हिमाचल में प्राइवेट पेपर बंद

धर्मशाला— स्कूल शिक्षा बोर्ड ने प्रदेश में प्राइवेट परीक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्राइवेट छात्र अब बोर्ड के स्टेट ओपन स्कूल में परीक्षा दे सकेंगे। इसके अलावा  रिवैल्यूवेशन के लिए अब बोर्ड ने अध्यक्ष की शक्तियां छीन ली हैं और 20 प्रतिशत अंक वाले ही पुनर्मूल्यांकन के आवेदन के लिए अधिकृत होंगे। इस बार पुनर्मूल्यांकन मामलों में उत्तीर्ण छात्रों की बोर्ड आम परीक्षा के बाद अलग से परीक्षा आयोजित कर उन्हें अगली कक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान करेगा। बोर्ड ने वर्ष 1996 से पहले वाले डुप्लीकेट सर्टिफिकेट, डिटेल मार्क्स सहित उपलब्ध करवाने की छूट दे दी है। इसके लिए रिकार्ड उपलब्ध होना आवश्यक है। बोर्ड अब फोटोस्टेट तथा कम्प्यूटर से डाउनलोड परीक्षा फार्म को भी स्वीकार कर लेगा। संबद्धता प्राप्त निजी स्कूलों की ग्रेडिंग सिस्टम पर नजर रखने के लिए बोर्ड ने विशेष योजना तैयार की है। उक्त तमाम निर्णय बुधवार को स्कूल शिक्षा बोर्ड के निदेशक मंडल की बैठक में लिए गए हैं। इनमें सबसे अहम फैसला लिया गया है कि स्कूल शिक्षा बोर्ड निकट भविष्य में प्राइवेट परीक्षार्थियों का एग्जाम स्टेट ओपन स्कूल से लेगा। अगले साल मैट्रिक से यह प्रणाली लागू होगी और इसके अगले साल जमा दो में भी इसे लागू कर दिया जाएगा। खबर की पुष्टि करते हुए स्कूल शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष बीआर शर्मा ने बताया कि इस साल रिवैल्यूवेशन में पास हुए छात्र बोर्ड की आम परीक्षा से वंचित हो गए थे। उनका कहना है कि शिक्षा बोर्ड ने इन छात्रों को राहत प्रदान करते हुए इसी साल अगली कक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। उनका कहना है कि ऐसे छात्र पहली से 15 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसे छात्रों की परीक्षा बोर्ड की आम परीक्षाओं के बाद आयोजित की जाएगी। इसके अलावा बोर्ड ने कर्मचारियों को अंशदायी पेंशन स्कीम लागू करने का भी निर्णय लिया है। बोर्ड में पड़ी एवरग्रीन पुस्तकें, जो कि पाठ्यक्रम से हटा दी गई हैं, उन्हें जिला पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों, सरकारी व संबद्धता प्राप्त स्कूलों की लाइब्रेरी में निःशुल्क देने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा पैरा टीचर्स जिनका पढ़ाने का अनुभव पांच वर्ष का हो, बोर्ड से संबंधित कार्य करने के लिए पात्र होंगे।

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