Divya Himachal Logo Feb 27th, 2017

विचार


बसपा की ‘सोशल’ रणनीति !

बसपा के संस्थापक नेता कांशीराम प्रेस, मीडिया को ‘मनुवादी’ मानते थे। उनकी दलील थी कि बसपा की सोच और बहसों को मीडिया तोड़-मरोड़ कर छापता है। उस दौर में बसपा प्रेस के किसी भी विमर्श में हिस्सा नहीं लेती थी और सोशल मीडिया तो तब था ही नहीं। अब बसपा में मायावती का दौर है। हालांकि प्रेस से उनके रिश्ते गहरे और आत्मीय नहीं हैं, लेकिन अखबारों के दफ्तरों और खासकर समाचार ब्यूरो में कांग्रेस, भाजपा, वामदलों की तरह बसपा भी एक नियमित बीट है। यानी बसपा प्रमुख मायावती तो प्रेस कान्फ्रेंस करती हैं और कुछ इंटरव्यू भी देती हैं। बदलाव सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। बसपा की चुनावी रणनीति सोशल मीडिया के जरिए भी प्रचार पा रही है और अपनी समर्थक जमातों तक बात पहुंच रही है। सोशल मीडिया में फेसबुक, व्हाट्स ऐप, ट्विटर के जरिए 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने व्यापक प्रचार किया और उसके सुखद नतीजे भी सामने आए। अब लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के ‘वार रूम’ सजाए जाते हैं, तो वे सोशल मीडिया के ही प्लेटफार्म हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव में यह बदलाव बसपा ही नहीं, कई छोटे दलों के संदर्भ में भी दिखाई दिया है। सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर अकसर बसपा का यह नारा पढ़ा-देखा जा सकता है-‘बहन जी को आने दो…।’ यानी प्रचार किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में बहन मायावती की सरकार बनी, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह सुधर जाएगी। गुंडे, माफिया जेलों में होंगे। दंगे नहीं होंगे। सरकार विकास के मुद्दों पर फोकस रखेगी। सोशल मीडिया के जरिए यह भी वोटरों तक बात पहुंचाई जा रही है कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि अकेले उत्तर प्रदेश में ही करीब दो करोड़ युवा पंजीकृत बेरोजगार हैं। यह सरकारी आंकड़ा है, हकीकत इससे भी ज्यादा भयावह हो सकती है। लेकिन बसपा और मायावती खासकर रोजगार को लेकर इस आश्वासन से बचते लगते हैं कि उनकी सरकार सालाना कितने नौजवानों को नौकरी या रोजगार मुहैया कराएगी। हालांकि बसपा में चुनावी घोषणा-पत्र जारी करने का रिवाज नहीं है। कांशीराम इसे ‘फिजूल’ मानते थे, लेकिन अब छोटी-छोटी दस्तावेजी पुस्तिकाएं छापी और बांटी जा रही हैं। मौजूदा चुनावों में मायावती के प्रमुख भाषणों का भी संकलन किया जाएगा। यही पार्टी के घोषणा और दृष्टि, नीति-पत्र हैं। यानी अब बसपा ने अपनी चुनावी रणनीति बदलनी शुरू कर दी है। मायावती की बसपा जातिवादी और सांप्रदायिक भी है। मायावती ने जातीय गणित के आधार पर ही टिकट बांटे हैं। पूरे चुनाव में वह सरेआम मुसलमानों के वोट मांगती रही हैं, जो सांप्रदायिक भी है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन भी। बसपा की तो रणनीति बदल रही है, लेकिन नेताओं की जुबान इतनी जहरीली, भद्दी, असभ्य, अमर्यादित हो गई है कि निजता के स्तर पर टिप्पणियां की जा रही हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी बहुजन समाज पार्टी की नई परिभाषा दी है-बहनजी संपत्ति पार्टी। मायावती भी पलट कर प्रधानमंत्री को ‘दलित-विरोधी व्यक्ति’ करार देती हैं। हदें और भी लांघी गई हैं कि सपा नेता राजेंद्र चौधरी प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ‘आतंकवादी’ मानते हैं और आरएसएस को एक खास तरह का ‘कोढ़’! एक कांग्रेसी नेता ने प्रधानमंत्री और भाजपा के लिए ‘सांप’ शब्द का इस्तेमाल किया है। मुद्दों के तौर पर गाय, बैल, गधे दौड़ रहे हैं। विकास कहीं पीछे छूट गया है मानो जनता को वह चाहिए ही नहीं! क्या हमारे लोकतंत्र में अब इसी तरह चुनाव लड़े जाएंगे?

February 22nd, 2017

 
 

हताशा से भरी भाषा

( रूप सिंह नेगी, सोलन ) इसमें दो राय नहीं कि हाल के कुछ समय से देश के नेताओं ने भाषा के स्तर को न्यूनतम पायदान पर पहुंचा दिया है। इसे दुर्भाग्यपूर्ण और भारतीय मूल्यों के विपरीत ही कहा जा सकता है। उत्तर प्रदेश की […] विस्तृत....

February 22nd, 2017

 

ग्रामोद्योग को रोजगार दे बजट

ग्रामोद्योग को रोजगार दे बजट( रविंद्र सिंह भड़वाल लेखक, ‘दिव्य हिमाचल’ से संबद्ध हैं ) सरकार को अब यह समझना चाहिए कि  केवल बड़ी मशीनें स्थापित करना ही औद्योगिकीकरण नहीं है। लघु एवं मध्यम ग्रामोद्योग भी औद्योगिकीकरण  का हिस्सा हैं। इन्हें  बजट में उचित स्थान मिलना ही चाहिए, क्योंकि […] विस्तृत....

February 22nd, 2017

 

अवैध बनाम वैध

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर ) है अवैध कुछ भी नहीं, वोटों का रखा ध्यान, उन्हें पुरस्कृत वो करें, मिले मान-सम्मान। सरकारी का अर्थ है, मालिक मेरा बाप, नियमित होगा जल्द ही, फिक्र करें मत आप। कब्जा कर ले, फेंक नियम-कानून, जितना चाहे लूट […] विस्तृत....

February 22nd, 2017

 

क्यों उड़ नहीं पा रही एयर इंडिया

अक्षित, आदित्य, तिलक राज गुप्ता, रादौर (हरियाणा) ऐसे समय में जब भारत हर क्षेत्र में प्रगति के नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, अंतरराष्ट्रीय उड्डयन क्षेत्र से भारत के लिए एक बुरी खबर आई है। भारत की एयरलाइन ‘एयर इंडिया’ को विश्व की तीसरी सबसे […] विस्तृत....

February 22nd, 2017

 

कृषि की बदहाली का अर्थशास्त्र

कृषि की बदहाली का अर्थशास्त्रडा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सरकार की प्राथमिकता देश में कृषि उत्पादों के दामों को नियंत्रण में रखना है। देश की बड़ी आबादी शहर में रहती है। यह खाद्य पदार्थों को खरीद कर खाती है। गांव में रहने वाले कुछ परिवार […] विस्तृत....

February 21st, 2017

 

धार्मिक पर्यटन को मिले बजटीय चढ़ावा

धार्मिक पर्यटन को मिले बजटीय चढ़ावाइंदु पटियाल लेखिका, कुल्लू से स्वतंत्र पत्रकार हैं हर हिमाचली को संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में ब्रांड एबेंसेडर की भूमिका निभानी होगी। प्रिटि या कंगना पर करोड़ों लुटाने की क्या जरूरत। प्रदेश सरकार से यह भी अपेक्षा रहेगी कि वह आगामी बजट में पर्यटन क्षेत्र […] विस्तृत....

February 21st, 2017

 

राशन की पुडि़या

हालांकि समझा यह जाता है कि भाषण की हंडिया पर ही गरीबों के राशन की पुडि़या चढ़ती है, लेकिन हिमाचल परिवहन निगम ने राजीव थाली परोस कर कुछ प्रशंसा बटोर ली। परिवहन क्षेत्र को नित नया नाम देने में माहिर मंत्री जीएस बाली ने, राजीव […] विस्तृत....

February 21st, 2017

 

क्या पीएम मोदी ‘बाहरी’ हैं?

क्या देश के प्रधानमंत्री को भी ‘बाहरी’ माना जा सकता है? यदि वह ‘बाहरी’ हैं, तो सांसद कैसे हैं? यदि सांसद के बाद प्रधानमंत्री भी हैं, तो ‘बाहरी’ कैसे हैं? ये गांधी परिवार की बौनी बुद्धि से उपजे सवाल हैं। प्रियंका गांधी औसत शिक्षा वाली […] विस्तृत....

February 21st, 2017

 

संधोल को मिले एसडीएम दफ्तर

(दिनेश नेगी, संधोल, मंडी) देश में शायद ही ऐसी कोई तहसील हो, जहां एसडीएम दफ्तर न हो, लेकिन संधोल तहसील के हिस्से यह दुर्भाग्य आया है। वर्ष 1977 में तहसील बनने के बाद आज तक किसी सरकार ने संधोल में एसडीएम कार्यालय खोलने की जहमत […] विस्तृत....

February 21st, 2017

 
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