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गंगा को अविरल बहने दें

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं हाइड्रोपावर, सिंचाई एवं जलमार्ग से गंगा को पहुंचाए जा रहे नुकसान की पूर्ति कृत्रिम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से नहीं की जा सकती, जैसे घी की कमी को रिफाइंड तेल से पूरा नहीं किया जा…

दैनिक बोलचाल में हिंदी को अपनाने का वक्त

कश्मीरी लाल नोते लेखक, शिमला से हैं युवाओं ने भले उर्दू बतौर स्कूली विषय न पढ़ी हो, पर इनमें ढले शे’र-ओ-शायरी, गजलें व गीतों को वे बखूबी समझते हैं। वहीं अंग्रेजी भाषा के लिए मोह की हद यह है कि एक अनपढ़ भी इसे आदर की नजर से देखता है। लिहाजा…

वंदे भारत मातरम्

स्वामी रामस्वरूप लेखक, वेद मंदिर, योल से हैं प्रत्येक भारतवासी को यह सदा याद रहे कि यह आजादी हमें खैरात में नहीं मिली। आजादी की लड़ाई में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, जैन सभी भाई-बहनों ने कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया था। जिसके पास जो…

विचलित करता है भाजपा का प्रसार

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं भारतीय जनता पार्टी का प्रसार चिंता का विषय है क्योंकि यह मुसलमानों की आकांक्षाओं की उपेक्षा करती है। मोदी सरकार का सबके विकास का नारा भी भोथरा साबित होता जा रहा है। आरएसएस व भाजपा प्रमुख अमित शाह के कारण…

समस्या नहीं, संसाधन है कचरा

कुलभूषण उपमन्यु लेखक, हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष हैं कचरा गलत जगह पड़ा हो तो समस्या है, परंतु सही रूप में उपचारित कचरा उपयोगी संसाधन भी है। दृष्टि में इस बदलाव के आते ही कचरे के प्रति हमारे व्यवहार में भी बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन यह…

रोहिंग्या मसले पर सतर्कता जरूरी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं भारत का शायद ही कोई मीडिया समूह अराकान की पहाडि़यों में जाने की जहमत उठा रहा है। वह केवल भारत में पश्चिमी मीडिया की जूठन ही उगल रहा है। एक समूह, वहां के वहाबी संगठनों के माध्यम से…

कारगिल युद्ध की साहसिक विजयगाथा

डा. सुशील कुमार फुल्ल लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार हैं बतरा ने भारतीय सेना की शौर्यपूर्ण परंपरा को जीते हुए अपने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए। अपने योद्धा को वीरगति प्राप्त करते देख जम्मू-कश्मीर रायफल्ज के सैनिकों का खून खौल उठा और उन्होंने…

बाबाओं के अनुसरण का मनोविज्ञान

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं डेरा सच्चा सौदा की ही मिसाल लें, तो इसके अनुयायी एक औसत तबके से आते हैं जिन्हें डेरे में समानता का भाव मिला, इलाज में ढाढस व सांत्वना भी मिली, निःशुल्क खाना भी मिला तथा…

हिमाचली खेलों के द्रोणाचार्य

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे भी हिमाचल की खेलों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में योगदान दें, ताकि राज्य की खेलों को उत्कृष्ट स्थान मिल सके। प्रदेश का गौरव बढ़े, इसके…

राजनीति में नौकरशाही के शुभ संकेत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं मोदी और शाह की सहमति से बने इस मंत्रिमंडल में नौकरशाहों का आगमन एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकती है। प्रोफेशनल्स का राजनीति में आना अच्छा है, बशर्ते वे राजनीति की गंदगी के गुलाम न हो…

जैविक खेती में निहित हैं खुशहाली के बीज

कर्म सिंह ठाकुर  लेखक, सुंदरनगर, मंडी से हैं युवाओं के हाथों में कृषि व्यवस्था में रोजगार के साधन उपलब्ध  कराए जाएं, तो युवा पीढ़ी भी नए भारत निर्माण में अपना योगदान दे सकती है। किसान व युवा वर्ग किसी भी राष्ट्र की दिशा व दशा बदलने का दम…

जाट आरक्षण पर लटकती तलवार

जग मोहन ठाकन लेखक, वरिष्ठ टिप्पणीकार हैं हर सरकार, हर राजनीतिक पार्टी, हर सर्वे, कृषि विभाग व कृषि विश्वविद्यालय की हर रिपोर्ट बताती है कि किसान पीडि़त है। उसे सभी प्रकार की प्राकृतिक मार झेलनी पड़ती है, उपज का सही मूल्य नहीं मिलता है और…

चिंताजनक है शिक्षकों का चारित्रिक पतन

सुरेश शर्मा लेखक, राजकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय, धर्मशाला में सह प्राध्यापक हैं हालांकि आज भी बहुत से अध्यापक समर्पण, निष्ठा, लगन व ईमानदारी से शिक्षा जगत में अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। कुछ लोगों के गिरे हुए आचरण व निकृष्ट…

घरेलू स्पर्धा को मिले प्रोत्साहन

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं संरक्षण से अकुशल उत्पादन सदा चलता रहेगा, यह जरूरी नहीं है। इतना सही है कि उद्यमियों द्वारा कुशल उत्पादन तब ही किया जाता है, जब उन्हें प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़े। लेकिन इस…

कसौटी पर शिक्षक सम्मान

किशन बुशैहरी लेखक, नेरचौक, मंडी से हैं शिक्षक सम्मान को निर्विवाद बनाने एवं योग्यता की कसौटी परखने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षाविदों व प्रशासनिक अधिकारियों की उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि निष्पक्ष निरीक्षणकर्ता ही…
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