यूरोप-भारत आएंगे साथ-साथ

नई दिल्ली — प्रधानमंत्री  डा. मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत यूरोपीय संघ के साथ न केवल राजनीतिक तथा सामरिक सहयोग मजबूत करना चाहता है, बल्कि आतंकवाद तथा अन्य तरह की चुनौतियों के मुकाबले के लिए भी हाथ बंटाना चाहता है। डा. सिंह ने  ब्रुसेल्स रवाना होने से ठीक पहले अपने एक वक्तव्य में यह बात कही। वह शुक्रवार को भारत यूरोपीय संघ के सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं। वह बेल्जियम के अलावा जर्मनी की भी यात्रा पर जा रहे हैं। सम्मेलन में दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मसलों के अलावा क्षेत्रीय मसलों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें अफगानिस्तान का भी मुद्दा शामिल है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन तथा विश्व व्यापी अर्थव्यवस्था पर भी चर्चा होगी और ग्रुप 28 की भूमिका की भी चर्चा होगी कि वह किस तरह आर्थिक मंदी को दूर करने में अपना सहयोग करेगा। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि यूरोपीय संघ के लिस्बन समझौता के लागू होने के बाद यह पहला मौका है, जब भारत-यूरोपीय संघ की बैठक हो रही है। इससे यूरोपीय संघ को विदेशों से संबंध बनाने में मजबूती मिलेगी और भारत यूरोपीय संघ की उस नई भूमिका का स्वागत करता है, जो लिस्बन समझौते के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय  मामलों मे ंअपनी भूमिका निभा सकता है। विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी विवेक काट्जू ने प्रधानमंत्री की यात्रा के मौके पर पत्रकारों को बताया कि डा. मनमोहन सिंह की इस यात्रा से द्विपक्षीय कारोबार 53 अरब यूरो डालर से बढ़कर 134 अरब यूरो डालर हो जाएगा। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार एवं पूंजी निवेश संबंधी समझौते को नया रूप देने के लिए दोनों एक स्थिति रिपोर्ट जारी करेंगे।

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