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विचार


नेरना-रैहन सड़क खस्ता हाल क्यों

किसी भी देश के विकास में सड़कों का बहुमूल्य योगदान होता है। शायद इसलिए सड़कों को देश के विकास की रीढ़ कहा जाता है। सड़कों का न होना या सही हालत में न होना, विकास को बाधित करता है। आए दिन केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा की जाने वाली घोषणाओं में सड़क निर्माण कार्य या गांव-गांव में पक्की सड़कों को पहुंचाने की बात होती रहती है, परंतु क्या इन घोषणाओं पर इतनी ही जल्दी या गंभीरता से अमल भी होता है? शायद नहीं। राजा का तालाब से वाया नेरना, पंजारसा, पंजरोड़, बड़ी वतराहण, गोलवां, सकरी से होती हुई रैहन को मिलाने वाली सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय है। सड़कों में गड्ढे तो सुना है, लेकिन यहां तो गड्ढों में सड़क है। लगभग 2000 की आबादी वाले इस इलाके के लोगों को प्रतिदिन आने जाने में समस्या होती है। बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं या बीमार व्यक्तियों के लिए तो यह समस्या यात्रा के दौरान और भी विकराल हो जाती है। इस सड़क के बाद अस्तित्व में आई सड़कें आज प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत आ चुकी हैं, पर यह बेचारी अभी तक अभागी बनकर बैठी है।

अजय कुमार धीमान, बड़ी, नूरपुर

September 7th, 2010

 
 

और यह भी…

दमकल विभाग जब मुंबई में एक लड़की नंदिता को रेस्क्यू आपरेशन के जरिए और दिल्ली में पतंग की डोर में फंसी एक चील को बचाता है, तो तसल्ली होती है कि कोई विभाग तो अपना काम मुस्तैदी से कर रहा है, वरना तो सब राम […] विस्तृत....

September 7th, 2010

 

यह संघर्ष केवल सेब का नहीं

किसान या बागबान का पक्ष इस देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महक का वर्णन है और यही सरोकार आंदोलनों की भूमिका बनते हैं। हिमाचल में भी कृषि व फलोत्पादकों की पीड़ा का हिसाब अकसर उत्तेजना से भर जाता है, लेकिन तकदीर के फैसले में सेब […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

चापलूस कांगे्रस की सोनिया

सोनिया गांधी के लगातार चौथी बार कांगे्रस अध्यक्ष बनने पर एक जिज्ञासा सहज है-यह निर्वाचन है या राजतिलक…। बेशक कांगे्रस राजशाही सरीखा कोई दरबार नहीं है, लेकिन जहां तक नेहरू-गांधी परिवार का संदर्भ है, पार्टी के नेताओं की चेतना दरबारी-सी ही है। कांगे्रस अध्यक्ष के […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

नेता विकास चाहते हैं या पर्यावरण?

सब ओर तथाकथित विकास के नाम पर एक ही तस्वीर है। खेती की जमीनें, पहाड़, जंगल, नदियां इस तथाकथित विकास की भेंट चढ़ रहे हैं और सरकारें इसे उचित ठहरा रही हैं… आर्थिक नीतियों के खिलाफ जारी आंदोलनों पर नेताओं के रवैये से देश में […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

खूनी सड़कों और परिवहन

  आज भ्रष्टाचार की सही तस्वीर तो यह है कि जहां टायरिंग के एक हफ्ते के बाद ही सड़कें उखड़ रही हैं, तो वहीं करोड़ों खर्च कर बनाए जा रहे पुल व डंगे उद्घाटन के कुछ समय बाद ही ध्वस्त हो रहे हैं…   हिमाचल […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

एकता की मिसाल

‘एकता में बल है’ यह कहावत नहीं अपितु यथार्थ है। एकता केवल मानव समाज में ही नहीं, पशुओं और पक्षियों में भी पाई जाती है। चींटियों को एक कतार में आते-जाते देखा जा सकता है। ये भी एकता ही प्रस्तुत कर रही होती हैं। आइए […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

प्राथमिक शिक्षा में सुधार जरूरी

प्राथमिक शिक्षा संपूर्ण शिक्षा का आधार है। शिक्षा की गुणवत्ता अथवा विकास का आधार देश में प्रदान की जाने वाली प्राथमिक शिक्षा से होता है। प्राथमिक स्तर के छात्रों के शैक्षणिक उपलब्धि स्तर में सुधार लाने तथा गुणात्मक शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

जमा दो की शर्त जरूरी क्यों

सभी कला अध्यापकों के साक्षात्कार के लिए जमा दो शिक्षा में 50 प्रतिशत अंकों की शर्त लगाई गई है, जो कि उचित नहीं है। क्योंकि जमा दो शिक्षा 1986 से आरंभ हुई है। 1986 से पहले हाई स्कूल तथा हायर सेकेंडरी स्कूल हुआ करते थे। […] विस्तृत....

September 6th, 2010

 

और यह भी…

  राष्ट्र मंडल खेलों के आयोजन की तैयारी को लेकर इतनी आलोचना हो चुकी है कि इसमें भाग लेने वाले सभी देश यहां आने में संकोच ही कर रहे होंगे। भ्रष्टाचारियों से पल्ला छूटेगा, तभी तो समय पर सही काम होगा। विक्रम सिंह, ऊना विस्तृत....

September 6th, 2010

 
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