12 वर्ष का रिकार्ड जांचा जाए

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, धर्मशाला

परीक्षा फर्जीबाड़े मामले में पूर्व बोर्ड अध्यक्ष बीआर राही ने स्कूलों की मैरिट पर उठ रहे सवालों पर अपनी मुहर लगा दी है। उनका कहना है कि प्रंबधन से जुड़े लोग अपने बच्चों को मैरिट में लाने का प्रयास करते हैं। बीआर राही गुरुवार को धर्मशाला के एक होटल में पत्रकारवार्ता के दौरान बोले रहे थे। उन्होंने वर्ष 1998 से लेकर अब तक की शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली की जांच की मांग उठाई है, जिसमें साढ़े चार वर्ष का उनका अपना कार्यकाल भी शामिल है। बीआर राही ने बताया कि बिना परीक्षा दिए पास हुए 209 बोर्ड छात्रों को 1224 प्रमुख आंसरशीट स्कैन करके दी हो, यह बेवकूफ बनाने वाली बात है। उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष को हटाने की मांग करते हुए शिक्षा बोर्ड से जारी आंसरशीटों का ब्यौरा भी मांगा है। उनका कहना है कि बोर्ड के अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी ईमानदार हैं। बावजूद इसके बोर्ड की मिलीभगत के बिना यह फर्जीबाड़ा संभव नहीं है। बीआर राही ने कहा कि उनके कार्यकाल में किसी ने एक जाली सर्टिफिकेट बना दिया था, इसके लिए बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि अब 209 असली सर्टिफिकेट बोर्ड ने बिना परीक्षा दिए ही जारी कर दिए। इसे एक अनुपात 209 बताते हुए बीआर राही ने कहा कि इस पर सरकार का दोहरा मापदंड क्यों है। उन्होंने कहा कि एक सर्टिफिकेट मामले में अगर बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष को गिरफ्तार किया जाता है, तो 209  मामलों वाले अध्यक्ष को हटाने से सरकार क्यों डर रही है। उनका कहना है कि राजनीतिक विरोधियों को फंसाकर अपनों को क्लीन चिट देना सरकार को शोभा नहीं देता। बीआर राही ने कहा कि इस पूरे फर्जीबाड़े के अकेले दोषी बोर्ड के चेयरमैन हैं, क्योंकि योजनाएं बनाकर उसे लागू करवाना अध्यक्ष का दायित्व होता है।

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