महज एक दिन काफी नहीं

कर्म सिंह ठाकुर लेखक, मंडी से हैं मनुष्य तथा पर्यावरण दोनों परस्पर एक-दूसरे के इतने संबंधित हैं कि उन्हें अलग करना कठिन है। जिस दिन पर्यावरण का अस्तित्व मिट गया, उस दिन मानव जाति का अस्तित्व ही मिट जाएगा। पर्यावरण को बचाने के लिए…

प्रणब का एक और गलत कदम

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं कांग्रेस में कुछ ऐसे सदस्य भी हैं जो यह विश्वास कर रहे हैं कि प्रणब आरएसएस के मंच से बहुलतावाद पर कोई प्रभावी संदेश देंगे। इसी तरह की भावनाएं व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा है कि…

नशा उन्मूलन को यह मुहिम नाकाफी

कर्म सिंह ठाकुर लेखक, मंडी से हैं समाज से नशे को उखाड़ने के लिए सरकार द्वारा सख्त नियमों का निर्वहन व स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा नशे के दुष्परिणामों के प्रति निरंतर मुहिम शुरू करनी होगी। एक दिन दिवस मना कर कुछ नहीं होगा, जब तक यह दिवस…

चुनाव नतीजों के स्पष्ट संकेत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं इन चुनावों का एक संकेत स्पष्ट है। खासकर उत्तर प्रदेश में। वहां भाजपा बनाम सभी शेष दलों के बीच मुकाबला था, लेकिन जीत का अंतर इतना नहीं था, जिसका यह अर्थ निकले कि चुनाव एकतरफा हो गया…

वनों को न बनाएं आग का दरिया

बचन सिंह घटवाल लेखक, मस्सल, कांगड़ा से हैं तापमान का निरंतर बढ़ता पारा हिमाचल पर कहर बन कर टूटता है और प्रत्येक वर्ष आगजनी की असंख्य घटनाएं हमें रुला जाती हैं और हम मूकदर्शक बनकर साल-दर-साल करोड़ों का नुकसान ही नहीं झेलते, बल्कि वनों के…

हिमाचल की कोई विमानन नीति नहीं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं मैं मुख्यमंत्री से अपील करना चाहूंगा कि हमें एक ऐसी विमानन नीति बनानी चाहिए, जो राज्य के विकासपरक हितों को समुचित रूप से संबोधित करे। हमें राजनीतिक नजरिए से विमानन…

उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद भी इनाम कम क्यों?

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं इसी तरह राष्ट्रमंडल खेलों के विजेता को डेढ़ करोड़, उपविजेता को 75 लाख, तीसरे स्थान पर आने वाले को पचास लाख रुपए तथा क्वालिफाई कर देश का प्रतिनिधित्व करने पर साढ़े सात लाख रुपए का नकद…

मोदी को जनता के सवाल बूझने होंगे

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जो लोग पहले कहते थे कि मोदी ही अकेले विकल्प हैं और मोदी ये कर देंगे वो कर देंगे, बाद में कहने लग गए कि मोदी अकेला क्या कर लेगा, कुछ और पूछो तो जवाब मिलता है कि कांग्रेस ने क्या…

जल संकट से जूझता हिमाचल

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं आने वाले समय में पानी के लिए जंग अब अवश्यंभावी प्रतीत हो रही है, फिर भी स्वार्थी मानव अपनी प्रवृत्ति से बाज नहीं आ रहा है।  जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के चलते जलधाराओं का रुख मोड़ने के कारण आज…

राज्यों का राजस्व कम होने की आशंका

अश्विनी महाजन लेखक, एसोसिएट प्रोफेसर, पीजीडीएवी कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय हैं यूं तो जब भी नए वित्त आयोग का गठन होता है तो उसकी संदर्भ की शर्तों पर हमेशा से ही बहस चलती है। लेकिन इस बार यह बहस ज्यादा तीखी या यूं कहें कि कड़वी हो गई…

किसानों व कृषि को बचाने की जरूरत

संजय ठाकुर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं यह एक विडंबना ही है कि जिसके इर्द-गिर्द देश की लगभग पूरी अर्थव्यवस्था घूमती है, उसी कृषि पर कुल बजट का सिर्फ 3.7 प्रतिशत धन ही खर्च किया जा रहा है। कृषि की इससे अच्छी स्थिति तो तब थी, जब भारत देश आजाद…

आम आदमी की अनदेखी का नतीजा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं जनधन योजना से जितनी रकम बैंकों में जमा हुई है, उसकी लगभग तिहाई रकम ही ऋण के रूप में गरीबों को दी गई है। दो-तिहाई रकम जन धन के माध्यम से उद्यमियों को पहुंचा दी गई। खाद्य सबसिडी…

प्रकृति के पावरहाउस वनों का संरक्षण जरूरी

राकेश शर्मा लेखक, जसवां, कांगड़ा से हैं वन हमारी प्रकृति के पावरहॉउस हैं, क्योंकि प्रकृति हमें जो भी देती है उसमें किसी न किसी रूप में वनों का योगदान हमेशा रहता है। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि संपूर्ण प्रकृति का विकास किसी न किसी रूप…

भारत के बहुलतावाद को चुनौती

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं अगर विभिन्न समुदायों के धार्मिक प्रमुख राजनीतिक अखाड़े में उतर आते हैं, तो वे राजनीति से दूर नहीं माने जाएंगे, जबकि उन्हें इससे दूर रहना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुख्य आलोचना यह है…

खेल महाकुंभ से निकलेंगी प्रतिभाएं

विकास ठाकुर लेखक, हमीरपुर से अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर हैं यह खेल महाकुंभ खेल में रुचि रखने वाले अभावग्रस्त खिलाडि़यों की तकदीर बदलने वाला साबित होगा। हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र देश का इकलौता ऐसा संसदीय क्षेत्र है, जहां खेल और खिलाडि़यों को…