आधारभूत ढांचा-पर्याप्त बजट मिले, तो खेल राज्य बने प्रदेश

जितेंद्र कुंवर, ऊना

1964 ओलंपिक हाकी स्वर्ण विजेता टीम के कप्तान रहे अर्जुन अवार्डी पूर्व ओलंपियन पदम चरणजीत सिंह का  मानना है कि हिमाचल प्रदेश  में खेलों के लिए माकूल ढांचा न होने के कारण प्रदेश की प्रतिभा का भारी पैमाने पर पलायन हो रहा है। प्रदेश में खेल व खिलाडि़यों के स्कोप के बारे में ‘दिव्य हिमाचल’ ने चरणजीत से बातचीत की। जिसके अंश इस प्रकार है।

दिहि ः जिन खिलाडि़यों को प्रदेश सरकार ने पुरस्कार प्रदान किए है, उन्होंने बदले में प्रदेश सरकार को क्यां दिया?

चरणजीत सिंह ःदेश व प्रदेश के लिए गौरव अर्जित करने वाले जिन खिलाडि़यों को प्रदेश सरकार ने पुरस्कृत किया है, उन्होंने निश्चित तौर पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में अपनी श्रेष्ठता साबित करके प्रदेश को गौरवान्वित किया है। वहीं युवाओं के लिए एक रोल मॉडल के रूप में सामने आए हैं। इसके अलावा भी ऐसे खिलाडि़यों को प्रदेश में खेलों के उत्थान के लिए किसी न किसी तरह से अपना योगदान देना
चाहिए। इसमें अभी तक कमी रही है। इसके लिए खिलाडि़यों की कमजोर आर्थिक परिस्थितियां, वातावरण व पारिवारिक कारण भी वजह हो सकते हैं।

दिहि ःप्रदेश में खेल वातावरण बनाने के लिए क्यों कुछ किया जाना चाहिए।

चरणजीत  सिंह ःप्रदेश को खेल राज्य बनाने के लिए माकूल आधारभूत ढांचा विकसित किया जाना चाहिए, वहीं उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट व मेनपावर भी उपलब्ध करवानी चाहिए। अमूमन देखने में आता है कि बड़े-बड़े ढांचे तो बनाकर छोड़ दिए जाते, लेकिन उचित रखरखाव के चलते उसका लाभ खेल व खिलाड़ी को नहीं मिल पाता।

दिहि ःहिमाचल प्रदेश के खिलाडि़यों को राष्ट्र स्तर पर पहुंचने के लिए क्यां परेशानियां झेलनी पड़ती है।

चरणजीत सिंह ःप्रदेश में खिलाडि़यों को आगे बढ़ने के लिए बेसिक जरूरतों का अभाव है। राज्य में एक भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल छात्रावास या फिर अकादमी मौजूद नहीं है।

दिहि ःस्कूली स्तर पर खेल ढांचे से क्या आप संतुष्ट हैं।

चरणजीत सिंह ःस्कूल व कालेज स्तर पर खेल ढांचे में सुधार की भारी गुंजाइश है।

दिहिःक्या खेल छात्रावास हिमाचल में खिलाड़ी तैयार करने के लिए
सक्षम हैं।

चरणजीत सिंहःप्रदेश के खेल छात्रावासों में अभी भी खिलाडि़यों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों के लिए तैयार होने के लिए सुविधाओं व प्रशिक्षण में स्तर को ऊपर उठाना होगा। मौजूदा दौर में इसे नाकाफी ही कहा जाएगा।

दिहिःप्रदेश की खेल नीति क्या होनी चाहिए?

चरणजीत सिंह ः राज्य के
अधिकतर युवा रोजगार के लिए सेना व पुलिस सेवा में जाते हैं। प्रदेश की इस युवा शक्ति को खेलों के क्षेत्र में प्रतिभा दिखाने के लिए
तराशना चाहिए। राज्य में खेलों के लिए माकूल वातावरण मौजूद है, जरूरत है, एक सही दिशा में ईमानदारी से प्रयास की।

ओलंपियन दीपक ठाकुर से बातचीत के अंश

दिहिःजिन खिलाडि़यों को प्रदेश सरकार ने पुरस्कार प्रदान किए हैं, उन्होंने बदले में प्रदेश सरकार को क्या दिया?

दीपक ः बेहतर प्रदर्शन करने पर पुरस्कृत खिलाडि़यों ने प्रदेश के खिलाडि़यों को एक राह दिखाई है। वहीं हर खिलाड़ी अपने स्तर पर राज्य में खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। इन खिलाडि़यों की सेवाएं प्राप्त करने के लिए खेल विभाग को भी समन्वयक की भूमिका अदा करनी चाहिए।

दिहि ःप्रदेश में खेल वातावरण बनाने के लिए क्या कुछ किया जाना चाहिए।

दीपकः राज्य में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले खिलाडि़योें को आधारभूत सुविधाएं जुटाई जानी चाहिए। स्कूल व कालेज स्तर पर खेलों को प्रोमोट किया जाना चाहिए।

दिहि ः हिमाचल प्रदेश के खिलाडि़यों को राष्ट्र स्तर पर पहुंचने के लिए क्या परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

दीपक ः राज्य में खिलाडि़यों को राष्ट्र व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल के लिए तैयार करने के लिए ढांचा उपलब्ध नही है, जिसके चलते आमतौर पर प्रदेश की प्रतिभा को बाहरी राज्यों की तरफ रुख करना पड़ता है।

दिहि ःस्कूली स्तर पर खेल ढांचे से क्यां आप संतुष्ट है।

दीपकःस्कूलों में खिलाडि़यों को सुविधाओं की भारी कमी है। खिलाडि़यों की उदयीमान पौध को विषम परिस्थितियों में खेल स्पर्धाओं में भाग लेना पड़ता है, जिससे निश्चित तौर पर खिलाड़ी के जोश में कमी आती है। 

दिहि ः प्रदेश की खेल नीति क्या होनी चाहिए?

दीपक ः  खेल व खिलाडि़यों को उचित संरक्षण जुटाने का लक्ष्य ही प्रदेश की खेल नीति का मुख्य खाका होना चाहिए।

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