इजरायल का स्टाइल

इजरायल मॉडल यानी सीमित साधनों से उत्पादकता को कई गुना अधिक करना है। इजरायल में भी हिमाचल की भांति सिंचाई के सीमित साधन हैं। वहां 90 फीसदी सीवरेज के पानी को रिसाइकिल करके इसका 70 प्रतिशत प्रयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है। वहां ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई से भूमि को सिंचित किया जाता है। उनके मुताबिक इन सिंचाई साधनों पर जहां लागत कम आती है, वहीं पानी का भी कम प्रयोग करके अधिक भूमि को सिंचित करने में मदद मिलती है। हिमाचल में भी इजरायल की तर्ज पर सीवरेज के पानी को रिसाइकिल करके इसका प्रयोग सिंचाई के लिए करने की योजना है। इसके लिए प्रदेश में ड्रिप व स्प्रिंकलर इरिगेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इजरायल में रसायनों व कीटनाशकों का बहुत कम प्रयोग किया जाता है। प्रदेश में इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2012 तक प्रत्येक किसान के घर वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाकर जैविक खेती व कम से कम कीटनाशकों व रसायनों के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इजरायल मॉडल हिमाचल में जैविक खेती को बढ़ावा देगा। पोली हाउस के क्षेत्र में भी इजरायल ने नवीन तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह व्यवस्था पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत है। प्रदेश में भी हाईटेक पोली हाउस स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि उत्पादकता को बढ़ाया जा सके।

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