आतंकवाद ताकतवर, कानून अति कमजोर

– डा. शशिकांत गर्ग बल्लभगढ़, हरियाणा

जब राजग का शासन था, तब पोटा के कानून के अंतर्गत सैकड़ों संदेहास्पद आतंकवादियों को जेलों में डाल दिया गया था। परिणामस्वरूप आतंकवाद की घटनाएं कश्मीर से बाहर बहुत कम हुई थीं, परंतु संप्रग की सरकार बनने के साथ ही पोटा के अंतर्गत पकड़े गए सभी संदेहास्पद लोगों को छोड़ दिया गया, इसके बाद बंगलूर, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, दिल्ली व बनारस आदि बहुत सारे शहरों में आतंकवादियों ने हजारों लोगों को मार डाला। भाजपा ने सरकार से आतंकवाद रोकने के लिए कठोर कानून की मांग की, परंतु सरकार ने वोटों की राजनीति के चलते ध्यान नहीं दिया। गुजरात, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान की सरकारों ने अपने राज्यों में आतंकवाद रोकने के लिए कठोर कानून बनाए, तो केंद्र सरकार ने उन कानूनों को मान्य नहीं किया। अंत में सरकार ने कानूनों में परिवर्तन तो किया, पर इसके लिए मुंबई के विश्व प्रसिद्ध होटलों में आग लगने की तथा 160 निर्दोष लोगों की हत्याओं की प्रतीक्षा की गई। अब भाजपा दंतेवाड़ा तथा नारायणपुर की घटनाओं  के संदर्भ में नक्सलादियों के सामने सेना तथा वायुसेना के उपयोग की मांग कर रही है, क्योंकि मुंबई की घटनाओं में आतंकवादियों ने नागरिकों की हत्याएं की थीं, जबकि दंतेवाड़ा तथा नारायणपुर में भारत सरकार के सशस्त्र संरक्षण दलों पर आक्रमण करके सरकार को सीधी चुनौती दी है। अतः सरकार को तुरंत सेना और वायुसेना का उपयोग करना चाहिए, पर सरकार तमाशा देख रही है। केंद्र सरकार को नक्सलवादियों के विरुद्ध सेना का उपयोग अवश्य करना पड़ेगा, पर कुछ और बड़ी घटनाएं घटने के बाद करेगी, क्योंकि सरकार की दृष्टि में दंतेवाड़ा और नारायणपुर की घटनाएं छोटी घटनाएं हैं। गृह मंत्री की इस सोच से देश से आतंकवाद घटेगा नहीं, बल्कि इसे और भी बढ़ावा मिलेगा और आतंकवादियों का मनोबल बढ़ेगा।

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