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दबाव के रहते भी लेखक-मन पीछे नहीं हटता

रचना प्रक्रिया में घर-परिवार, समाज व परिवेश हमेशा ही आगे रहता है। महिला लेखिका को आज भी इन समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। चाहकर भी नारी अपनी लेखन प्रतिभा को गति नहीं दे पाती, जिसकी वह इच्छा करती है। भारतीय समाज आज भी पूरी तरह महिला पर…

महिला आजादी से खतरे में इस्लाम !

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं आजकल हिंदोस्तान में इस्लाम हर मामले में जल्दी ही खतरे में पड़ जाता है। जब औरतों ने कहा कि तीन बार तलाक चिल्ला देने से विवाह टूट नहीं सकता, तब मौलवियों ने उनकी गर्दन पकड़ी और कहा तुम्हारी…

कब्र में चरित्र

गटर में तालीम का बटुआ गुम है और इधर हम देश की बुनियाद को खोज रहे हैं। नाहन में बच्चे न तो पक्के घड़े की तरह थे कि गुरुजन अपना मनोरंजन करते हुए बेखबर हो जाते और न ही रोबोट थे कि एक बार शुरू होते तो काम कर जाते। हिमाचल में प्राथमिक शिक्षा के…

तो आरुषि का कातिल कौन ?

बेशक दूसरा पक्ष या सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में जाएं, बेशक नए सिरे से जांच कराई जाए या अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक एजेंसियों को भी शामिल किया जाए, लेकिन 14 साल की किशोरी आरुषि की हत्या का रहस्य खुल सकेगा, यह तय नहीं है। सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी…

स्वार्थ से बिगड़ता राजनीति का हुलिया

शिवालिक अवस्थी लेखक, धर्मशाला से हैं राजनीति की आज जो दुर्दशा हमें देखने को मिलती है, उसके लिए हम भी नेताओं से कम कसूरवार नहीं हैं। जो जनता राजनेताओं को तमाम अधिकार सौंपकर उनसे सदाचार की अपेक्षा रखती है, वह खुद ही राजनीतिज्ञों के साथ मिलकर…

बहकावों से बचें

(राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा ) हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित हो गई है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख पास आ रही है, राजनीतिक दल मतदाताओं को कई तरीकों से लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए नेता बड़ी-बड़ी रैलियां करेंगे,…

कछुआ चाल जांच

(रूप सिंह नेगी, सोलन ) इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही माना जाना चाहिए कि कोटखाई में बिटिया प्रकरण में सीबीआई को भी कातिलों का सुराग अब तक हाथ नहीं लग पाया है। संभवतयः इसीलिए माननीय उच्च न्यायालय ने एक बार फिर से सीबीआई को फटकार लगाई है। आने वाले समय…

शब्द वृत्ति

दिवाली भारत की है (डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) बाहर से चमचम है चीनी, अंदर नकली जाली है। धन है लक्ष्मी, मत फेंको तुम, ड्रैगन गंदी नाली है। खाओ मत या छेद करो मत, यह स्वदेश की थाली है। चीनी तिलिस्म का कोई छोर नहीं, अति लुभावनी, पर…

तकनीकी शिक्षा की दयनीय हालत

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हमें शिक्षा का प्रारूप दोबारा से इस तरह बनाना चाहिए कि छात्र भविष्य की कारपोरेट जरूरतों के मुताबिक अपने कामों को अंजाम देने में सक्षम हो सकें। छात्रों तथा उनके अभिभावकों,…

शब्द वृत्ति

लाडो रोती कुंभकार की (डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) नृत्य कर रही है चीनी, देशी भूखी, मरने वाली। जला रही लडि़यां ड्रैगन की, है अनपढ़ तेरी साली। वीवो, ओप्पो फुदक रहे हैं, अपनी जेबें हैं खाली। लाडो रोती कुंभकार की, घर में छाई…

सस्ती सियासत

(सुरेश कुमार, योल ) हिमाचल में चुनावी वेला पर लोकतंत्र का मेला लगा है। यह लोकतंत्र कुछ नया है। इसमें नेता आचार संहिता से पहले सब कुछ लुटा देना चाहते हैं, क्योंकि फिर आने वाले पांच साल खुद प्रदेश को लूटना है। राजनीति का आजकल यही गुरुमंत्र है…

चुनावी लक्ष्मण रेखा

चुनाव की तारीखी घोषणा ने हिमाचल को पुनः मतदाता के जागरूकता कक्ष में पहुंचा दिया। हालांकि चुनाव में कूदी राजनीति काफी समय से प्रतिस्पर्धा से आगबबूला थी, लेकिन अब रणनीतिक खुलासों में जनता के आगे शीर्षासन होगा। चुनाव आयोग ने भले ही गुजरात से…

यह पाबंदी संस्कृति विरोधी है

त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय की टिप्पणी है कि आज दही-हांडी और पटाखों पर पाबंदी लगाई गई है, तो कल चिता जलाने पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है। यदि दिवाली के मौके पर सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में ही पटाखों की बिक्री के संदर्भ में एक राज्यपाल को अपनी…

धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय खेल छात्रावास

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल छात्रावास बनने से जहां भारतीय टीम के प्रशिक्षण में निखार आएगा, वहीं पर हिमाचली प्रतिभाओं को अपने यहां एशियाई स्तर के धावक व धाविकाओं के साथ प्रशिक्षण…

बिन पटाखों के दिवाली

(राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा ) देश की सबसे बड़ी अदालत ने पटाखों से वायु प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली और एनसीआर में 31 अक्तूबर तक बिक्री पर रोक लगा दी है। हालांकि न्यायालय के इस फैसले से कुछ व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़…
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