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फिजूलखर्ची को विकास में रोड़ा मानते थे नेहरू

प्रकाश चौधरी लेखक, समूला, पालमपुर से हैं आजकल उद्घाटन समारोह पर ही इतना पैसा उड़ा दिया जाता है, जितना उस परियोजना पर भी नहीं लगता है। प्रदेश और देश को गरीब इस तरह के दिखावों ने ही किया है। जितना बड़ा ओहदा, उतना ही बड़ा गाडि़यों का काफिला।…

चीन की फितरत को समझना होगा

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं हाल में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा से बीजिंग क्रोधित हो उठा है। चीन व भारत शायद ही कभी इस बात पर सहमत हुए हों कि वास्तविक सीमा रेखा कहां है। बीजिंग ने 1962 में भारत पर उस…

बढ़ते कर्ज से बिगड़ता वित्तीय गणित

हेमराज कपूर लेखक, चंबा से हैं प्रदेश द्वारा लिए जाने वाले ऋण का आंकड़ा 45 हजार करोड़ की सीमा तक पहुंच चुका है। इस बढ़ते ऋण भार का मुख्य कारण बढ़ता गैर योजनागत व्यय है, जबकि योजनागत व्यय कम हो रहा है। योजनागत व गैर योजनागत व्यय में बढ़ते…

घाटी में आतंक की कहानी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं 1947 में कश्मीर एक बार फिर पाकिस्तान के हमले का शिकार हो गया। गोरों की साम्राज्यवादी साजिशों के चलते रियासत का काफी हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में अब तक भी है। वहां के बल्ती और दरदी अभी भी…

अकेला पठानिया खूब लड़ेया…

(आरके भार्गव, रिटायर्ड लेक्चरर ) दुनिया भर में अलग-अलग कालखंडों में फली-फूली सभ्यताओं और संस्कृतियों में भारतीय सभ्यता का एक अनूठा महत्त्व व स्थान है। मां भारती की यह विशिष्टता व अद्वितीयता इसलिए भी है, क्योंकि इसकी संतानोें ने व्यक्तिगत और…

हिमाचल के लिए चुनाव के मायने

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं एक दिन मैंने तथा मेरी धर्मपत्नी ने देखा कि महिलाओं का एक समूह शादी समारोह की तरह बढि़या कपड़े पहनकर किसी गांव की ओर जा रहा था। जब उनसे पूछा गया, तो पता चला कि गांव में…

सही नहीं खेलों के प्रति बेरुखी

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं खेल को बढ़ावा देने मात्र से युवाओं में कई सकारात्मक गुणों का विकास किया जा सकता है। युवाओं में प्रतिभा है, पर उसे निखारने के लिए सरकारी पहल की दरकार है। केवल बजट दे देने से बात नहीं बनेगी,…

वोट तक सीमित न हो लोकतंत्र

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य और स्थानीय महत्त्व के मुद्दे गोल कर दिए गए और राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र के मुद्दों के घालमेल का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का प्रयत्न किया…

किसान की व्यथा

विजय शर्मा लेखक, हिम्मर, हमीरपुर से हैं गांवों में बसने वाली हिमाचल की करीब 71 फीसदी आबादी के लिए खेतीबाड़ी ही मूल पेशा है। पिछले एक दशक से ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में बंदरों, लावारिस पशुओं ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। बंदरों के झुंड…

समझें मतदान का मोल

कर्म सिंह ठाकुर लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं मतदान का अवसर पांच वर्षों में एक बार मिलता है, चाहे चुनाव स्थानीय निकाय के हों, विधानपालिका के हों या लोकसभा के। मतदाता के पास अपनी परख से योग्य, अनुभवी व प्रदेश-समाज को आगे ले जाने वाले प्रत्याशी…

हर मत का हो दान

उमा ठाकुर लेखिका, पंथाघाटी, शिमला से हैं चुनाव का महाकुंभ हर उस मतदाता को एक मौका देता है, जो अपने मताधिकार का उपयोग कर लोकतंत्र की मजबूती को सुनिश्चित बनाता है। प्रजातंत्र में मतदाता को मिला यह अधिकार मतदाताओं को सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था…

भारत में क्यों नहीं प्रभावी विपक्ष

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं भाजपा की सफलता उन कारकों की ओर संकेत करती है जो भारत में नए विपक्ष के उभरने को आवश्यक हैं। नए विपक्ष की एक मध्यमार्गी विचारधारा…

तुष्टिकरण का घुन

सचिन नेगी लेखक, बरी, किन्नौर से हैं प्रदेश में सरकार किसी भी दल की रही हो, लेकिन यहां की राजनीति ऐसी रही है कि हिमाचल कभी सही दिशा में नहीं बढ़ सका। हिमाचल में सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले नेताओं में दूरदर्शिता की कमी ही देखने को मिली। उनकी…

शत-प्रतिशत हो मतदान

आशीष बहल लेखक, चुवाड़ी, चंबा से हैं यकीन मानिए हम उसी दिन अपने मत की असली कीमत समझ पाएंगे, जब हम समाज हित को मतदान के साथ जोड़ेंगे। अब्राहम लिंकन  ने बहुत खूबसूरत बात कही थी कि ‘बैलेट, बुलेट से ज्यादा ताकतवर है’। इसी सिद्धांत से लोकतंत्र को…

विरोधी के सार्थक विचारों का हो सम्मान

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं यदि सरकार दूसरे विचारों को सुनती, तो शायद यह गलती न करती। तब लोगों का रुपए के नोट पर भरोसा नहीं टूटता। लोग सोना नहीं खरीदते। अर्थव्यवस्था की गाड़ी के टायर की हवा नहीं निकलती और…
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