41 मूल्यांकन केंद्रों का स्टाफ फंसा

धर्मशाला — परीक्षा फर्जीबाड़े में जांच के घेरे में आए 41 मूृल्यांकन केंद्रों के स्टाफ पर कानूनी कार्रवाई का शिकंजा कसेगा। मार्च, 2010 की बोर्ड परीक्षाओं में इन केंद्रों में 208 उन छात्रों के पेपरों का मूल्यांकन किया गया है, जिन्होंने परीक्षा दी ही नहीं थी। इसके अलावा 25 ऐसे टीचर हैं, जिन्होंने फर्जी तरीके से भेजे गए आठवीं कक्षा के छात्रों के पेपर चैक कर लिए थे। परीक्षा फर्जीबाड़े में पुलिस का कानूनी शिकंजा अब बोर्ड कर्मियों के अलावा उन अध्यापकों पर भी कसेगा, जो कि फर्जीबाड़े का हिस्सा रहे हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड के महा घोटाला की आरोपी मास्टरमाइंड जुंडली अश्वनी डोगरा और सुरेश चौधरी की जमानत के बाद पुलिस ने इस केस में नए तरीके से एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। इसको लेकर आईजी नार्दर्न रेंज धर्मशाला ने एसपी कांगड़ा तथा बोर्ड घोटाले की जांच कर रहे तीनों जांच अधिकारियों और एडिशनल एसपी उमापति जम्वाल को तलब कर रिव्यू किया। आईजी ने पुलिस को मामले की जांच में तेजी लाने के आदेश जारी किए। उधर, हाई कोर्ट में सोमवार को बोर्ड के आरोपी कर्मचारी भरत भूषण सूद और महेंद्र अत्री की याचिका पर सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने दोनों कर्मचारियों को जमानत देकर छोड़ने का फैसला दिया। पुलिस तफतीश में यह पाया गया है कि हिमाचल बोर्ड ने 197 फर्जी परीक्षा फार्म के आधार पर आरोपी छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान कर दी थी। इन जालसाज छात्रों के परीक्षा आवेदनों में किसी की विटनेस नहीं डाली गई थी। बोर्ड के इस घोटाले में अब यह साफ हो गया है कि जालसाज छात्रों को 26 परीक्षा केंद्र अलॉट किए गए थे, लेकिन आरोपी छात्र आबंटित परीक्षा केंद्रों में पहंुचे ही नहीं।

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