अड़ियल अफसरों पर सूचना आयोग नरम

मंडी —  आरटीआई एक्ट के तहत सूचना न देने पर अधिकारियों पर लगाए जाने वाली पेनल्टी का ग्राफ प्रदेश में बहुत ही कम है। यह ग्राफ मात्र अढ़ाई फीसदी तक ही पहुंच पाया है, जिससे जाहिर है कि सूचना आयुक्त सख्ती से बर्ताव नहीं कर रहे हैं। इसके चलते कई लोगों को सूचना लेने के लिए मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के दरवाजे बार-बार खटखटाने पड़ रहे हैं। आलम यह है कि वर्ष 2009-10 में संबंधित अधिकारियों की सूचनाओं को लेकर मुख्य सूचना आयुक्त व राज्य सूचना आयुक्त के पास कुल 492 शिकायतें पहुंचीं, जो सूचनाओं को लेकर की गई थी और जिनको अधिकारियों ने  लंबित किया हुआ था। सूत्रों के मुताबिक मात्र आठ अधिकारियों को ही पेनेल्टी लगाई जा सकी है, जबकि एक अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सूचनाओं पर पेनल्टी की यह दर मात्र अढ़ाई फीसदी के करीब है। उक्त आंकड़ों का खुलासा आरटीआई एक्टिबिस्ट नेशनल अवार्ड विनर देवाशीष ने आरटीआई के माध्यम से किया है। उपरोक्त आंकड़े वर्ष 2009-10 के हैं।   अधिकारियों में जिनको पेनल्टी लगाई गई है, उनमें उपनिदेशक एलिमेंटरी कांगड़ा को 5005 रुपए, उपनिदेशक शिमला एलिमेंटरी को 5250, सोलन के उपनिदेशक को 5750, बिलासपुर के उपनिदेशक को 2000, कुल्लू के उपनिदेशक को 3250, बीडीओ पूह (किन्नौर) को 500, बीडीओ नगरोटा को 2500, अधिशाषी अभियंता बी एंड आर धर्मपुर 2750 रुपए का जुर्माना इस दौरान लगाया गया, जबकि जोगिंद्रनगर के तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मुख्य सूचना आयुक्त के पास 280 सूचना न देने की शिकायतें पहुंचीं, जिनमें से दस को उन्होंने रिजेक्ट कर दिया और आठ अधिकारियों पर पेनल्टी लगाई। राज्य सूचना आयुक्त के पास 222 शिकायतें पहुंची, जिनमें से उन्होंने 42 को रिजेक्ट किया तथा एक पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। देवाशीष का कहना है कि रिटायर्ड आईएस अधिकारियों को सूचना आयुक्त के पदों पर नहीं लगाया जाए। वे अधिकारियों के साथ नरमी बरतते हैं। इन पदों पर कार्यरत आईएएस अधिकारियों को ही तैनात किया जाए।

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