विस प्रेस गैलरी से धर्मशाला साफ

विस सत्र में धर्मशाला मितव्ययता के चल रहे चाबुक ने पत्रकारों की प्रस्तावित सुविधाएं भी छीन ली हैं। इसके चलते पहले की तरह राज्य स्तरीय पत्रकारों को शीतकालीन सत्र में सुविधाओं की कमी खलती रहेगी। शिमला से सत्र के लिए आने वाले पत्रकारों को न तो सरकार पहले जैसी यात्रा सुविधाएं दे रही है और न ही आवासीय प्रबंध होंगे। हालांकि धर्मशाला में चलने वाले इस सत्र की कवरेज के लिए यहां का मीडिया भी मुस्तैद रहता है। प्रदेश सरकार ने धर्मशाला को भावनात्मक राजधानी का दर्जा दिया है। चूंकि यहां प्रदेश का दूसरा विधानसभा भवन भी है। बावजूद इसके विस प्रेस गैलरी की कमेटी में प्रदेश की दूसरी राजधानी के पत्रकारों को अभी तक स्थान नहीं मिल पाया है। प्रेस एडवाइजरी कमेटी में यह मांग प्रमुखता से उठाई जा चुकी है कि  प्रत्येक दैनिक समाचार पत्र के धर्मशाला में कार्यरत संवाददाता को राज्य स्तरीय दर्जा दिया जाए। डीपीआर ने प्रत्येक दैनिक समाचार पत्र के दो संवाददाताओं को राज्य स्तरीय दर्जा दिया है। जाहिर है कि हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सभी हिंदी दैनिक समाचार पत्र धर्मशाला से प्रकाशित होते हैं। इन समाचार पत्रों के संपादक भी धर्मशाला में बैठते हैं। बावजूद इसके  राज्य सरकार धर्मशाला के मीडिया से भेदभाव कर रही है। इसे सरकार की राजनीतिक मजबूरी कहें या मीडिया को गंभीरता से न लेने का नतीजा? सच्चाई यही है कि प्रेस एडवाइजरी कमेटी की सिफारिशों के बावजूद धर्मशाला के पत्रकारों को सरकार ने राज्य स्तरीय दर्जा नहीं दिया है। नतीजतन विधानसभा प्रेस गैलरी की कमेटी में धर्मशाला के पत्रकार शामिल नहीं हो पा रहे हैं। सरकार के इस उदासीन रवैये के चलते पिछले पांच वर्षों से धर्मशाला में होने वाले सत्र के लिए शिमला से पत्रकार ढोए जा रहे हैं।

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