खेलों का शानदार आगाज

राजधानी दिल्ली में 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की इंद्रधनुषी शुरुआत के साथ इन खेलों का आगाज तो हुआ ही है, यह आयोजन विश्व के 71 देशों की खेल प्रतिभाओं को अपनी किस्मत आजमाने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन से जुड़े भ्रष्टाचार तथा निर्माण एवं प्रबंध को लेकर होती रही आलोचना के चलते भारत ने आखिरकार यह सिद्ध कर दिया है कि वह अब तक के सबसे बड़े राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में पूर्णतः समर्थ है। इसने राष्ट्रमंडल खेलों की बिरादरी में ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में भारत का सिर ऊंचा किया है। रंगारंग परिवेश तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की छटा लिए हुए राष्ट्रमंडल खेलों की शानदार शुरुआत का आम स्वागत करना स्वाभाविक है। इन खेलों में विश्व के 71 देशों के 6700 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। वास्तव में अब समय आत्मालोचन का नहीं, अपितु खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा का परिचय देने तथा देश के खाते में अधिकाधिक स्वर्ण पदक बटोरने का है। इस मौके पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस चार्ल्स व अन्य महानुभावों की मौजूदगी और उनका संदेश जहां खिलाडि़यों के मनोबल को मजबूत बनाने के लिए काफी था, वहीं उनका विश्व शांति व भाईचारे को सुदृढ़ करने का आह्वान भी खेल भावना से मेल खाता था। उन्होंने इन उद्देश्यों के लिए मिलकर काम करने के लिए भी कहा है। अभी जबकि दिल्ली अगले 14 अक्तूबर तक राष्ट्रमंडल खेलों की जगमगाहट व चकाचौंध से सराबोर रहेगी, इसके माध्यम से भारत विश्व के मानचित्र पर एक विलक्षण पर्यटन स्थल के तौर पर उभर पाएगा। इससे विदेशों से खेलों में हिस्सा लेने या देखने भारत आए लाखों पर्यटक इस बात से भी पूरी तरह वाकिफ हो पाएंगे कि पांच हजार से भी अधिक पुरानी विरासत ओढ़े भारत विकास की दृष्टि से आज कितनी ऊंचाई पर पहुंच चुका है। अपनी आर्थिक प्रगति तथा विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में प्रशंसनीय उपलब्धियों के आधार पर वह दुनिया की एक बड़ी ताकत के तौर पर उभरने में पूरी तरह समर्थ है। यह दुनिया के उन देशों के लिए भी एक सबक है, जो आज तक भारत को सपेरों और मदारियों तथा भिखारियों का देश मानते रहे थे। राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत पर करीब अढ़ाई घंटे के सांस्कृतिक कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य, भारत की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन, हीलियम के गुब्बारे, रंगारंग आतिशबाजी व मशहूर संगीतकार एआर रहमान का आह्वानी गीत ‘जियो उठो बढ़ो जीतो’ तथा नन्हे केशव के सफल तबला वादन ने आयोजन की छटा को और खूबसूरत बना दिया था। इस सबके लिए आयोजक निश्चय ही बधाई के पात्र हैं। अब जबकि राष्ट्रमंडल खेल पूरे जोश व उमंग के साथ शुरू हो चुके हैं, भविष्य में सुरक्षा इंतजामों व प्रबंध व्यवस्था में कहीं कोई ढील नहीं होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष जेक्यूएस रोके द्वारा ओलंपिक सरीखे आयोजनों के लिए भारत की क्षमता की पुष्टि करना स्वयं में एक उपलब्धि है। आइए राष्ट्रमंडल खेलों का स्वागत करते हुए यह निश्चय भी करें कि उन लापरवाहियों को भविष्य में नहीं दोहराया जाएगा, जिनसेभारत नाहक बदनाम हुआ था।

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