जो योग्य है, वही छपेगा

दिहिः विभिन्न सरकारी विभागों से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाओं और स्मारिकाओं का प्रदेश के लिए क्या योगदान है?

प्रेम शर्माः विभागों में प्रकाशित मैगजीन एवं स्मारिकाओं का विभाग व अकादमी कोई ब्यौरा नहीं रखती है। यह जरूर है कि अकादमी एवं विभाग से निकलने वाली पत्रिकाओं का हिमाचल के साहित्य सृजन एवं संस्कृति उत्थान में विशेष योगदान है।

दिहिः इनकी प्रासंगिकता दिन-प्रतिदिन घट क्यों रही है?

प्रेम शर्माः ऐसा नहीं है, कई ऐसे लेख प्रकाशित किए जाते हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हैं। हिमाचल की पत्रिकाएं राष्ट्रीय स्तर पर जानी जाती हैं। शोधकर्ता हिमाचल की पत्रिकाओं से कई जानकारियां लेते हैं।

दिहिः इतनी ज्यादा मैगजीन की बजाय कोई एक बेहतरीन प्रकाशन क्यों नहीं प्रदेश को दिया जाता?

प्रेम शर्माः पत्रिकाओं के अलावा विभाग एवं अकादमी कई लेखकों की पुस्तकें भी प्रकाशित करती हैं, जिनमें सभी की दिलचस्पी होती है।

दिहिः प्रकाशन ऐसा हो जिसमें आम जीवन के विषय होें, रुचिकर हो और विशुद्ध साहित्यिक सृजन हो। ऐसा संभव क्यों नहीं?

प्रेम शर्माः विभाग एवं अकादमी जनता की दिलचस्पी को ध्यान में रखती है। हर व्यक्ति कीरूचि के मुताबिक प्रकाशन किया जाता है।

दिहिः इन प्रकाशनों में छपने वाले ज्यादातर लोग गैर हिमाचली होते हैं। एक ही तरह के लोग बार-बार छप रहे हैं, ऐसा क्यों।

प्रेम शर्माः ऐसा नहीं है कि गैर हिमाचलियों को ही छपवाया जा रहा है। हिमाचली लोगों को ज्यादा प्रोत्साहित किया जाता है।

दिहिः एक ही तरह के लोग बार-बार छपते हैं, न तो नयापन और न ही कोई सृजन, ऐसा कब तक चलेगा?

प्रेम शर्माः यह कहना गलत है कि एक ही तरह के लोग छापे जा रहे हैं। जो योग्य होगा उसे ही स्थान दिया जाएगा। नयापन लाने की पूरी कोशिश की जाती है।  

दिहिः क्यों न प्रदेश के लेखकों का एक पूल बना लिया जाए और उन्हें बारी-बारी मौका दिया जाए?

प्रेम शर्माः लेखकों का पूल बना है। सभी तरह के लेखकों से रचनाओं के हिसाब से उनके लेख प्रकाशित करने को मौका दिया जा रहा है। जो छपने योग्य होंगे, उन्हीं के लेख छापे जाते हैं और उन लेखकों का पूल बना है।

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