शहरीकरण की ढांचागत आवश्यकताओं को निजी निवेश की दरकार है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में यातायात सहूलियतों, आधुनिक बाजारों, सिने प्लैक्स व व्यापारिक प्रदर्शनी मैदानों के विकास के अलावा स्पोर्ट्स परिसरों व रज्जु मार्गों के विस्तार में बीओटी एक आधार स्तंभ हो सकता है। प्रदेश मेें निजी निवेश के चोर रास्तों के बजाय निजी निवेशक को सम्मानित करने का माहौल वांछित है। प्रदेश के हर शहर, धर्म नगरियों, ऐतिहासिक व धरोहर कस्बों की अधोसंरचना को संवारा जाए, तो पर्यटन के अर्थ बदल सकते हैं। यह कार्य बीओटी के आधार पर संभव है, बशर्ते योजनाओं के मजमून व विभागीय प्रक्रिया पारदर्शी हो। हर बीओटी परियोजना के साथ कुछ लघु परियोजनाएं जोड़ी जा सकती हैं, जैसे हमीरपुर बस स्टैंड बना रही कंपनी के जिम्मे कुछ छोटे बस स्टैंड व बस स्टाप का निर्माण भी जोड़ दिया जाए, तो उद्देश्य व्यापक होंगे और निवेश का आधार भी बढ़ेगा।

November 7th, 2010

 
 

आखिर किसकी है कांग्रेस

महाघोटालों की बदनामी झेल रही कांग्रेस अपनी अखिल भारतीय कमेटी के सम्मेलन के दौरान भ्रष्टाचार पर खामोश रही। यह सवाल अभी चर्चा में है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर पार्टी का रुख स्पष्ट क्यों नहीं किया? क्या कांग्रेस भ्रष्टाचार को मुद्दा […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

कश्मीर पर जमीयत का संदेश

– राजीव रंजन तिवारी, लेखक, मुजफ्फरनगर से पत्रकार हैं  पहले मुस्लिमों को कश्मीर के बारे में बात करने से डर था कि उन्हें भी कश्मीरी आंदोलनकारियों के साथ न जोड़ दिया जाए, लेकिन अब कश्मीर तथा अयोध्या जैसे विवादास्पद मसलों पर फिर से मंथन का […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

उचित भंडारण और अन्न का सम्मान आवश्यक

– कैलाश चंद भागर्व, लेखक, डोमेहर, अर्की से प्रगतिशील किसान र्हैं यदि एपीएल व बीपीएल सब परिवारों को छह माह का गेहूं अग्रिम दे दिया जाता, तो देश भंडारण समस्या से निजात पा सकता था और पारिवारिक तौर पर अन्न का भंडारण एफसीआई से अच्छा […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

बाजारों के माल की घटिया गुणवत्ता

– सुदर्शन अवस्थी, नादौन दिवाली से पूर्व समाचार निरंतर आते रहे कि घटिया मिठाइयां पकड़ी गईं। यह सही है कि देश की जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग उपभोक्ता कानून से परिचित नहीं है। बाजार में किस प्रकार का सामान मिल रहा है, इसकी कोई भी […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

कलम का कैमरा

– कश्मीर सिंह, रजेरा, चंबा मत सता तू लोगों को न छीन उनका हक न छेड़ मुझे इस तरह खींच लूंगा मैं तेरी तस्वीर कलम के कैमरे से या किसी अखबार के दौड़ते-भागते पन्नों पर छाप दूंगा तुझे लगा दूंगा प्रदर्शनी मैं तेरी सारे संसार […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

पहले रास्तों को तो संवारो

– प्रेमपाल महिन्दू्र, नाहन नाहन शहर में ट्रैफिक समस्या को देखते हुए इसके लिए एकतरफा व्यवस्था की गई है। इसके लिए कुछ चुनिंदा मार्गों पर एक तरफा ट्रैफिक व्यवस्था कर दी गई है। शहर के बीचोंबीच स्थित चौगान मैदान के उत्तरी भाग में जो सड़क […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

बहनों का त्योहार, भाई हुए बाहर

– शैलजा कुमारी, टिकरू, जोगिंद्रनगर हिमाचल प्रदेश देवी-देवताओं, तीज त्योहारों की भूमि है। यहां हर महीने कोई तीज त्योहार चला रहता है। सब त्योहारों का अपना-अपना महत्व है। कोई दशहरा है, दीपावली है, लोहड़ी है, तो कोई करवाचौथ है, तो कोई बहनों का त्योहार रक्षा […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

और यह भी…

– राधा पठानिया, शिमला पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल कपूर ने आय के झूठे आंकड़े दिखाकर आदर्श सोसायटी से फ्लैट हथिया लिया। देश का थल सेेनाध्यक्ष फिर भी इतनी भूख, यह उनका हाजमा तो खराब करेगी ही, देश भी ऐसे जनरल के हाथ दो साल कैसे […] विस्तृत....

November 7th, 2010

 

शिमला में पर्यटन की ताजपोशी

शिमला में पर्यटन की ताजपोशी करती हनुमान जी की मूर्ति अगर बच्चन परिवार को प्रदेश का ब्रांड एंबेसेडर बना दे, तो इससे बड़ा वरदान और क्या होगा। बच्चन परिवार के चिराग अपने रोशन इरादों का जिक्र करते हुए, हिमाचल से ताल्लुक बढ़ाना चाहते हैं। भले […] विस्तृत....

November 4th, 2010

 

पोल

क्या भोरंज विधानसभा क्षेत्र में पुनः परिवारवाद ही जीतेगा?

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