सरकार ढो रही अकादमी का बोझ

भाषा अकादमी एवं विभाग के तहत छपने वाली पत्रिकाओं का कुल खर्चा करीब पांच-साढ़े पांच लाख तक रहता है। अकादमी की पत्रिकाओं में सोमसी का करीब 80 हजार, हिमभारती का करीब 60 हजार, श्यामला का करीब 60 हजार खर्चा रहता है। भाषा विभाग से निकलने वाली दोनों पुस्तकों का वार्षिक खर्चा करीब चार लाख रहता है। पत्रिकाओं की बिक्री के दौरान प्राप्त राशि उतनी नहीं होती जो अपने प्रकाशन का खर्चा स्वयं वहन कर सके। इसलिए प्रदेश सरकार द्वारा ही भाषा एवं संस्कृति अकादमी के तहत प्रकाशित पत्रिकाओं के प्रकाशन के लिए बजट मुहैया करवाया जाता है। इन पत्रिकाओं को पढ़ने वाले ज्यादातर साहित्यकार एवं शोधकर्ता होते हैं, इसलिए इनकी प्रतियां कम ही छपवाई जाती हैं।

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