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पहाड़ में फिर बही बदलाव की बयार

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं हिमाचल में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। उम्मीद है कि सरकार के मुखिया का चयन होने के बाद नई सरकार प्रदेश के लोगों की विकास के प्रति चाहत को परवान चढ़ाने के लिए कार्य करेगी। इन चुनावों को सत्ता…

और बेहतर कर सकता है बांग्लादेश

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं बांग्लादेशी लोगों को पाकिस्तान यह बात याद दिला रहा है कि वे पूर्वी पाकिस्तान के हिस्से के रूप में ही ठीक थे, अब उनकी स्थिति ठीक नहीं है। इससे भारत विरोधी भावनाएं भी फैल रही हैं, क्योंकि उसे एक शोषक के…

नई सरकार से अपेक्षाओं का अंबार

विजय शर्मा लेखक,दरब्यार, हमीरपुर हैं पिछले तीन दशकों से हिमाचल में यह परंपरा सी बन गई है कि कभी एक पार्टी की सरकार रिपीट नहीं हुई है। अब देखते हैं क्या इस बार यह परंपरा टूटेगी या फिर अदला-बदली ही होगी। चाहे कुछ भी हो, सत्ता की कुर्सी पर…

‘राहुल बने अध्यक्ष’ में खबर क्या थी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हैं, इसमें भला खबर क्या है? अध्यक्ष तो वह उसी दिन बन गए थे, जिस दिन पैदा हुए थे। राजा के घर जब बेटा पैदा होता है, तो प्रजा को पता ही होता है कि समय…

कहीं फोरलेन के नीचे दब न जाए यह चीख

डा. एलआर शर्मा लेखक, कालेज काडर के पूर्व प्राचार्य हैं आश्चर्य तो इस बात का है कि राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल किसी चट्टान पर एक स्लोगन लिखने का तो संज्ञान लेता है, परंतु इस शिमला-धर्मशाला राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में होने वाली विनाश…

सियासत में धर्म अब ज्यादा स्वीकार्य

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं देश के कई राज्यों में पराजय से उपजी निराशा के बाद कांग्रेस ने अपने नजरिए में परिवर्तन किया है और वह अब मोदी का मुकाबला उन्हीं की शैली में कर रही है। राजनीति और धर्म का इस…

शिवा के अनुभव का लाभ ले हिमाचल

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं अब तक शिवा केशवन एशियाई स्तर पर चार स्वर्ण, चार रजत व दो कांस्य पदक देश के लिए जीत चुके हैं। अब समय आ गया है जब शिवा केशवन जैसे अनुभवी वरिष्ठ खिलाडि़यों का प्रशिक्षण अनुभव हमारे होनहार किशोर व…

शराबबंदी लागू करे नई सरकार

डा. ओपी शर्मा लेखक, शिमला से हैं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें दो समय की रोटी मिले न मिले, पर शराब जरूर चाहिए। बीवी, बच्चे दुखी हों, तो होते रहें, किसे परवाह है इनकी। कितने ही परिवार बर्बाद हो रहे हैं, पर किसी को चिंता नहीं। अपराध में…

बेलगाम सत्ता पर लगे विपक्ष की नकेल

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह अत्यंत खेद की बात है कि प्रधानमंत्री के विरोध को देशद्रोह का दर्जा दिया जाने लगा है। सरकार की यह मनमानी इसलिए चल रही है कि देश में प्रभावी विपक्ष नहीं है। सत्ता में भाजपा हो,…

हिमालय का सांस्कृतिक अवदान

कुलभूषण उपमन्यु लेखक, हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष हैं हिमालय ने हमें जैव विविधता के साथ सांस्कृतिक विविधता का भी अवदान दिया है। पर्वतों की ढालों पर और नदियों के पवित्र संगमों में ही विद्वानों और ऋषियों की मेधा अनुप्राणित हुई। हिमालय के…

प्रताप सिंह पटियाल

लेखक, बिलासपुर से हैं सियासी नेतृत्व में उपेक्षित सैन्य समाज 20 अक्तूबर, 1962 का दिन भारतीय इतिहास में बहुत खास था, जब पड़ोसी देश चीन ने विश्वासघात करके भारत पर हमला कर दिया। एक सच्चा भारतीय होने के नाते उस युद्ध का परिणाम हमारे गले अब तक…

भारत के संविधान की समीक्षा अब आवश्यक

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं संविधान के कार्यचालन की समीक्षा को गठित राष्ट्रीय आयोग द्वारा किया गया अंतिम पुनर्मूल्यांकन शुरुआत से ही राजनीति का शिकार हो…

स्वास्थ्य तंत्र की बिगड़ी सेहत

विजय शर्मा लेखक, दरब्यार, हमीरपुर से हैं प्रदेश की 739 पंचायतों में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है और जहां कोई स्वास्थ्य केंद्र है भी, वहां डाक्टरों और दवाइयों का अभाव है। आपात स्थिति चिकित्सकों की सेवाएं, एंबुलेंस या प्राथमिक उपचार की कोई…

धरातल पर उतरें राजमार्ग योजनाएं

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं हिमाचल प्रदेश में 90 वर्ष पूर्व अंग्रेजों के शासनकाल में पठानकोट-जोगिंद्रनगर और कालका-शिमला के बीच बिछाई गई रेल लाइनों के अलावा यातायात का यदि अन्य कोई बड़ा विकल्प है, तो वह सड़क मार्ग ही है। हिमाचल…

किसान नहीं, सरकार बचाए गाय को

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सरकार को चाहिए कि देशी गाय, विदेशी गाय एवं भैंस के दूध के गुण के इस अंतर को जनता तक पहुंचाए जिससे देशी गाय के दूध की बाजार में मांग बढ़े, लोग इस दूध का ऊंचा दाम अदा करें तथा किसान…
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