महेंद्र अमरीका में पढ़ेंगे शोधपत्र

हामिद खान, चंबा

पर्यावरण समाजसेवी डा. महेंद्र सलारिया अगले माह अमरीका की एरीजोना विश्वविद्यालय में अपना शोधपत्र पढ़ेंगे, जो जल विद्युत परियोजनाओं पर आधारित होगा। शोधपत्र में डा. सलारिया ने परियोजनाओं के नफा-नुकसान का पूरा जिक्र किया है। चमेरा चरण पर किए शोध की अंतिम रिपोर्ट उन्होंने यूजीसी को जमा करवा दी है तथा उन्हें अक्तूबर माह में अमरीका की एरीजोना यूनीवर्सिटी में शोधपत्र पढ़ने की स्वीकृति भी मिल गई है। वर्ष 2008 में शुरू किए गए परियोजना कार्य में डा. सलारिया ने चमेरा जल विद्युत परियोजना चरण एक का गहन अध्ययन किया, जो कि परियोजना के किनारे बसे 22 गांवों पर आधारित है। 22 गांवों को पांच अनुसंधान क्लस्टरों में बांट कर 200 लोगों को विभिन्न बैरिएशन पर प्रत्यक्ष प्रश्नावली का प्रयोग करते हुए उनके द्वारा अनुभव दिए जा रहे मानसिक  ट्रामा के पांच बिंदुओं पर आधारित मापन स्केल (फाइव प्वाइंट सईको मैट्रिकल) को प्रयोग किया तथा अनुसांधान के प्राथमिक तथ्य संग्रह (प्राइमरी डाटा कलेक्शन मैथड) का प्रयोग करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि चमेरा एक के आसपास बसे गांव के लोग चल-अचल संपत्ति का सुरक्षित न होना आदि ऐसे मुद्दे हैं, जो कि उनके लिए ट्रामा स्थापित हुए हैं। इसी अनुसंधान पर आधारित शोधपत्र जिसका शीर्षक ‘साईको ट्रामरिक एनालेसिज नेचर आफ चमेरा’ एक परियोजना है। अक्तूबर माह में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस जीएलपी ओपन साइंस, जो अमरीका की ऐरीजोना विवि में आयोजित होगी,  उसमें भाग लेने डा. महेंद्र अमरीका जाएंगे। बहरहाल इसके लिए उन्हें यूजीसी से भी अनुमति मिल चुकी है।

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