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क्या आत्मघात से बच पाएगी कांग्रेस-2

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं कांग्रेस में एक दोष संगठन को गढ़ने में विफलता और वफादार दरबारियों पर बढ़ती निर्भरता को माना जाएगा। संगठन में आंतरिक लोकतंत्र के लिए यहां न तो वास्तविक चुनाव करवाए जाते…

सामाजिक समरसता के नायक को नमन !

( भावना शर्मा लेखिका, एचपीयू, शिमला में सहायक प्रोफेसर हैं ) जहां तक बाबा साहेब के आंदोलन का प्रश्न है, वह दलितों में चेतना जगाने में सफल रहे। वह दलितों के हिसाब से ही नहीं सोचते थे, बल्कि समाज के सभी शोषित वर्गों के लिए काम करना चाहते थे।…

संसदीय प्रणाली के स्याह पक्ष

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं समस्या यह है कि शालीन विरोध का सरकार पर कोई असर नहीं होता और मंत्रिगण कानून में बदलाव के विपक्ष के किसी सुझाव को मानने के लिए तैयार नहीं होते। परिणामस्वरूप अपनी उपस्थिति जताने तथा जनता…

ई-बस्तों से बांटें बच्चों का बोझ

अदित कंसल लेखक, नालागढ़, सोलन से हैं पुस्तकों, पेंसिल बॉक्स, पानी की बोतल, लंच बॉक्स, प्रोजेक्ट वर्क, स्क्रैप बुक इत्यादि को मिलाकर बस्ते का औसतन भार आठ किलोग्राम तक हो जाता है। प्रातःकालीन व दोपहर को स्कूल बस में चढ़ते-उतरते बच्चों को…

राष्ट्रपति प्रणाली के पक्ष में खुलकर उतरे थरूर प्रशंसा के पात्र

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं वर्ष 1963 में निष्ठावान कांग्रेसी और संविधान सभा के सदस्य केएम मुंशी ने लिखा कि ‘‘अगर मैं फिर से चुन पाऊं तो मैं राष्ट्रपति…

नशे की भट्ठी में जलती युवा शक्ति

( बचन सिंह घटवाल लेखक, मस्सल, कांगड़ा से हैं ) युवाओं के सुंदर भविष्य को नशा दीमक की तरह उन्हें चाट रहा है। धूम्रपान व शराब से लेकर हेरोइन, गांजा व नशीले कैप्सूलों के कारोबार का आज जैसे जाल सा बिछ गया है। नशे का आदी नवयुवक अपने शरीर से ऐसे…

डब्ल्यूटीओ के कुचक्र से निकलने का वक्त

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं ) हमें मुक्त व्यापार के मूल सिद्धांत पर पुनर्विचार करना चाहिए। डब्ल्यूटीओ 1995 में लागू हुआ था। तब सोचा गया था कि यह व्यवस्था सभी के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। बीते 20 वर्षों में…

अछूती मंजिल तक पर्यटक ले जाने की चुनौती

( अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं ) घरेलू पर्यटन में वार्षिक 15.5 फीसदी की दर से तेजी आई है, लेकिन शीर्ष 10 राज्यों में हिमाचल अभी भी बहुत पीछे है। प्रदेश में पर्यटकों की तादाद बढे़, इसके लिए बिलिंग की तर्ज पर अनेक पर्यटक स्थलों को…

सत्ता के मद में विवेक का हरण

( ललित गर्ग लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं ) जिस तरह सांसद होने के बावजूद गायकवाड़ ने निम्न स्तर की हरकत करते हुए कर्मचारी की पिटाई करने एवं उसे अपमानित करने का कार्य किया, वह कहीं से भी किसी सांसद के गरिमामय पद के अनुकूल नहीं था। ऐसे कार्य की…

नशाखोरी पर समाज की भावना भी तो समझें

( कर्म सिंह ठाकुर लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं ) शराब जहां कारोबारियों के लिए भारी-भरकम मुनाफे का सौदा है, वहीं राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का मार्ग प्रशस्त करती रही है। दूसरी तरफ सरकारों के लिए आमदनी का प्रमुख स्रोत भी है। लेकिन नशाखोरी से…

केजरीवाल की गरीबी रेखा

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री  लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं जेठमलानी की नजर में मुकदमा लेते समय तो केजरीवाल अमीर थे और फीस देते समय अचानक गरीब हो गए हैं। इसलिए अब वह उनका मुकदमा मुफ्त लड़ेंगे। जेठमलानी की पारखी नजर को मानना पड़ेगा। सारे देश में…

कुटिल षड्यंत्रों में उलझा गोवंश

कंचन शर्मा लेखिका, स्वतंत्र पत्रकार हैं गोवंश हत्या कोई धर्म, जाति या समुदाय का झगड़ा नहीं, अपितु यह भारत की अर्थव्यवस्था को क्षीण करने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। इसके तहत लार्ड मैकाले ने न केवल भारत की शिक्षा प्रणाली को कमजोर किया, बल्कि…

आत्मघात से बच पाएगी कांग्रेस ?

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली में पांच खामियां स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती हैं और इन्हें बिना वक्त गंवाए दूर करने की महत्ती जरूरत है, लेकिन पार्टी में कोई भी इसको लेकर…

लावारिस पशुओं को उपयोगी बनाएं

प्रेम भावटा लेखक, रोहड़ू, शिमला से हैं लावारिस पशुओं को चिन्हित कर उनके लिए चरागाहों की व्यवस्था की जाए। सरकार की देखरेख में पशु मेले भी आयोजित किए जा सकते हैं, जिसमें कृषि व भार-वहन हेतु पशुओं की वैध बिक्री संभव हो सकती है। जब तक पशुओं को…

लोकतंत्र की नई खिड़की

पीके खुराना पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं धमीजा का मानना है कि हमें खुले दिमाग से सोचना चाहिए। बंद दिमाग या तंग दिमाग समाज के पतन का कारण बनता है। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित धमीजा की पुस्तक हिंदी में होने के…
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