अर्बन बैंक के ऑडिटर को अग्रिम जमानत

राजीव सूद, नगरोटा बगवां

नगरोटा बगवां अर्बन को-आपरेटिव क्रेडिट एंड थै्रफ्ट सोसायटी ऋण मामले के दूसरे आरोपी तथा बैंक के आडिटर को भी सोमवार को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। नगरोटा बगवां पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक एवं जांच अधिकारी प्रेम सिंह ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि माननीय उच्च न्यायालय ने सोमवार को निर्धारित पेशी के दौरान एवी पंत की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। इस दौरान माननीय न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक नगरोटा पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए जमानत याचिका को रद्द करने की मांग की थी।

पुलिस का कहना है कि उक्त व्यक्ति ने सभा के आडिटर रहते हुए कई प्रकार की अनियमितताएं बरतीं तथा अपने नाम भी बिना कागजी कार्रवाई पूरी किए ऋण लिया, जो मौजूदा समय में एक करोड़ 11 लाख के करीब बाकी है। न्यायालय सभा के तत्कालीन सचिव को पहले ही जमानत दे चुका है, जिस सभा द्वारा दायर प्राथमिकी के आधार पर मुख्य रूप से पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

इससे पहले सभा ने तमाम ऋण प्राप्तकर्ताओं के साथ सभा के पूर्व आडिटर को भी बाकायदा नोटिस भेजकर ऋण वापसी की प्रक्रिया को नियमित बनाए रखने की गुहार लगाई थी, लेकिन इस बीच नाममात्र की किस्तों से बैंक का ब्याज भी पूरा नहीं हुआ। नतीजतन असुरक्षित ऋण के रूप में बैंक की जमापूंजी का एक बड़ा हिस्सा कुछेक लोगों के कब्जे में चला गया, जिससे न केवल बैंकिंग प्रणाली ही पूरी तरह से चरमरा गई, बल्कि जमाकर्ता अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु अपनी ही जमापूंजी से वंचित होने पर मजबूर हो गए। नवंबर माह में सामने आई अनियमितताओं के दौरान सभा द्वारा तैयार बैलेंस शीट के मुताबिक उस समय सभा में छह करोड़ 63 लाख 55 हजार 904 रुपए के ऋण बांटे थे। हालांकि अनियमितताओं के उजागर होने तथा ग्राहकों के बीच मची अफरा-तफरी के बाद हरकत में आई समिति तथा विभाग ने 31 अगस्त, 2010 को ऋण आंकड़े को कम कर चार करोड़ 18 लाख 84 हजार तक पहुंचा दिया, लेकिन ये प्रयास भी बैंक को पटरी पर लाने में विफल रहे। अग्रिम जमानत हेतु हाई कोर्ट पहुंचे सभा के सचिव तथा आडिटर ने न्यायालय से राहत प्राप्त कर ली। इसी दौरान कई दूसरे लोग जमानत प्राप्त करने में कामयाब हुए, जिनके नाम बैंक द्वारा दायर प्राथमिकी में दर्ज थे। उधर, पुलिस का कहना है कि उनकी तफतीश जारी है तथा बैंक की गत दस वर्षों की कार्रवाई, आडिट तथा लेन-देन संबंधी विभिन्न बिंदुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है। इस दौरान सभा अपनी बिखरी पूंजी की रिकवरी आने पर ग्राहकों को थोड़ा-थोड़ा बांटकर संतुष्ट करने का प्रयास कर रही है, लेकिन बैंक की साख पर लग चुके बट्टे तथा अपनी विपरीत परिस्थितियों का सामना करने पर मजबूर ग्राहकों (जमाकर्ताओं) में चिंता व्याप्त है

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