कोशिशें और कामयाबी

वर्ष 2008 में भाजपा की सरकार बनने के बाद विधानसभा सत्र में होने वाले खर्च पर सरकार ने जमा-जोड़ शुरू किया। इस दौरान दो बार विधानसभा सत्र तपोवन में हुए। एक बार दो बैठकें तथा दूसरी बार छह बैठकें की गईं। दोनों ही सत्रों में 80 लाख के आसपास धन खर्च किया गया। भारी भरकम राशि खर्च होने के बाद सरकार ने अगली बार के लिए किफायती कदम उठाने की ठान ली और वर्ष 2009 में शीतकालीन सत्र का खर्च 46 लाख तक सिमट आया। इस बार 2010 में होने जा रहे शीतकालीन सत्र में खर्चे को 36 से 37 लाख में समेटने का प्रयास है।

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