कठुआ-जज लोया में एक ही स्क्रिप्ट

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं मुख्य मीडिया घरानों ने सभी को बताया कि ध्यान रखना चाहिए लड़की मुसलमान थी। उन्होंने लड़की का नाम भी बता दिया। अब मामला सीधा-साधा हिंदू  मुसलमान का बन सकता था। यह ठीक है कि उच्चतम…

कैसे समाप्त हो राज्य के बोर्डों व निगमों का घाटा

गुरुदत्त शर्मा लेखक, शिमला से हैं प्रदेश में 11 निगम व बोर्ड  घाटे में चल रहे हैं। इन बोर्डों व निगमों के विनिवेश व निजीकरण की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए और उससे प्राप्त धन राशि का उपयोग सामाजिक क्षेत्र की जरूरतों की पूर्ति, सार्वजनिक…

कठुआ कांड जिहाद का नया रूप

विनोद कुमार लेखक, गाजियाबाद से हैं हिंदुओं की पुण्य भूमि ‘भारत’ को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए सैकड़ों वर्षों से जिहाद जारी है। इतिहास साक्षी है कि समय के साथ-साथ जिहाद भी नित्य नए-नए रूप लेते जा रहा है। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय एकता व…

निर्दोष लोगों की कातिल बनती हिमाचली सड़कें

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हादसे के बाद शवों के पोस्टमार्टम हुए, राजनीतिज्ञों व नेताओं की ओर से हमेशा की तरह संवेदनाएं आईं और समय बीतने के साथ इस हादसे को हमेशा की तरह भुला दिया जाएगा। इस मामले…

हिमाचल में खेल वातावरण कब तक

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं राज्य में खेल संस्थान की मांग पिछले एक दशक से हो रही है, ताकि उसमें प्रशिक्षण दिलाने वाले प्रशिक्षकों को पंजाब व अन्य राज्यों की तरह अनुबंधित किया जा सके। ये ही यहां खोजे गए किशोर…

जनता, जनप्रतिनिधि और जनतंत्र

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं एक मजबूत जनतंत्र के लिए हमें अपने जनप्रतिनिधियों पर ‘जनप्रतिनिधि वापसी विधेयक’, ‘गारंटी विधेयक’, ‘जनमत विधेयक’ और ‘जनप्रिय विधेयक’ लाने के लिए दबाव बनाना है। इन कानूनों के अस्तित्व…

पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण की जरूरत

प्रताप सिंह पटियाल लेखक, बिलासपुर से हैं यह बात काफी हद तक सही है कि देश की उन्नति के लिए सड़कें, बिजली व बड़े उद्योग लगाने जरूरी हैं, मगर इस अनियंत्रित विकास के नाम पर हजारों की संख्या में अंधाधुंध पेड़ों का कटान व बड़ी मशीनों द्वारा…

हर सरकारी संस्थान का दायित्व सुनिश्चित हो

अश्वनी भट्ट लेखक,  खनियारा, धर्मशाला से हैं जब तक संस्थानों को विद्यालय स्तर पर अधिक स्वायत्तता नहीं दी जाती, तब तक कोई भी कानून व नीति वांछित सुधार नहीं ला सकती क्योंकि इसको लागू करवाने की अंतिम जिम्मेदारी विद्यालय स्तर पर ही तय की…

बिटकॉयन को बंद करना होगा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं बिटकॉयन उसी प्रकार है जैसे किसी ओलंपिक मेडल को कोई व्यक्ति लाखों रुपए देकर खरीदने को तैयार हो सकते हैं। सरकार द्वारा जारी किए गए नोट की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार…

नेहरू युवा केंद्र को सशक्त बनाने की जरूरत

कुलदीप चंदेल लेखक,  बिलासपुर से हैं नेहरू युवा केंद्र के बारे में लोगों की धारणा बनी है कि यह तो नाचने-गाने वाला संगठन है। यहां नाच-गाने ही होते हैं, यह धारणा बदलनी होगी। इस संगठन को राष्ट्रहित व युवाहित में अधिक सक्रिय करना होगा। आज…

अब यह मोदी की भाजपा है!

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में अब सर्वेसर्वा बन गए हैं। उन्होंने अपने नजदीकी साथी अमित शाह को पार्टी के अध्यक्ष पद पर प्रतिस्थापित कर दिया है। लेकिन चार साल के शासन के बाद भी यह पता…

हिमाचली कदमों की आहट

हेमांशु मिश्रा लेखक, महाधिवक्ता हैं प्रदेश में नई सरकार की स्थापना के बाद कुछ नए आमूल-चूल परिवर्तन प्रशासन और व्यवस्था में देखने को मिले हैं। अंत्योदय की भावना से काम करती हुई सरकार की प्रतिबद्धता ने अंतिम पायदान में खड़े व्यक्ति को…

बंगाल में पंचायत चुनाव ममता स्टाइल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शायद आम जनता के इसी दबाव के चलते प्रदेश के चुनाव आयोग ने नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख बढ़ा दी। उसके बाद सरकार का दबाव बढ़ा होगा तो अगले दिन आयोग ने वह अधिसूचना वापस भी ले ली।…

नूरपुर बस हादसे से सबक सीखने की जरूरत

राकेश शर्मा लेखक, कांगड़ा से हैं अगर प्रशासन समय पर जागता और सड़क से गुजरने वालों की सुरक्षा के बारे में सोचता तो शायद ये नन्हे चिराग नहीं बुझते। हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है और इसकी सारी सड़कें और ज्यादातर हाइवे भी पहाडि़यों के ऊपर से…

सलमान खान केस में न्याय की विफलता

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं सलमान पर अपराध सिद्ध हुआ है, इसके बावजूद लोगों ने उनका स्वागत इस तरह किया मानो वे उनके कारनामे का अभिनंदन कर रहे हों। यह एक महत्त्वपूर्ण मामला है, न केवल इसलिए कि…