Divya Himachal Logo Jan 22nd, 2017

विचार


एक मां है और एक यह सरकार!

( सुरेश कुमार, योल )

कल के समाचार में खबर पढ़ी कि मंडी के घाट की एक महिला अपने 7 दिन के बीमार बच्चे को लेकर 22 किलोमीटर बर्फ में पैदल चली। पढ़कर कलेजा कांप गया और जिन पर यह सब गुजरी, उनका क्या हाल हुआ होगा। सोचकर ही लगता है कि हिमाचल में राजनीति के सिवाय कुछ भी नहीं है। घोषणाएं एम्स तक की हो चुकी हैं और वर्तमान वाकया बताता है कि हम अभी पिछली सदी में ही जी रहे हैं। क्या किसी सरकारी नुमाइंदे ने भी यह समाचार पढ़ा होगा। पढ़ा भी होगा, तो पढ़कर रद्दी की टोकरी में डाल दिया होगा। क्योंकि राजनीति में आने के बाद भावनाएं मर जाती हैं। कल ही मैने मुख्यमंत्री के काफिले को पास से गुजरते देखा और साथ में देखीं 25-30 गाडि़यां, जो हूटर बजाती हुईं पल में गुजर गईं। ये गाडि़यां कोई मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए नहीं थीं, बल्कि अपनी-अपनी पैठ बढ़ाने के लिए थीं। कर्ज में डूबे प्रदेश की फिजूलखर्ची की एक झलक देखकर मैं समझ गया कि प्रदेश के कर्ज में डूबने का कारण यही है। मंडी के घाट जैसे हालात को क्या लेना है करोड़ों के बजट से और आए दिन होती घोषणाओं को, जब एक मां की ममता की बर्फबारी में परीक्षा होती हो। उनके लिए प्रदेश में स्मार्ट सिटी बनने का और फोरलेन और सिक्सलेन का कोई मतलब नहीं है। जिन्हें जीने के लिए इतना जूझना पड़ता है, उनकी तरफ भी कभी सरकार का रेला निकले। एक दृष्टिहीन की फोटो मुख्यमंत्री के साथ छपी, तो मुख्यमंत्री भी भावुक हो गए और एक समाजसेवी ने अपनी एक आंख दान करने का मन भी बनाया, पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ी। हिमाचल के लिए एम्स से भी ज्यादा जरूरी हैं ऐसे लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं । सरकार ध्यान दे कि एक ऐसा हिमाचल भी है, उसे भी साथ लेकर चले।

 

January 19th, 2017

 
 

चंद हाथों में सिमटी संपदा

( अर्पिता पाठक (ई-मेल के मार्फत) ) ऑक्सफेम की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत के एक फीसदी अमीरों के पास देश का करीब 58 फीसदी धन जमा है। सरकार और अमीरों ने साथ मिलकर काम किया, तो देश तेजी से आगे बढ़ सकता है। ऐसा […] विस्तृत....

January 19th, 2017

 

न्याय की कछुआ चाल

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) अगर आप गाड़ी चलाते हैं तथा आपका ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है और सड़क पर ट्रैफिक पुलिस का सिपाही आपको रोक लेता है, तो वह चंद मिनटों में जान जाता है कि आपका लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है। […] विस्तृत....

January 19th, 2017

 

नैतिक धरातल से कटती राजनीति

नैतिक धरातल से कटती राजनीति( डा. लाखा राम लेखक, चंडीगढ़ में लेखापरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं ) वर्तमान में नेतृत्व के लिए मानक चारित्रिक व्यवस्था का निर्धारण नहीं है और निर्धारित मानकों में भी तमाम छिद्र हैं। राजनीति में अपराधियों का प्रवेश रोकने के कारगर उपाय नहीं हो […] विस्तृत....

January 18th, 2017

 

अछूते स्थलों तक पहुंचे पर्यटन की राह

अछूते स्थलों तक पहुंचे पर्यटन की राह( सतपाल लेखक, एचपीयू में शोधार्थी हैं ) हिमाचल के लगभग सभी जिलों में पर्यटन के विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं, परंतु सही मायनों में पर्यटन विकास कुछ क्षेत्रों तक सिमित रहा है,  फिर चाहे चंबा का खजियार हो, डलहौजी, शिमला, कांगड़ा का धर्मशाला या […] विस्तृत....

January 18th, 2017

 

तांगणू की त्रासदी

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) रोहड़ू के गांव तांगणू में अग्निकांड के बारे में समाचार पढ़कर मन को गहरा अघात लगा। इस दर्दनाक हादसे में गांव के 50 से भी ज्यादा आशियाने जलकर राख हो गए। हैरानी यह कि इस हादसे के लिए भी […] विस्तृत....

January 18th, 2017

 

बेटा ‘दंगल’ जीता, बाप चित

राजनीति में रिश्ते बेमानी होते हैं। खून पानी हो जाता है। शाहजहां और औरंगजेब की उपमाएं दी जाने लगती हैं। मुलायम सिंह तो वैसे भी औरंगजेब को अपना आदर्श मानते थे। आज बेटा औरंगजेब साबित हो रहा है। शुक्र है कि मुलायम को शाहजहां नहीं […] विस्तृत....

January 18th, 2017

 

गहराती खाई

( कविता, घुमारवी ) भारत की कुल 58 प्रतिशत संपत्ति पर देश के मात्र एक प्रतिशत अमीरों का कब्जा है। अभी हाल ही में हुए एक अध्ययन के मुताबिक दुनिया के मामले में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत है यानी कि भारत में अमीरों और गरीबों […] विस्तृत....

January 18th, 2017

 

शाइनिंग हिमाचल के पार्टनर

हिमाचल के अनेक पक्ष बर्फ से भी ज्यादा उज्ज्वल हैं, लेकिन क्या इन उपलब्धियों के सहयोगी कभी चिन्हित हुए। क्या सरकारों ने कभी शाइनिंग हिमाचल की गरिमा में पार्टनर को पहचानने की कोशिश की। तरक्की के ढोल-नगाड़ों के बीच एक ऐसा हिमाचल है, जो खामोशी […] विस्तृत....

January 18th, 2017

 

अपेक्षाओं के विपरीत

( अनिल कुमार जसवाल, ऊना रोड, गगरेट ) 130 करोड़ के करीब आबादी वाला भारत आज वश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, जबकि आज भी कुल धन का एक बड़ा हिस्सा काले धन के रूप में है। भारत में काले धन की व्यवस्था को […] विस्तृत....

January 18th, 2017

 
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