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विचार


विश्वास को लूटता पुलिस प्रशासन

सुरेंद्र कुमार

लेखक, करसोग, मंडी से हैं

बढ़ते अपराध से राज्य की शांतिप्रियता भंग हो रही है। कुछ माह पूर्व यहां आठ वर्ष की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या की गई तथा होशियार जैसे ईमानदार वन रक्षक की हत्या करके शव को पेड़ से उल्टा लटकाया गया। ऐसे में राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है…

देवभूमि दिन-प्रतिदिन अपराध भूमि में तबदील होती जा रही है। कभी मासूम युग, कभी ईमानदार होशियार तो कभी बिटिया जैसे दिल दहलाने वाले घिनौने कृत प्रदेश को झकझोरने के साथ-साथ शर्मसार भी कर रहे हैं। आए दिन यहां खनन माफिया पहाड़ों को खोखला कर रहा है। वन माफिया वन काट रहा है तथा मौत के सौदागर जान-माल के साथ इज्जत भी लूट रहे है। यह सब राज्य की शांतिप्रियता को भंग कर रहे हैं। कुछ माह पूर्व यहां आठ वर्ष की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या की गई तथा होशियार जैसे ईमानदार वन रक्षक की हत्या करके शव को पेड़ से उल्टा लटकाया गया। ऐसे में राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। अब शिमला में बिटिया के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले की बात की जाए, तो यह मामला शिमला जिला के कोटखाई थाने में धारा 302 और 376 के साथ-साथ पोक्सो एक्ट की धारा-4 के अंतर्गत दर्ज है। चार जुलाई से गायब बिटिया का शव छह जुलाई की सुबह अर्द्धनग्न अवस्था में मिला। शव की हालत इतनी बेरहम थी कि बताने में भी लज्जा महसूस होती है।

शुरुआती दो-तीन दिनों की सामान्य जांच के बाद पुलिस के हाथों कुछ खास नहीं लगा। इसके चलते स्वाभाविक था कि स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता और ऐसा हुआ भी। 10 जुलाई को चौतरफा दबाव के चलते डीजीपी सोमेश गोयल ने जानकारी दी कि मामला काफी दर्दनाक व पेचीदा होने के साथ अब तक के तथ्यों के मद्देनजर छानबीन के लिए एसआईटी की जरूरत समझी गई। इसी दिन प्रदेश मुख्यमंत्री वीरभद्र ने घटना को गंभीर व दुखद बताया तथा कहा कि इसकी क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती। संवेदना के रूप में उन्होंने पीडि़त परिवार को पांच लाख रुपए की सहायता राशि दी। एक सप्ताह से हो रही किरकिरी से बचने के लिए पुलिस ने तीन आरोपियों को शक के आधार पर मंगलवार देर सायं पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। इसके अलावा अगले दिन सुबह मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक से इस संदर्भ में बात करके कड़े शब्दों में कहा कि मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी तथा मुजरिमों के साथ नरमी नहीं बरती जाएगी।

पहले से चल रहे धरना-प्रदर्शनों के माध्यम से लोग बुधवार को बिटिया मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग की और सभी ने इस अमानवीय अत्याचार के विरोध में शांति मार्च निकाले। निंदनीय अपराध में अगले दिन गुरुवार को एसआईटी को छह आरोपियों को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल हुई। इनमें दो स्थानीय, दो उत्तराखंड के तथा दो नेपाली युवक थे। इसके साथ ही पुलिस ने गुडि़या मामले को सुलझाने की बात कही, जबकि इसके विपरीत लोगों का आरोप था कि पुलिस जल्दबाजी और दबाव में आकर इस पूरी कहानी की पटकथा लिखकर अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते हुए अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश कर रही है। इसी मध्य मामले संबंधित एक सुखद खबर आई कि शिमला बार एसोसिएशन के लगभग बारह सौ सदस्यों ने इस केस की पैरवी के बजाय इसका विरोध करने का निर्णय लिया। बीते शुक्रवार को कोटखाई, ठियोग और अन्य स्थानों पर भारी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और मामले की जांच को सीबीआई को सौंपने की बात मांग के साथ धरना-प्रदर्शन किए। प्रदर्शन इतने उग्र थे कि भीड़ ने पुलिस अधिकारियों की गाडि़यों को तोड़ने के साथ-साथ पुलिस कर्मचारियों-अधिकारियों से भी हाथापाई की।

इसके प्रभाव से प्रदेश सरकार को मजबूरन आखिरकार मामला सीबीआई को सौंपना पड़ा। भीड़ का आरोप था कि पुलिस मामले में आरोपी हाई प्रोफाइल लोगों को बचा रही है। लोगों ने पुलिस पर लिपापोती का आरोप लगाते हुए कहा कि असली मुजरिम खुलेआम घूम रहे हैं। घटना में संलिप्त दरिंदे रसूखदार और लंबे राजनीतिक हाथों वाले हैं। इसी कड़ी में बीते शनिवार को दो अन्य लोगों से पूछताछ की गई तथा मेडिकल जांच के लिए शिमला भेजे गए। अब तक कि पुलिसिया कार्रवाई से प्रतीत होता है कि मामले के आरोपियों तक पहुंचने में एक महीना भी लग सकता है। मामले की जांच में यथासंभव शीघ्रता लाई जाए, इस बाबत मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अवगत करवाया। कोटखाई में घटित बिटिया प्रकरण दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। हिमाचल एक धार्मिक एवं शांत राज्य है। इसलिए ऐसी दर्दनाक घटना यहां कतई शोभा नहीं देती। इस बदनुमा धब्बे को शायद ही हम कभी देवभूमि के दामन से धो पाएंगे।

लोगों से भी अपेक्षा रहेगी कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी प्रतिक्रियाएं जाहिर करें। दोषी दरिंदे आसमान से नहीं, प्रदेश के ही होंगे। उन्हें ढूंढने में पुलिस व अन्य जांच एजेंसियों का भरपूर सहयोग करें। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति है। वह भी समय-समय पर मामले का कड़ा संज्ञान लेने के साथ जांच एजेंसियों की हरसंभव मदद करे। प्रदेश पुलिस की कार्यशैली अभी तक स्वच्छ रही है, इसलिए उसे सीबीआई के कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने के अलावा तन्मयता से कार्य करना होगा। जिससे असली अपराधियों को जल्द कालकोठरी में डाला जा सके और अपनी छवि पर भी कोई आंच न आए।

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