शिमला की अनदेखी से पर्यटन पानी-पानी

योगेश कुमार गोयल लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं शिमला से करीब 21 किलोमीटर दूर सतलुज नदी बहती है। 1982 में सतलुज नदी से शिमला को पानी देने के लिए एक सर्वेक्षण किया गया था। तब इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत  27 करोड़ थी, किंतु इन 36 सालों के…

क्यों रूठ गया है आम आदमी ?

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सरकार को चाहिए कि फसलों की खरीद के दाम को बढ़ाने के बजाय किसान को सीधे भूमि के आधार पर सबसिडी दे। वर्तमान में फूड कारपोरेशन दाल को ऊंचे दाम पर खरीदेगी तथा इसे सस्ते दाम पर…

मशीनीकरण ने नष्ट किए परंपरागत जल स्रोत

प्रताप सिंह पटियाल लेखक, बिलासपुर से हैं इसलिए सरकारों को चाहिए कि पेयजल समस्या के लिए ठोस नीति बनाकर धरती को मशीनों से खोखला करने के बजाय परंपरागत जल स्रोतों खासकर तालाबों को पुनर्जीवित करने में प्राथमिकता दें, ताकि बारिश का पानी इनमें…

भिंडरांवाला अभी भी जिंदा है

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं निस्संदेह प्रधानमंत्री (तत्कालीन) इंदिरा गांधी अकालियों को खत्म करना चाहती थीं तथा भिंडरांवाला को चुनौती देते समय उन्हें इसका एक अवसर भी मिला। वास्तव में इसमें उससे कहीं अधिक था जो आंखों ने देखा। एक…

शिक्षा से जुड़े यक्ष प्रश्नों के उत्तर कौन देगा ?

सुगन धीमान लेखक, बद्दी से हैं प्रदेश में 39 स्कूलों का मैट्रिक परिणाम मन में प्रश्नों का ढेर लगाता है। इन शंकाओं का निवारण कैसे होगा? कौन करेगा? कब करेगा? ये सब यक्ष प्रश्न हैं। शायद ये सब प्रश्न सबको जल्दी भूल जाएं, लेकिन अच्छा होगा कि…

अंबेडकर ने समझाया रिलीजन और धर्म का अंतर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं उन्होंने मजहब या रिलीजन शब्द की परिधि निश्चित करते हुए लिखा कि मजहब का अर्थ है-‘ईश्वर में विश्वास, आत्मा में विश्वास, ईश्वर की पूजा, आत्मा का सुधार, प्रार्थना इत्यादि करके ईश्वर को…

शिमला का बोझ कम होने से ही बनेगी बात

हरिमित्र भागी लेखक, सकोह, धर्मशाला से हैं ब्रिटिश सरकार ने अपने शासन काल में ऐसी योजनाएं बनाई थीं कि शिमला में उस समय ऐसी कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई। अब तो टेक्नोलॉजी बड़ी आगे पहुंच चुकी है, तो क्यों नहीं इन समस्याओं से राहत पहुंचाई जा…

हिंदुत्व को नीचा दिखा रही पंथनिरपेक्षता

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हमारे संविधान निर्माताओं को पंथनिरपेक्षता शब्द को संविधान में डालने की जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन बाद में जब वोट की राजनीति का विकास हुआ तो इसे एक आदर्श के रूप में…

हिमाचल में एथलेटिक्स का सफर

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं राज्य में इस समय धर्मशाला व हमीरपुर में दो जगह सिंथेटिक ट्रैक बनकर तैयार हैं तथा बिलासपुर व शिलारू में निर्माणाधीन हैं। राज्य में इस समय कई एथलेटिक्स प्रशिक्षक व शारीरिक शिक्षक कई जगह…

मजबूत सिस्टम रोकेगा भ्रष्टाचार

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यदि सिस्टम मजबूत हो, बेईमानी पर तुरंत सजा होती हो, तो ये लोग बेईमानी की कोशिश नहीं करते। लेकिन यदि वे यह देखें कि बेईमानी करने वाला फल-फूल रहा है, उसे कोई सजा नहीं मिल रही, बल्कि…

जल संरक्षण पर जागरूकता जरूरी

प्रदीप शर्मा लेखक, जवाली से हैं सरकार को चाहिए कि किसी भी भवन के निर्माण के समय वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाए, यह नियम बना दिया जाए। इसी तर्ज पर छोटे-छोटे तालाब, बांध, नाले, डैम भी जनभागीदारी से हर मोहल्ले, गांव, कस्बे और शहर में…

‘धर्म राज्य’ के संविधान की परिकल्पना उपयुक्त नहीं

उपाध्याय जीवन पर्यंत हमारे संविधान के आलोचक रहे। वर्ष 1965 में उन्होंने अपने ‘एकात्म मानववाद’ (Integral Humanism) के सिद्धांतों के तहत इसे बदलने की अपनी योजना प्रस्तुत की। एक नए भारत, ‘धर्म राज्य’ के विषय में उनके विचार भाजपा द्वारा इसके…

वनों की आग की समस्या और उसके समाधान

डा. विवेक शर्मा लेखक, धर्मशाला से हैं पत्ते, झाडि़यां इकठ्ठे कर लिए जाने पर इनका वर्मी कंपोस्ट या केंचुआ खाद भी पर्याप्त मात्रा में बनाई जा सकती है। इससे खर्चीले कृत्रिम खाद विकल्पों से किसानों को छुटकारा मिल जाएगा... गर्मियों के…

तेल के ऊंचे मूल्य का स्वागत कीजिए

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं अमरीका एवं भारत की तुलना करें तो विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार साठ के दशक में भारत की अर्थिक विकास दर 3.4 फीसदी प्रति वर्ष थी, जबकि अमरीका की 4.3 फीसदी। सत्तर एवं अस्सी के…

कर्त्तव्य का पुनः स्मरण

कुलभूषण उपमन्यु अध्यक्ष, हिमालयन नीति अभियान पांच जून विश्व पर्यावरण दिवस एक बार फिर द्वार पर है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि पर्यावरणीय संकट में घिरी पृथ्वी के प्रति हमारे अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए क्या कर्त्तव्य हैं। हमें…