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हिमाचल के हिस्से एक और शहादत

प्रताप सिंह पटियाल लेखक, भूतपूर्व सैनिक हैं मुद्दा यह है कि हमारे जवान बेवजह शहीद हो रहे हैं। सीमा से कब तक हम भारतीय सैनिकों की लाशें ढोते रहेंगे। कब तक हमारे नेता संसद में भाषणों तक सीमित रहेंगे। एक मुट्ठी भर देश ने कई दशकों से भारत को…

अलगाववादियों से लगाव

(मनीषा चंदराणा (ई-मेल के मार्फत) ) ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के सरकारी पोस्टर पर कश्मीर की एक जेल में रह रही अलगाववादी महिला नेता का छायाचित्र प्रकाशित किया जा रहा है। इस पोस्टर में आसिया के अलावा जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा…

ई-कारों से नहीं घटेगा वायु प्रदूषण

 डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं पेट्रोल से ई-कारों पर जाने के स्थान पर हमें व्यक्तिगत कारों के स्थान पर बस तथा मेट्रो की तरफ बढ़ना चाहिए। ऐसा करने से हम कई समस्याओं से एक साथ छुटकारा पा लेंगे। शहरों मे प्रदूषण…

क्यों न पटाखों का उत्पादन ही बंद किया जाए

कंचन शर्मा लेखिका, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं हमें पर्यावरण की चिंता है तो पहले तो पटाखा उद्योग को व्यवस्थित तरीके से बंद किए जाने की व्यवस्था करनी होगी। इसका मतलब यह भी कदापि नहीं होना चाहिए कि अपने देश में तो पटाखा उद्योग बंद करके लाखों के…

साहसिक भाजपा की चुनौतियां

मंडी के पंडित परिवार को खुद में समाहित करके भाजपा ने अपना उद्धार किया या उद्वेग की सियासत में खुद को झोंक दिया, यह प्रश्न चुनाव के अंत तक मुखातिब रहेगा। पंडित सुखराम के परिवार से बड़े अपने कुनबे को दरकिनार करके गणित जो भी हो, लेकिन भाजपा ने…

गुरदासपुर जनादेश के मायने

लोकसभा की एक सीट पर उपचुनाव के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित नहीं किया करते। उससे निकटस्थ राज्यों के जनादेश भी तय नहीं होते, लेकिन जो पार्टियां डूब रही हों या जनता के बीच अप्रासंगिक होती जा रही हों, ऐसी कोई भी जीत उनमें नया उत्साह,…

जानलेवा लापरवाही

(जयेश राणे, मुंबई, महाराष्ट्र ) गोवा-मुंबई तेजस एक्सप्रेस का खाना खाने से 26 यात्री बीमार पड़ गए हैं। बीमार यात्रियों की संख्या चौंकाने वाली है। रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम को इस विषय में जिनसे गलती हुई है, उन पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी।…

लोकतंत्र को बचाइए

(जग्गू नौरिया, जसौर, नगरोटा बगवां ) टेबल थपथपा कर पगार बढ़ाए, वह नहीं चाहिए, बलात्कारियों को जो बचाते, वह नहीं चाहिए। बांटता रहा दरियां-परातें बन समाजसेवी कोई, वह बगुला भी सत्ता में कतई न चाहिए। बैठकर विपक्ष में चुप रहा, न वह गूंगा चाहिए,…

धनतेरस की धूम

(रमेश सर्राफ धमोरा, झुंझूनू ) हमारे देश में सर्वाधिक धूमधाम से मनाए जाने वाले त्योहार दीपावली का प्रारंभ धनतेरस से हो जाता है। लोग इसी दिन से घरों की लिपाई-पुताई प्रारंभ कर देते हैं। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन ही धन्वंतरि का जन्म…

और यह भी…

(शगुन हंस, योल, कांगड़ा ) आचार संहिता से पहले बंटी रेवडि़यों का हाल देखो कि करसोग बहुतकनीकी संस्थान का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने शिमला में बैठकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए ही कर दिया। खास यह कि उद्घाटन पट्टिका समय पर नहीं बनी, तो कागजों को…

शब्दवृत्ति

विषकन्या (डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) जोड़ा बिछुड़ा हंस का, टूट गया अब साथ, संन्यासी नित मांगता, विषकन्या का हाथ। चली बांटने नियति, अब पहरे की सौगात, गिनी सलाखें सौ दफा, नहीं कट रही रात। रानी पसरी दुर्ग में, सेवक, पहरेदार, रोट…

हां … मै महाजन हूं

राजाओं के फाइनांसर पहाड़ी राज्य के नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश के विकास में महाजन समुदाय का अहम योगदान है। इस समुदाय की भागीदारी से हिमाचल तरक्की के लंबे डग भर रहा है। महाजन समुदाय की उपलब्धियां बता रहे हैं  अमन अग्निहोत्री... रियासत काल…

गौरी लंकेश से सीखें पत्रकार

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं यह सच है कि गौरी को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से कई बार पूर्व चेतावनियां मिलती रहीं और अंत में उन्हें भयावह सच्चाई झेलनी भी पड़ी। हालांकि उनके कदम मौत के आगे भी डगमगाए नहीं। इसमें पत्रकारों के लिए एक सबक…

बचकानी हरकत

(डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर ) हाल ही में भारत-आस्ट्रेलिया के दरम्यान संपन्न हुई टी-ट्वेंटी शृंखला एक-एक से बराबर रही। भारत ने शृंखला का पहला मैच जीत लिया, तो उस जीत के खूब जश्न मनाए गए। जीत का जश्न मनाने में कुछ गलत भी नहीं है। उसके बाद…

दस मिनट की अखबार घंटों की मेहनत

सुरेश कुमार लेखक, योल, कांगड़ा से हैं मीडिया का मतलब अगर ढंग से जाना जाए तो यही है कि रोज कुआं खोदो और रोज पानी पियो। रोज खबर ढूंढनी पड़ती है, रोज जोखिम उठाना पड़ता है। दोस्त कम हो जाते हैं, दुश्मन बढ़ने लगते हैं। धमकियां भी मिलने लगती हैं…
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