प्रोग्रेस के लिए जरूरी है टीम का कंट्रोल में होना

By: Dec 19th, 2010 12:05 am

किसी भी कंपनी की प्रोग्रेस के लिए टीम का कंट्रोल में होना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा नहीं है, तो ये यूं ही नहीं हो गया, बल्कि इसके पीछे पहले से चली आ रही कुछ चीजें छिपी होती हैं। हालांकि, इसे कंट्रोल करने के तरीके भी आसान हैं। कोई भी टीम अगर आउट ऑफ कंट्रोल होती है, तो यह पहले से चली आ रही कुछ उन चीजों का एक आउटकम है, जिन्हें नहीं होना चाहिए था। इनका असर कंपनी की प्रोग्रेस और कर्मचारियों के मोटिवेशन पर पड़ सकता है। इसलिए इसका ठीक होना बहुत जरूरी है और इसके तरीके भी काफी आसान हैं।

क्या है वजहः अगर टॉप मैनेजमेंट क्राइसिस कंट्रोल में व्यस्त हों या एचआर अफेयर्स को थोड़ी कम वैल्यू दें या आपको स्टाफ से डिस्कशन का वक्त न मिल पाए, तो ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में मिडल मैनेजमेंट को लगेगा कि कहीं न कहीं डायरेक्शन की कमी भी है। दूसरी ओर, डायरेक्शन सही न होने से और बातचीत की कमी से धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ने लगती है। ऐसे में मिडल मैनेजमेंट के रोल से ऑर्गेनाइजेशन और टीम में स्टेमिना आ सकता है।

जब हों ओवर एक्सपेक्टेशंसः ये सिचुएशन तब भी पैदा हो जाती है, जब टीम से ओवर एक्सपेक्टेशंज हों। वो उम्मीदें भी की जाने लगें, जो जरा भी प्रैक्टिकल न हों। इसी के चलते टीम का परफार्मेंस लेवल कम दिखने लगता है। सही डायरेक्शन न मिलने और टीम मेंबरों के कन्फ्यूज होने से भी ऐसी सिचुएशन पैदा हो जाती है। एंप्लाइज नॉन प्रोडक्टिव एक्टिविटीज में लग जाते हैं। इससे धीरे-धीरे डिस्ट्रक्टिव एक्टिविटीज को बढ़ावा मिलता है। नतीजतन, इससे बेवजह के तर्क-वितर्क होते हैं।

खुद से पूछें एक सवालः इससे उबरने के लिए आप खुद से एक सवाल पूछ सकते हैं कि आपका टीम से कनेक्शन कैसा है। इससे अगला सवाल होगा कि टीम से किस तरह कनेक्शन बनाए रखना है। कई बार सीईओ, जनरल मैनेजर या फिर इसी तरह के आला अधिकारियों को भी इस दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इन्हें लगता है कि कर्मचारी अपना रोल सही तरह से नहीं निभा रहे हैं। इन्हें कंपनी के हित से कोई मतलब नहीं है।

सेट करें पावरफुल गोलः अपनी टीम को मोटिवेट करने के लए एक पावरफुल गोल दें। इसे एक मेजर चैलेंज या चेंज की तरह लेना चाहिए। सभी का फोकस इस गोल की तरफ लगाना होगा। हर व्यक्ति को एक अहम रोल अदा करना होगा। ऐसे में टीम ज्यादा आउटपुट दे पाएगी और प्रोडक्टिव एक्टिविटीज को ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।

कम्युनिकेशन है जरूरीः समय-समय पर टीम के साथ इंटरेक्शन होते रहना बहुत जरूरी है। सभी एचओडी के साथ एक बार मीटिंग जरूर होनी चाहिए। टॉप ऑफिशियल्स के साथ मीटिंग से वे खुश भी होंगे और पूरी टीम को एक एनर्जी मिलेगी। सीईओ लेवल के ऑफिसर सप्ताह में दो बार भी छोटे ग्रुप के वर्कर्ज के साथ 10-15 मिनट बात कर वर्कर्ज की दिक्कतों को ध्यान से सुनें। उनकी प्रोब्लम्स को हल करने पर जोर देना कंपनी के हित में होगा। सीनियर एग्जिक्यूटिव्स के साथ मिलकर उन्हें समय-समय पर कोच भी करना चाहिए।

इन्फार्मेशन शेयर करेः अगर कर्मचारियों को कंपनी के चैलेंज के बारे में पहले ही बता दिया जाए, तो ज्यादा बेस्ट रहता है। इससे उन्हें न तो इस बात पर हैरानी होगी कि क्या हो रहा है और न ही वे खुद को कंपनी से अलग महसूस करेंगे। अगर वहां सरप्राइज नहीं हो, तो गोसिप्स भी नहीं होनी चाहिए।

सिस्टम मेंटेन करेः अगर किसी कंपनी या ऑर्गेनाइजेशन में काम का कोई सिस्टम नहीं हो, तो मौजूदा पॉलिसी भी प्रभावित हो जाती है। इसका असर टीम पर भी पड़ता है। पूरी टीम आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है। उदाहरण के तौर पर देखें तो अगर रोड सिग्नल फेल हो जाएं, तो ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है। इसीलिए सिस्टम का दुरुस्त होना बहुत जरूरी है, चाहे यह कोई कंपनी ही क्यों न हो। वहीं सिस्टम को चेक करते रहना भी बहुत जरूरी है। समय- समय पर ऐसे चेक किए जा सकते हैं।

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