समृद्ध भारतीय संस्कृति, जय हो!

– वीरेंद्र सिंह डढवाल, गुम्मर

तमाम तरह की आलोचनाओं को पीछे छोड़ते हुए दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का अब तक का सबसे भव्य उद्घाटन हुआ। लगभग तीन घंटे के इस समारोह में पांच हजार साल की समृद्ध भारतीय संस्कृति का वह अतुलनीय रूप दुनिया के सामने आया, जिसकी कहानी अब तक सभी ने किताबों में ही पढ़ी थी। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद 60 हजार दर्शकों, लगभग सात हजार विदेशी मेहमानों के साथ टीवी पर चिपके लगभग तीन अरब लोगों को आयोजन समिति ने भारतीय संस्कृति के विभिन्न मनमोहक रंगों से कुछ इस अंदाज से रू-ब-रू करवाया, जिसे भुलाना आने वाले कई सालों के लिए उनके लिए मुमकिन नहीं होगा। तीन घंटे तक करोड़ों लोगों को बांधे रखना, वह भी बिना बालीवुड के तड़के के, यह जादू भारतीय संस्कृति के अलावा भला और कौन दिखा सकता था। भले ही राष्ट्रमंडल खेलों के पूरा होने के बाद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे आयोजन समिति अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर गाज गिरना तय है, लेकिन भारतीय रीति-रिवाजों व परंपराओं को लोक कलाकारों के माध्यम से दिखाने का जो साहसिक कदम उन्होंने उठाया है, उसके लिए वह निश्चित तौर पर बधाई के पात्र हैं। उद्घाटन समारोह में दिल्ली की जय हुई है, लोक कलाकारों की जय हुई है और जय हुई है समृद्ध भारतीय संस्कृति की।

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