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अकेला पठानिया खूब लड़ेया…

(आरके भार्गव, रिटायर्ड लेक्चरर ) दुनिया भर में अलग-अलग कालखंडों में फली-फूली सभ्यताओं और संस्कृतियों में भारतीय सभ्यता का एक अनूठा महत्त्व व स्थान है। मां भारती की यह विशिष्टता व अद्वितीयता इसलिए भी है, क्योंकि इसकी संतानोें ने व्यक्तिगत और…

हिमाचल के लिए चुनाव के मायने

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं एक दिन मैंने तथा मेरी धर्मपत्नी ने देखा कि महिलाओं का एक समूह शादी समारोह की तरह बढि़या कपड़े पहनकर किसी गांव की ओर जा रहा था। जब उनसे पूछा गया, तो पता चला कि गांव में…

सही नहीं खेलों के प्रति बेरुखी

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं खेल को बढ़ावा देने मात्र से युवाओं में कई सकारात्मक गुणों का विकास किया जा सकता है। युवाओं में प्रतिभा है, पर उसे निखारने के लिए सरकारी पहल की दरकार है। केवल बजट दे देने से बात नहीं बनेगी,…

वोट तक सीमित न हो लोकतंत्र

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य और स्थानीय महत्त्व के मुद्दे गोल कर दिए गए और राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र के मुद्दों के घालमेल का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का प्रयत्न किया…

किसान की व्यथा

विजय शर्मा लेखक, हिम्मर, हमीरपुर से हैं गांवों में बसने वाली हिमाचल की करीब 71 फीसदी आबादी के लिए खेतीबाड़ी ही मूल पेशा है। पिछले एक दशक से ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में बंदरों, लावारिस पशुओं ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। बंदरों के झुंड…

समझें मतदान का मोल

कर्म सिंह ठाकुर लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं मतदान का अवसर पांच वर्षों में एक बार मिलता है, चाहे चुनाव स्थानीय निकाय के हों, विधानपालिका के हों या लोकसभा के। मतदाता के पास अपनी परख से योग्य, अनुभवी व प्रदेश-समाज को आगे ले जाने वाले प्रत्याशी…

हर मत का हो दान

उमा ठाकुर लेखिका, पंथाघाटी, शिमला से हैं चुनाव का महाकुंभ हर उस मतदाता को एक मौका देता है, जो अपने मताधिकार का उपयोग कर लोकतंत्र की मजबूती को सुनिश्चित बनाता है। प्रजातंत्र में मतदाता को मिला यह अधिकार मतदाताओं को सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था…

भारत में क्यों नहीं प्रभावी विपक्ष

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं भाजपा की सफलता उन कारकों की ओर संकेत करती है जो भारत में नए विपक्ष के उभरने को आवश्यक हैं। नए विपक्ष की एक मध्यमार्गी विचारधारा…

तुष्टिकरण का घुन

सचिन नेगी लेखक, बरी, किन्नौर से हैं प्रदेश में सरकार किसी भी दल की रही हो, लेकिन यहां की राजनीति ऐसी रही है कि हिमाचल कभी सही दिशा में नहीं बढ़ सका। हिमाचल में सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले नेताओं में दूरदर्शिता की कमी ही देखने को मिली। उनकी…

शत-प्रतिशत हो मतदान

आशीष बहल लेखक, चुवाड़ी, चंबा से हैं यकीन मानिए हम उसी दिन अपने मत की असली कीमत समझ पाएंगे, जब हम समाज हित को मतदान के साथ जोड़ेंगे। अब्राहम लिंकन  ने बहुत खूबसूरत बात कही थी कि ‘बैलेट, बुलेट से ज्यादा ताकतवर है’। इसी सिद्धांत से लोकतंत्र को…

विरोधी के सार्थक विचारों का हो सम्मान

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं यदि सरकार दूसरे विचारों को सुनती, तो शायद यह गलती न करती। तब लोगों का रुपए के नोट पर भरोसा नहीं टूटता। लोग सोना नहीं खरीदते। अर्थव्यवस्था की गाड़ी के टायर की हवा नहीं निकलती और…

हर राजमार्ग किनारे हो शौचालय सुविधा

नीलम सूद लेखिका, पालमपुर से हैं तमाम राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर सार्वजनिक शौचालयों का अभाव स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ा वह मुद्दा है,  जो हमारे राजनीतिक दलों के लिए कोई खास मायने नहीं रखता। यही वजह है कि प्रतिदिन लाखों की संख्या…

छोटे कारोबारियों को राहत की तैयारी

डा. अश्विनी महाजन  लेखक, पीजीडीएवी कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं हालांकि जीएसटी को एक सरल कर प्रणाली के नाते प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन छोटे व्यापारी और लघु उद्योग वाले इसे अत्यंत पेचीदा कर प्रणाली मान रहे हैं।…

राजनीतिक बाजार की रौनक

कुलदीप चंदेल लेखक, बिलासपुर से हैं सत्ता होगी उनकी, जिनकी पूंजी होगी, जिनके नकली चेहरे होंगे, केवल उन्हें महत्त्व मिलेगा। राजशक्तियां लोलुप्त होंगी, जनता उनसे पीडि़त होकर गहन गुफाओं में छिप-छिप कर दिन काटेगी। ये गहरी गुफाएं प्रतीक हैं, आज…

निज भाषा में न्याय की वकालत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केरल में न्यायविदों और न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों से बातचीत करते हुए कहा कि न्यायालयों को न्याय उन लोगों की भाषा में ही करना चाहिए, जो लोग न्याय पाने…
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