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विचार


विकास के नए आयाम स्थापित करता हिमाचल

अनुज कुमार आचार्य

लेखक, बैजनाथ से हैं

newsहिमाचल प्रदेश के नागरिकों ने अपनी कर्मठता और मेहनत के बलबूते अपनी एवं राज्य की आर्थिकी को ऊपर उठाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज भारतवर्ष के दूसरे राज्यों के मुकाबले यहां के लोगों की जीवनशैली और प्रगति कहीं ज्यादा बेहतर और उत्तम है…

हिमाचल प्रदेश ने बीते वर्षों में प्रगति के मामले में न केवल एक लंबी छलांग लगाई है, अपितु पहाड़ी राज्यों सहित भारतवर्ष के दूसरे राज्यों के समक्ष यह एक मिसाल बनकर भी उभरा है। आज लगभग सभी हिमाचलियों के पास अपने पक्के मकान हैं और शायद ही कोई प्रदेशवासी रात को भूखे पेट सोता हो। 15 अप्रैल, 1948 में प्रदेश के 27 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली लगभग 30 पहाड़ी रियासतों को मिलाकर पहले-पहल हिमाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। 25 जनवरी, 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से हिमाचल प्रदेश के सभी क्षेत्रों का सर्वांगीण एवं संतुलित विकास हुआ है। यहां के उत्कीर्णीत एवं नक्काशीदार अनेक प्रसिद्ध एवं प्राचीन देवालय धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देते आए हैं। समृद्ध परंपराओं और पुरातन सांस्कृतिक विरासत के बलबूते हिमाचल बरबस ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। यहां ऊंचे-नीचे पहाड़, ग्लेशियर, छायादार घाटियां, वन क्षेत्र, अठखेलियां करती नदियां और वन्य प्राणी जगत हिमाचल प्रदेश के आकर्षण एवं सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। इस बात की तसदीक गत वर्ष प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या से भी होती है। पिछले वर्ष एक करोड़ 79 लाख 77 हजार 750 भारतीय और चार लाख 52 हजार 770 विदेशी सैलानियों ने हिमाचल प्रदेश में भ्रमण किया और यहां की प्राकृतिक सुंदरता का नजारा उठाया। पर्यटन अब उद्योग का रूप ले चुका है और राज्य के युवाओं को रोजगार प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश की आर्थिकी को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। हिमाचल प्रदेश की प्रगति को यदि आंकड़ों के आईने में देखें तो 1951 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश की कुल आबादी 25 लाख 86 हजार थी, तो 2011 के अनुसार 68 लाख 65 हजार हो चुकी है। प्रदेश की 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में और 10 फीसदी शहरी क्षेत्रों में आबाद है। आज हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर 82.80 प्रतिशत है और भारत के राज्यों में शिक्षा, साक्षरता के हिसाब से हमारा प्रदेश चौथे स्थान पर है। स्त्री-पुरुष अनुपात के अनुसार प्रति एक हजार लड़कों पर 972 लड़कियां हैं और प्रदेश सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस पहल की गई है। पंचायती राज प्रणाली के अंतर्गत प्रदेश की महिलाओं के लिए 50 फीसदी प्रतिनिधियों की सीटें आरक्षित करके महिलाओं के स्वाभिमान को बढ़ाने और उनके अंदर आत्मविश्वास जगाने की भी सुंदर शुरुआत हुई है।

सरकारी क्षेत्र में रोजगार के तहत आज प्रदेश सरकार के अधीन नियमित कर्मचारियों की कुल संख्या एक लाख 78 हजार है और लगभग सात फीसदी की वार्षिक वद्धि दर के साथ हिमाचल प्रदेश का राज्य सकल घरेलू उत्पाद एक लाख 24 हजार 570 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति आय नौ प्रतिशत बढ़कर एक लाख 47 हजार के करीब हो गई है। बैंकिंग सेवाओं का प्रदेश में निरंतर विस्तार हो रहा है। पिछले वर्षों में नई खुली 106 बैंक शाखाओं के  साथ वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कुल 2061 बैंक शाखाएं कार्यरत हैं। वर्तमान समय में प्रदेश में 576 मध्यम और बड़े उद्योग और 43 हजार 420 लघु इकाइयां कार्यरत हैं, जहां हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। हिमाचल प्रदेश नदियों का राज्य है और जलविद्युत उत्पादन की क्षमता का अभीपूर्ण दोहन होना बाकी है। अभी तक कुल 10 हजार 351 मेगावाट विद्युत उत्पादन यहां की जलविद्युत परियोजनाओं द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं इस बात को स्वीकारते हैं कि पनबिजली परियोजना के क्षेत्र में अभी प्रगति के नए आयामों को छूना शेष है। तथापि निजी क्षेत्र में कई जलविद्युत परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, जिनके आने वाले वर्षों में सार्थक परिणाम मिलना तय है। भारतवर्ष में शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश अब चौथे स्थान पर सुशोभित है। पिछले 69 वर्षों से ही प्रत्येक सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है। इस वर्ष शिक्षा विभाग के लिए सरकार ने छह हजार 204 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया है। वनीकरण को बढ़ावा मिलने के कारण प्रदेश में कुल वन क्षेत्रफल बढ़कर 37 हजार 33 किलोमीटर हो गया है। नागरिक सुविधाओं को ही लें, तो प्रदेश में 146 गैस एजेंसियों, 362 पैट्रोल पंपों सहित 4891 उचित मूल्य की दुकानों से बेहतर सेवाएं लोगों को मिल रही हैं। अनाज उत्पादन बढ़कर 16 सौ टन, आलू 195 टन, सब्जियां 15 सौ टन और अदरक उत्पादन 35 टन पर पहुंच गया है। कृषि, पशुधन, वानिकी, मत्स्य और बागबानी क्षेत्रों पर पर्याप्त धनराशि एवं योजनाओं के क्रियान्वयन के कारण इन वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ने से पड़ोसी राज्यों पर हमारी निर्भरता कम हो रही है। पहाड़ी राज्यों में सड़कों को विकास का वाहक कहा जाता है। दिसंबर 2016 की स्थिति के अनुसार प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई बढ़कर 36 हजार 256 किलोमीटर हो चुकी है। हिमाचल को भारतवर्ष के बड़े राज्यों में 28 अक्तूबर, 2016 को पहला खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित किया जा चुका है। 31 दिसंबर, 2016 तक प्रदेश में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या 11 लाख 75 हजार 510 थी, जो यहां के नागरिकों की मजबूत होती आर्थिक स्थिति को ही बयां करती है। हिमाचल प्रदेश के नागरिकों ने अपनी कर्मठता और मेहनत के बलबूते अपनी एवं राज्य की आर्थिकी को ऊपर उठाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज भारतवर्ष के दूसरे राज्यों के मुकाबले यहां के लोगों की जीवनशैली और प्रगति कहीं ज्यादा बेहतर और उत्तम है।

ई-मेल : rmpanuj@gmail.com

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