छोटे-मोटे मामले प्रधान के हवाले

भारतीय संविधान ने पंचायत प्रधान से लेकर नगर निकाय अध्यक्षों को विकास के साथ-साथ छोटे-मोटे विवादों को निपटाने की शक्तियां दी हैं। पंचायत प्रधान संबंधित क्षेत्र में दीवानी व फौजदारी से जुड़े छोटे मुकदमों को निपटा सकता है। इसका मकसद पंचायत स्तर पर न्याय को सस्ता, सुलभ व शीघ्र उपलब्ध कराना है। दीवानी मामलों जिनकी मालियत 2000 रुपए से अधिक न हो, उसकी सुनवाई की शक्तियां प्रधान रखता है। इसके अलावा ब्याज पर धनदेय का मामला, संपत्ति व उसके स्वामित्व की वसूली का दावा, गैर-कानूनी ढंग से संपत्ति को हथियाने या अचल संपत्ति को कोई नुकसान पहंुचाने के मुआवजे बारे दावा, पशुओं द्वारा अनधिकृति प्रवेश से नुकसान के बारे दावा इत्यादि मामलों के निपटारे की पंचायत प्रधान में शक्तियां निहित हैं। इसी प्रकार नगर निकाय अध्यक्ष भी क्षेत्र के विकास संबंधी शक्तियां रखते हैं। निकाय अध्यक्ष हाउस में प्रस्ताव पारित कर हाउस टैक्स लगा सकता है। स्थानीय निकाय कानून के मुताबिक शहर के विकास का जिम्मा अध्यक्ष व हाउस का होता है। शहर की सफाई व्यवस्था, रास्तों की मरम्मत, संंबंधित क्षेत्र में बनने वाले भवनों के नक्शे पास करना, स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था करने इत्यादि का जिम्मा इन्हीं का होता है। इसी के साथ शहरी निकाय अवैध भवनों को गिराने व शहर के विस्तार का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रख सकते हैं। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) का संवैधानिक पद होता है। ईओ को भी ठीक उसी प्रकार की शक्तियां दी गई हैं, जैसी सरकार के प्रत्येक महकमे में सचिव के पास होती हैं। निकाय बजट को किन-किन मदों पर व्यय करना है यह ईओ तय करते हैं। साथ ही सरकार से अतिरिक्त बजट की मांग का प्रस्ताव भी ईओ रखते हैं।

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