निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दों की हवा

राज्य निर्वाचन आयोग ने चार दिसंबर को नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी कर कार्यक्रम तय कर लिया है। इसी के साथ हिमाचल के 48 नगर निकायों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। स्थानीय निकाय चुनाव में सबसे अहम मुद्दा सीवरेज, बेहतर जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के कर हटाने, लंबित भवनों के नक्शे समय पर पास कराना, वन टाइम सेटलमेंट पालिसी इत्यादि मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इन चुनावों में सबसे अहम मुद्दा वन टाइम सेटलमेंट पालिसी है, क्योंंिक प्रदेश में 20 हजार से अधिक अवैध भवन हैं। सरकार द्वारा सात बार पालिसी लाने के बावजूद इन्हें रेगुलर नहीं किया जा सका है। प्रदेश भर से लोग एक बार ऐसी पालिसी लाने की मांग कर रहे हैं, जिसके तहत सभी भवनों को रेगुलर किया जा सके। पार्टी चिन्ह पर चुनाव होने से स्थानीय निकाय चुनावों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। लिहाजा प्रदेश के सियासी दल स्थानीय मुद्दों के अलावा राज्य व राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को भी आधार मानकर चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य की कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार के अढ़ाई वर्ष के कार्यकाल की खामियों को प्रमुख हथियार बना रही है। कांग्रेस पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा को शिकस्त देने के लिए प्रदेश शिक्षा बोर्ड घोटाले, गुम्मा कार्टन फैक्टरी घोटाला, पीडीएस के तहत मिलने वाले राशन में कटौती इत्यादि मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ रही है। इसी प्रकार भाजपा के प्रत्याशी राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों का॒प्रचार-प्रसार कर वोट मांग रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी केंद्र की यूपीए सरकार के एक के बाद एक घोटाले को भी चुनावी मुद्दा बना रहे हैं।

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