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गणतंत्र दिवस पुरस्कारों में पक्षपात

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं गणतंत्र दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, विशेषकर सैन्य कर्मियों को देश के भीतर व सीमा पर अद्भुत शौर्य प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाता है। निस्संदेह ये लोग हर तरह से इस सम्मान के हकदार हैं,…

शून्य लागत खेती से होगा नए युग का सूत्रपात

अजय पाराशर लेखक, सूचना एवं जन संपर्क विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय, धर्मशाला में उप निदेशक हैं कुल मिलाकर आध्यात्मिक कृषि को स्व अर्थात खुद से जुड़ने का मार्ग भी कहा जा सकता है, क्योंकि यह संघर्षमुक्त या हिंसामुक्त आध्यात्मिक कृषि है। यह…

प्रदेश हित में जयराम को तपना पड़़ेगा

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं प्रदेश को विकास की अपनी प्राथमिकताएं जल्द तय करनी चाहिएं। चिन्हित लक्ष्यों पर एक समय सीमा के भीतर काम होना चाहिए। पहली प्राथमिकता पर्यटन है, लेकिन इसका विकास सड़कों, रेल…

रामसिंह की धुन में गुंथे राष्ट्रभक्ति के तराने

राजेंद्र राजन लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं बहुत कम लोग जानते हैं कि कैप्टन रामसिंह ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता’ की मूल धुन तैयार की थी। जिस राष्ट्र गान ने समूचे राष्ट्र को एक माला में पिरोया, उसके जन्मदाता कैप्टन…

व्यवस्थागत बेड़ियों ने जकड़ा स्मार्ट इंडिया

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं आम आदमी का रोजमर्रा का वास्ता स्थानीय स्वशासन और राज्य सरकार से है, जबकि यह हमारी शासन व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी है। शहरों में पार्षद, विधायक, सांसद चुने जाते हैं, लेकिन उनकी…

सरकार की गागर में सागर का हिसाब रखना

डा. विनोद गुलियानी लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं सांस्कृतिक संध्याओं में गानों के नाम पर चहेतों को खुश कर आखिर हम कौन सा सांस्कृतिक विकास करते रहे हैं? अफसरों की टोली मंत्रियों के आगे-पीछे घूमने के बजाय, अपने कार्यालयों में बैठकर जनहित से…

भूख और खाद्यान्न के बीच का संकट

राजकुमार कुंभज लेखक, वरिष्ठ कवि एवं लेखक हैं देश में खाद्यान्न भंडारण और उसके रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण हजारों-लाखों टन खाद्यान्न यूं ही बर्बाद हो जाता है और खाद्यान्न की कमी बनी रहती है। देश में खाद्यान्न की कमी को दूर…

विज्ञान के सहारे हो जल का प्रबंधन

राकेश शर्मा लेखक, भू-जल विज्ञानी हैं पानी के रखरखाव और प्रबंधन के लिए परंपरागत विधियों के साथ-साथ वैज्ञानिक हस्तक्षेप भी बहुत जरूरी है। यह कार्य कोरी खानापूर्ति के बजाय सतह पर नजर आना चाहिए। इसके लिए, प्राकृतिक जल संसाधनों से जुड़ी तमाम…

तेल कीमतें ऊंची ही रहने दें

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं पेट्रोल पर ऊंचे कर बनाए रखने से ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का विकास होगा। जैसे बिजली से चलने वाली कार की तुलना में पेट्रोल से चलने वाली कार सस्ती होती है। पेट्रोल सस्ता होगा तो लोग…

शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की चुनौती

सुरेश शर्मा लेखक, राजकीय महाविद्यालय नगरोटा बगवां में सह-प्राध्यापक हैं वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक और अधिकारी कोई भी संतुष्ट नहीं दिखता। बड़े-बड़े शिक्षा अभियानों में संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। इन योजनाओं…

न्यायालय की नैतिक सत्ता को आघात

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं जस्टिस खन्ना ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि लोकतांत्रिक समाज के लोकतांत्रिक मूल्य कहते हैं कि सभी लोगों को जागरूक होना चाहिए और बलिदान के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि भारत के लिए यह लक्ष्य अभी…

पूर्व सैनिकों के हित में

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि होने का गौरव प्राप्त है। राष्ट्र की हिफाजत में दिए जाने वाले योगदान के दृष्टिगत हिमाचल की लगभग सभी सरकारें सेवारत, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के…

खटकने क्यों लगे वित्तीय लाभ

मेवरिक रोशन चौहान लेखक, सुंदरनगर से हैं कोई भी देश अपनी सेना की वजह से ताकतवर माना जाता है। अगर देश चैन की नींद सोता है, तो उसकी वजह भी सेना ही है।  जब देश के लोग सो रहे होते हैं, तो देश का सैनिक सरहदों पर जाग रहा होता है। एक सैनिक होने का…

मीरी-पीरी की प्रेरक परंपरा

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं गुरु ग्रंथ साहिब के नाम से कालांतर में प्रसिद्ध होने वाले इस महान ग्रंथ ने देश में एक नए उत्साह का संचार करना शुरू कर दिया। उसके बाद देश के इतिहास की धारा ही बदल गई, लेकिन इसका मूल्य…

आधी आबादी को अधूरा प्रतिनिधित्व

कंचन शर्मा लेखिका, शिमला से हैं 68 सदस्यीय हिमाचल विधानसभा में केवल तीन महिलाएं ही चुनी गईं। जब महिलाएं बढ़-चढ़कर प्रचार-प्रसार में हिस्सा ले रही हैं, तो टिकट आबंटन के वक्त महिलाओं को तवज्जो क्यों नहीं दी जाती? राजनीति में महिला भागीदारी का…
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