himachal pradesh news, himachal pradesh top stories, himachal pradesh tourism

राष्ट्रपति होने की कसौटी

कुलदीप नैयर लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यदि हम भूतकाल पर नजर डालें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच मतभेद होना सामान्य बात है। केवल डा. जाकिर हुसैन और फखरुद्दीन अली अहमद ने बिना किसी सार्वजनिक टकराव के अपना कार्यकाल…

आर्थिकी को अपाहिज बनातीं खस्ताहाल सड़कें

गुरुदत्त शर्मा लेखक, शिमला से हैं यदि सड़कें सही हालत में होंगी तो हमारे कृषक व बागबान अपने उत्पाद को मंडी तक आसानी से पहुंचा सकते हैं नहीं तो उन्हें मंडी तक अपना उत्पाद पहुंचाने में बहुत कठिनाई होगी। जल्दी नष्ट होने वाले फल व सब्जियों को…

घातक योजना के निशाने पर सेना

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं मणि शंकर अय्यर पाकिस्तान में जाकर टीवी चैनल पर कहते हैं कि  यदि पाकिस्तान भारत के साथ मधुर रिश्ते चाहता है तो उसे मोदी सरकार को भारत की सत्ता से हटाना पड़ेगा  कार्यक्रम को संचालित कर रहे…

खतरनाक है खेत-खलिहान के प्रति बेरुखी

हरि मित्र भागी लेखक, सकोह, धर्मशाला से हैं किसान के चेहरे पर खुशी व लाली लानी होगी, तभी देश खुशहाल होगा। यह तो विडंबना है कि मृत किसान के परिवार को मध्य प्रदेश सरकार एक करोड़ रुपए व नौकरी दे रही है तो बेहतर है, जीते जी उसकी समस्या का समाधान…

जवाबदेही से तय होती है पत्रकारीय स्वतंत्रता

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं ताकतवर लोगों के साथ संबंध बनाना मीडिया के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही पेशेवर नैतिकता को बनाए रखना भी मीडया की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। दिल्ली में ऐसे चिन्हित स्थान…

क्षेत्रवाद की जकड़न में प्रदेश की संभावनाएं

सूरज धीमान लेखक, वसुधा संस्था के चेयरमैन  हैं धर्मशाला को विश्वस्तर की स्पोर्ट्स सिटी के तौर पर विकसित किया जा सकता है। पालमपुर और मनाली में फिल्म सिटी का निर्माण किया जा सकता है। सोलन और हमीरपुर को शिक्षा के हब के रूप में और अच्छे से…

आंदोलन की राह पर खेती-किसानी

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह कोई अजूबा नहीं है कि सब्जी मंडी में मूली का भाव एक रुपए किलो हो और मंडी के गेट के बाहर वही मूली दस रुपए किलो के भाव से बिक रही हो। केंद्र सरकार इसे राज्य सरकार का मामला बता कर पल्ला…

‘उड़ान’ से हिमाचली पर्यटन को लगेंगे पर

हेमराज कपूर लेखक, बकाणी चंबा से हैं केंद्र सरकार ने सस्ती हवाई सेवा शुरू कर के आम आदमी की आशाओं को पंख लगाए हैं। आम आदमी की उम्मीदों को उड़ान दी है। अब लगता है प्रदेश के आगे बढ़ने का समय आ गया है। सब ने केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत करते…

‘राष्ट्रपति’ मोदी सुधार सकते हैं भारतीय संविधान

भानु धमीजा ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं मोदी के राष्ट्रपति बनने से हमारे देश के शासन को बड़े लाभ होंगे। लगातार राजनीति करने के बजाय वह अपना सारा ध्यान नीतियां लागू करने पर लगा…

पानी की भूख से संकट में भविष्य

बचन सिंह घटवाल लेखक, मस्सल, नगरोटा से हैं पेयजल की अनदेखी व नलों के अतिरिक्त जल को घर में व्यर्थ न बहाने की सोच पर आज पूर्णतया अंकुश लगाने की जरूरत है। जलीय स्रोत सिमट कर न रह जाएं और हमारी भावी पीढ़ी जल की विकट समस्या से जूझते हुए हमें…

सीधी सबसिडी ही सही समाधान

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं कृषि विषयों के जानकार देवेंदर शर्मा के अनुसार 1970 से 2015 के बीच खाद्यान्न के समर्थन मूल्य मे 20 गुना वृद्धि हुई है। इसी अवधि मे सरकारी कर्मियों के वेतन मे 120 गुणा वृद्धि हुई है।…

विकास को नकारती भ्रष्टाचार की विषबेल

कर्म सिंह ठाकुर लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं जब  तक सरकारी तंत्र में पारदर्शिता व योग्यता के आधार पर चयन नहीं होगा, तब तक समाज में सुधार नहीं हो सकता। यही कारण है कि भ्रष्टाचार व अपराध प्रदेश को दिन-प्रतिदिन शर्मसार कर रहे हैं। सामाजिक…

चिंताजनक है असहमति से शत्रुता

कुलदीप नैयर लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि ये मनगढ़ंत आरोप हैं। राधिका और प्रणव रॉय इस तरह के लोग नहीं हैं और उन्होंने खुद को अपने तरीके से गढ़ा है। उनसे कुछ तकनीकी गलतियां हो सकती हैं, लेकिन सीबीआई ने आरआरपीआर, प्रणव…

मत भूलें कि किसान है तो जहान है

मोहिंद्र सिंह चौहान लेखक,नेरी, हमीरपुर से हैं देश चाहे कितना भी परमाणु शक्ति संपन्न बन जाए, पर यदि उस देश का किसान कर्ज में डूब कर आत्महत्या कर लेता है, तो उस परमाणु शक्ति संपन्नता के कोई मायने नहीं हैं। देश को समृद्ध बनाना है, तो किसान को…

केंद्रित हो कृषि, चिकित्सा और शिक्षा

(डा. दिलीप अग्निहोत्री लेखक, स्तंभकार हैं ) कृषि, जल व स्वास्थ्य जैसे विषयों को छात्र राजनीति में प्रायः अहमियत नहीं मिलती है। लेकिन विद्यार्थी परिषद ने इस अवधारणा को बदला है। छात्र संघ का चुनाव लड़ना, जीतना, शिक्षण-संस्थानों, शिक्षा…
?>