एयर इंडिया में और निवेश की जरूरत

दिल्ली — सरकार ने कहा है कि ऋण के बढ़ते बोझ की वजह से एयर एंडिया में अगले कुछ सप्ताह के दौरान 1,200 करोड़ रुपए की पूंजी डालने के बाद भी और इक्विटी निवेश की दरकार होगी। नागर विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि एयर इंडिया में और इक्विटी निवेश की जरूरत होगी। सचिवों की समिति ने भी कंपनी में 5,000 करोड़ रुपए के निवेश की सिफारिश की है। उनसे पूछा गया था कि क्या राष्ट्रीय एयरलाइन में अगले कुछ साल में 1,200 करोड़ रुपए डाले जाने के बाद क्या और इक्विटी निवेश की जरूरत होगी। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में कंपनी के कर्ज के भारी बोझ को कम करने के लिए एयर इंडिया में 800 करोड़ रुपए की अतिरिक्त इक्विटी डाली थी। सूत्रों ने बताया कि एयरलाइन ने अगले वित्त वर्ष में सरकार से 2,000 करोड़ रुपए का और इक्विटी पूंजी डालने का आग्रह किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन की इस मांग को स्वीकार कर लिया। श्री पटेल ने बताया कि एयर इंडिया पर वास्तव में 18,000 करोड़ रुपए के ऋण का बोझ है। उन्होंने कहा कि जब वे विमान खरीदेंगे तो निश्चित रूप से उनका कर्ज बढ़ेगा। समस्या कार्यशील पूंजी के साथ है, जिसे बढ़ाकर 7,000 से 8,000 करोड़ किया जाना है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एयरलाइन पर 10,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त ऋण के बोझ को कम करने की जरूरत है।  राष्ट्रीय विमानन कंपनी पर विमानों के अधिग्रहण की वजह से 20,000 करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ है। एयर इंडिया ने सरकार से कहा है कि उसने अब तक जो ऋण लिया है, उस पर सरकारी गारंटी दी जाए। इस तरह की गारंटी से उसे अपने ऋण के पुनर्गठन में मदद मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल में कंपनी से कहा है कि वह सरकार की ओर से एक पत्र उपलब्ध कराए। केंद्रीय बैंक ने कंपनी के ऋण इक्विटी अनुपात की खराब स्थिति की वजह से ऐसा करने को कहा है। श्री पटेल ने कहा कि एयर इंडिया में और पूंजी चरणों में डाली जाएगी, जिससे एयरलाइन के प्रदर्शन को जवाबदेह बनाया जा सके। सरकार ने एयरलाइन से कहा है कि वह इक्विटी निवेश के बदले अपने राजस्व में बढ़ोतरी करे तथा खर्चों में भारी कमी लाए। यह पूछे जाने पर कि एयरलाइन प्रबंधन ने कंपनी श्रम लागत घटाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी है। श्री पटेल ने कहा कि श्रम को तर्कसंगत बनाने का काम बड़े परिदृश्य के आधार पर मिलकर किया जाएगा। इस बीच, एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरविंद जाधव ने कंपनी की वित्तीय स्थिति पर यूनियनों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। समझा जाता है कि उन्होंने यूनियन के प्रतिनिधियों को बताया है कि यदि सरकार ने कंपनी में 1,200 करोड़ रुपए की पूंजी और नहीं डाली, तो एयरलाइन की स्थिति काफी खस्ता हो जाएगी। सूत्रों ने बताया कि एयरलाइन की वित्तीय स्थिति और खराब हो सकती है, क्योंकि प्रबंधन संभावना जता रहा है कि मार्च-नवंबर के दौरान उसका राजस्व नुकसान 1,925 करोड़ रुपए का रहेगा। समझा जाता है कि एयरलाइन ने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के परिचालन पर लागत आधार पर सरकार से 800 करोड़ रुपए का अग्रिम मांगा है।

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