कभी मंगल ग्रह पर भी था बसेरा!

अब तक मंगल ग्रह पर बुद्धिमान सभ्यता अथवा लिटिल ग्रीन मैन होने की बात साइंस फिक्शन तक सीमित रही है लेकिन एक ताजा खोज के आधार पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मंगल ग्रह कभी कार्बन डाइऑक्साइड से समृद्ध था। इसका सीधा मतलब है कि एक दौर में हमारा यह पड़ोसी ग्रह जीवन से आबाद था। यूं तो मंगल पर पहले भी कम मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड की मौजूदगी का पता लग चुका है, लेकिन अब शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि इस ग्रह की सतह के कुछ मील नीचे खनिज के विशाल भंडार हैं। इसका मतलब है कि ग्रीनहाइस गैसों ने इस ग्रह को लाखों वर्ष पहले बहुत गर्म और बेहद गीला स्थान बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर और एरिजोना में प्लेनेटरी साइंस इंस्टीच्यूट के वैज्ञानिकों ने उपग्रह की मदद से मंगल के लाइटन क्रेटर (खड्ड) नामक क्षेत्र की भू-गर्भीय स्थितियों के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह खोज की। विशाल खनिज भंडार सतह से चार मील नीचे पाए गए तथा उस खड्ड में खोजे गए जो उल्का के टकराने से बना था। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि मंगल की सतह के नीचे दबे खनिज भंडार उस प्राचीन तलछट को दर्शाते हैं जो 750 मील चौड़े सिर्टिस मेजर नामक ज्वालामुखी के फूटने से बना था। यह खनिज संभवतः कार्बोनेट-समृद्ध पानी से आया, जिसकी चट्टानों से प्रतिक्रिया हुई। यह इस बात को दर्शाता है कि शुरुआती मंगल उससे भी कहीं ज्यादा गर्म था, जो अब तक समझा जाता था। वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में मंगल की सतह  शुष्क, ठंडी, क्षारीय और जीवन के लिए अनुपयुक्त है। ऐसी स्थितियां करोड़ों वर्षों तक रही होंगी।

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