डेढ़ साल से धूल फांक रही शहरीकरण योजना

हिमाचल में गत एक दशक से शहरीकरण ने रफ्तार पकड़ी है। इससे शहरों की संख्या में भी वृद्घि हो रही है। गौर करने वाली बात यह है कि नगर एवं ग्राम नियोजन महकमा सुनियोजित विकास के लिए जो भी प्रस्ताव सरकार को भेजता है, वह लंबे समय तक कागजों में धूल फांकता रहता है। इसका उदाहरण करीब डेढ़ वर्ष पूर्व विभाग द्वारा सरकार को भेजी गई अर्बनाइजेशन पॉलिसी है, जिसे सरकार अब तक अप्रूव नहीं कर पाई है। इसी प्रकार टीसीपी महकमे द्वारा बनाए गए कई शहरों के डिवेलपमेंट प्लान भी सरकार की अनुमति की बाट जोह रहे हैं। सरकारी स्तर पर होने वाली देरी से विभाग द्वारा बनाए गए डिवेलपमेंट प्लान उधेड़बुन में फंसे रहते हैं,जबकि इनकी अवधि करीब 10 वर्ष की रहती है। जब तक सरकार इन्हें अप्रूव करती है,तब तक प्लान आउटडेटेड हो जाता है। लिहाजा नए सिरे से प्लान बनाया जाता है। ऐसे में शहर में सैकड़ों अवैध भवन खड़े हो जाते हैं। यदि सरकार की मंशा हो तो हिमाचल को कंकरीट के जंगल में तबदील होने से बचाया जा सकता है। परिवहन एवं टीसीपी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार शिमला और हमीरपुर को सोलर सिटी बनाने जा रही है। इनमें सरकारी व घरेलू इमारतों में सौर उर्जा से जुड़े यंत्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अर्बनाइजेशन पालिसी बारे उन्हें जानकारी नहीं है। प्रदेश सरकार राज्य के सभी शहरों को डिवेलपमेंट प्लान बनाने के लिए गंभीर है। उन्होंने कहा कि शिमला के नगर निगम क्षेत्र मंे भवन निर्माण कार्यों को स्वीकृत प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है, ताकि लोगों को नक्शा पास करवाने में जटिल प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। मंत्रीमंडल की उपसमिति की गत दिनों आयोजित बैठक में इस बारे प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।

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