हिंदू महिला की गुलामी की दास्तां

– कृष्न संधु, कुल्लू

करवाचौथ के त्योहार को हिंदू महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना के लिए मनाती हैं। क्या महिलाओं ने सारा ठेका लेकर रखा है? यह ठीक है कि कभी औरत अपने पति पर पूरी तरह निर्भर करती थी और पति कमाकर उसका पालन-पोषण करता था, परंतु यह तो सारे संसार के हर मर्द को करना पड़ता था और अब भी करना पड़ता है, ऐसे में हिंदू मर्द ही खास क्यों? इस तरह औरत घर में रहकर बच्चे पैदा करने से लेकर उनके पालन-पोषण व घर के दूसरे काम भी निपटाती थी, जिसमें उसे कोल्हू के बैल की तरह रात-दिन पिसना पड़ता था। यह सारी मेहनत मर्द के कमाने से कई गुना ज्यादा होती थी और अब भी उसमें कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। अब तो औरत घर से बाहर निकल कर अपने आप कमाने लगी है और पति से भी ज्यादा कमाई कर रही है। मर्द घर में और करता ही क्या है? जहां एक ओर पत्नी निराहार व्रत रखती है, वहां दूसरी ओर पति खा-पीकर मस्त रहता है और उससे बेवफाई करने, प्रताडि़त करने व दुःख देने से जरा भी नहीं हिचकता, जो उसकी लंबी आयु की कामना करती है। यह तो सिर्फ मान्यता और मिथक से ज्यादा कुछ नहीं।

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