डेढ़ सौ किलोमीटर में दम घुट कर लुप्त हो जाएगी सतलुज

Dec 22nd, 2010 12:02 am

(आरएल जस्टा, लेखक, शिमला से सेवानिवृत्त अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता हैं)-

यदि सतलुज ताल में प्रोजेक्टों के तहत कैट प्लान पर करोड़ों रुपए की राशि वृक्षारोपण पर सही ढंग से सही समय पर खर्च नहीं की गई और वनीकरण तथा संरक्षित क्षेत्र मुहिम समय पर सिरे नहीं चढ़ी, तो सतलुज में गाद की समस्या विकराल रूप ले सकती है…

आज की सतलुज और वैदिक काल की शतद्रु ने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि एक दिन बिजली उत्पादन के नाम पर अपना असली स्वरूप खोकर डेड़ सौ किलोमीटर सुरंगों में मजबूरन दम घुट कर लुप्त हो जाना पड़ेगा। अच्छा होता यदि इसमें विद्युत दोहन की इतनी अधिक क्षमता न होती, ताकि यह अपने असली स्वरूप में ही बहती रहती। हिमालय सदियों से स्तंभ की तरह खड़ा रहकर हमारी रक्षा कर रहा है। इससे बिजली परियोजनाओं के नाम पर अंधाधंुध चीरफाड़ करके हमें खतरा नहीं मोल लेना चाहिए। सतलुज ताल में पनविद्युत परियोजनाओं के कारण जंगल कटान से हरित पट्टी घट रही है, जिससे तापमान बढ़ रहा है, ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं और बर्फ बिलकुल कम गिर रही है। सतलुज हिमाचल की सबसे लंबी तेज गति से बहने वाली बड़ी नदी है। इसका उद्गम स्थल समुद्र तल से 4570 मीटर की ऊंचाई पर तिब्बत में मानसरोवर के पास ताल झील है। हिमाचल में बहने वाली पंचनद, सतलुज, यमुना, व्यास, रावी और चनाब की कुल चिन्हित जल विद्युत क्षमता 2100 मेगावाट है, जिसमें से लगभग आधी  क्षमता सतलुज ताल की है, जबकि बाकी अन्य तालों में है। सतलुज नदी पर 1500 मेगावाट की चालू नाथपा झाखड़ी जल विद्युत परियोजना सबसे बड़ी है। नाथपा डैम से ऊपर सतलुज नदी का कुल जल ग्रहण क्षेत्र 49,820 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से 36,900 तिब्बत में है और शेष 12,920 वर्ग किलोमीटर हिमाचल में है। यानी 3/4 भाग तिब्बत में है, जिस पर हमारा कुछ भी नियंत्रण नहीं है। सतलुज नदी में पहली बाढ़ अगस्त, 2000 में आई, जिसके कारण का पता नहीं चला। इसके बाद दूसरी विनाशकारी भयंकर बाढ़ जून, 2005 में आई, जिसका जल स्तर पिछली बाढ़ से 60 प्रतिशत अधिक था। तिब्बत की पाराछू नदी भारत में स्पीति नदी में  सुमदो के स्थान पर मिलती है, जो आगे चलकर खाब में सतलुज में मिलती है। 2004 के पाराछू के प्रेत से निकट भविष्य में भी हम कांपते रहेंगे।

यदि सतलुज ताल में प्रोजेक्टों के तहत कैट प्लान पर करोड़ों रुपए की राशि वृक्षारोपण पर सही ढंग से सही समय पर खर्च नहीं की गई और वनीकरण तथा संरक्षित क्षेत्र मुहिम समय पर सिरे नहीं चढ़ी, तो जहां सतलुज में गाद की समस्या विकराल रूप ले सकती है, वहीं घटते जल स्तर और बढ़ती आबादी के कारण निकट भविष्य मंे पानी की भी समस्या हो सकती है। हिमाचल में बहने वाली नदियों का जल अनमोल है, जो कि प्रकृति के जटिल तंत्र का उत्पाद है। इन नदियों का प्रवाह उस क्षेत्र की भू-गर्भीय संरचना व वानस्पतिक आवरण पर निर्भर करता है, अतः ताल का संरक्षण करना अति आवश्यक है। सतलुज नदी पर खाब से लेकर भाखड़ा नंगल तक 320 किलोमीटर की लंबाई में नौ बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं की कतार है, जिनमें से खाब, जंगी ठोपन पवारी, शोंगटोग कड़छम, कड़छम वांगतू और नाथपा झाखड़ी नाम की पांच बड़ी जल विद्युत परियोजनाएं किन्नौर में पड़ती हैं। अगर ये सब परियोजनाएं बन जाती हैं, तो सतलुज नदी डेढ़ सौ किलोमीटर की सुरंगों से गुजरते हुए अपने प्रकृति रूप से लुप्त हो जाएगी। इसके अलावा सतलुज की किन्नौर में बहने वाली मुख्य सहायक नदियों स्पीति, टिडोेंग, कशांग, बास्पा, भाभा, सोरंग और कूट पर 1400 मेगावाट क्षमता की 12 जल विद्युत परियोजनाएं हैं। इनमें से 300 मेगावाट की बास्पा-दो और 120 मेगावाट की भाभा चालू है, 100 मेगावाट की सोरंग, 66 मेगावाट की कशांग-एक पर कार्य प्रगति पर है तथा शेष आठ आबंटित हो चुकी हैं। किन्नौर के पहाड़ संवेदनशील और खुरदरे हैं। यह शीत मरुस्थल भू-कंपीय क्षेत्र-पांच में आता है। अतः इन पहाड़ों के और अधिक अंधाधुंध खनन से पर्यावरण और इकोलॉजी से खतरा मोल लेना है। सतलुज और इसकी सहायक नदी बास्पा तथा पब्बर नदी से विद्युत उत्पादन का मास्टर प्लान सबसे पहले 1994-95 में स्वीडन की कंपनी स्वीड पावर के सहयोग से बनाया गया था। स्वीडन के पहाड़ पक्के हैं और किन्नौर के पहाड़ कच्चे हैं। अतः किन्नौर जिला की सभी प्रस्तावित पन बिजली परियोजनाओं पर पुनः विचार करने का समय आ गया है, ताकि सतलुज नदी को जो किन्नौर की जीवन रेखा है, लुप्त होने से बचाया जा सके और यहां के संवेदनशील पहाड़ों को और अधिक खोखला न होने दिया जाए।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या सरकार को व्यापारी वर्ग की मदद करनी चाहिए?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz