काम कम, शोर ज्यादा

हिमाचल में अब तक नाममात्र किसान ही जैविक खेती कर रहे हैं। नतीजतन किसान-बागबान जमकर कीटनाशकों, रसायनों का प्रयोग कर खेतों को जहरीला बना रहे हैं। सरकारी स्तर पर जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। आलम यह है कि जैविक खेती करने वाले किसानों के प्रमाणीकरण के लिए भी हिमाचल में कोई एजेंसी स्थापित नहीं है। हिमाचल की कुल काश्त भूमि के पांच फीसदी क्षेत्र में भी जैविक खेती नहीं हो रही है। प्रदेश में 09 लाख, 86 हजार, 338 हेक्टेयर क्षेत्र विभिन्न फसलों के अधीन है। इसमें से जैविक खेती सिर्फ 10 हजार, 600 हेक्टेयर भूमि पर हो रही है। हिमाचल में जैविक खेती के लिए अब तक 20 हजार किसान पंजीकृत हैं, जो कि जैविक खेती कर रहे हैं। इनमें से करीब 2,500 प्रमाणित किसान ऐसे हैं, जो पूरी तरह जैविक उत्पाद पैदा कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इस साल एक हजार किसानों को प्रमाणित करने तथा तीन हजार नए किसानों को जैविक खेती के लिए पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा है।

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